سورة التغابن

सूरह तग़ाबुन हिंदी में

हार-जीत

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह तग़ाबुन (التغابن) क़ुरआन की 64वीं सूरह है और इसमें 18 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "हार-जीत" है। यह मदनी सूरह है और पारा 28 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह तग़ाबुन का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह तग़ाबुन: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. يُسَبِّحُ لِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۖ لَهُ ٱلْمُلْكُ وَلَهُ ٱلْحَمْدُ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ۝١

    Yusabbihu lillahi ma fee alssamawati wama fee alardi lahu almulku walahu alhamdu wahuwa ʿala kulli shayin qadeerun

    अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करती है प्रत्येक चीज़, जो आकाशों में है तथा जो धरती में है। उसी का राज्य है और उसी की सब प्रशंसा है तथा वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

  2. هُوَ ٱلَّذِى خَلَقَكُمْ فَمِنكُمْ كَافِرٌ وَمِنكُم مُّؤْمِنٌ ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ۝٢

    Huwa allathee khalaqakum faminkum kafirun waminkum muminun waAllahu bima taʿmaloona baseerun

    वही है जिसने तुम्हें पैदा किया। फिर तुममें से कोई काफ़िर है और तुममें से कोई ईमान वाला है। तथा तुम जो कुछ भी करते हो, अल्लाह उसे खूब देखने वाला है।1

    टिप्पणियाँ
    [1] देखने का अर्थ कर्मों के अनुसार बदला देना है।
  3. خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ وَصَوَّرَكُمْ فَأَحْسَنَ صُوَرَكُمْ ۖ وَإِلَيْهِ ٱلْمَصِيرُ۝٣

    Khalaqa alssamawati waalarda bialhaqqi wasawwarakum faahsana suwarakum wailayhi almaseeru

    उसने आकाशों तथा धरती को सत्य के साथ पैदा किया। तथा उसने तुम्हारे रूप बनाए, तो तुम्हारे रूप अच्छे बनाए। और उसी की ओर लौटकर जाना है।2

    टिप्पणियाँ
    [2] अर्थात प्रलय के दिन कर्मों का प्रतिफल पाने के लिए।
  4. يَعْلَمُ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ ۚ وَٱللَّهُ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ۝٤

    Yaʿlamu ma fee alssamawati waalardi wayaʿlamu ma tusirroona wama tuʿlinoona waAllahu ʿaleemun bithati alssudoori

    वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है। तथा वह जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ तुम प्रकट करते हो। और अल्लाह दिलों के भेद को भली-भाँति जानने वाला है।

  5. أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَؤُا۟ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن قَبْلُ فَذَاقُوا۟ وَبَالَ أَمْرِهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ۝٥

    Alam yatikum nabao allatheena kafaroo min qablu fathaqoo wabala amrihim walahum ʿathabun aleemun

    क्या तुम्हारे पास उन लोगों की खबर नहीं आई, जिन्होंने इससे पहले कुफ़्र किया। फिर उन्होंने अपने कर्म का दुष्परिणाम चखा? और उनके लिए दुःखदायी यातना है।3

    टिप्पणियाँ
    [3] अर्थात परलोक में नरक की यातना।
  6. ذَٰلِكَ بِأَنَّهُۥ كَانَت تَّأْتِيهِمْ رُسُلُهُم بِٱلْبَيِّنَـٰتِ فَقَالُوٓا۟ أَبَشَرٌ يَهْدُونَنَا فَكَفَرُوا۟ وَتَوَلَّوا۟ ۚ وَّٱسْتَغْنَى ٱللَّهُ ۚ وَٱللَّهُ غَنِىٌّ حَمِيدٌ۝٦

    Thalika biannahu kanat tateehim rusuluhum bialbayyinati faqaloo abasharun yahdoonana fakafaroo watawallaw waistaghna Allahu waAllahu ghaniyyun hameedun

    यह इस कारण कि उनके पास उनके रसूल खुली निशानियाँ लेकर आते थे। तो उन्होंने कहा : क्या मनुष्य हमें मार्गदर्शन4 करेंगे? चुनाँचे उन्होंने इनकार किया और मुँह फेर लिया। और अल्लाह ने परवाह न की तथा अल्लाह बेनियाज़, सर्व प्रशंसित है।

    टिप्पणियाँ
    [4] अर्थात रसूल मनुष्य कैसे हो सकता है। यह कितनी विचित्र बात है कि पत्थर की मूर्तियों को तो पूज्य बना लिया जाए, इसी प्रकार मनुष्य को अल्लाह का अवतार और पुत्र बना लिया जाए, पर यदि रसूल सत्य ले कर आए तो उसे न माना जाए। इसका अर्थ यह हुआ कि मनुष्य कुपथ करे तो यह मान्य है, और यदि वह सीधी राह दिखाए तो मान्य नहीं।
  7. زَعَمَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَن لَّن يُبْعَثُوا۟ ۚ قُلْ بَلَىٰ وَرَبِّى لَتُبْعَثُنَّ ثُمَّ لَتُنَبَّؤُنَّ بِمَا عَمِلْتُمْ ۚ وَذَٰلِكَ عَلَى ٱللَّهِ يَسِيرٌ۝٧

    Zaʿama allatheena kafaroo an lan yubʿathoo qul bala warabbee latubʿathunna thumma latunabbaonna bima ʿamiltum wathalika ʿala Allahi yaseerun

    काफ़िरों ने समझ रखा है कि वे कदापि पुनर्जीवित नहीं किए जाएँगे। आप कह दें : क्यों नहीं? मेरे पालनहार की क़सम! निश्चय तुम अवश्य पुनर्जीवित किए जाओगे। फिर निश्चय तुम्हें अवश्य बताया जाएगा कि तुमने (संसार में) क्या किया है तथा यह अल्लाह के लिए अति सरल है।

  8. فَـَٔامِنُوا۟ بِٱللَّهِ وَرَسُولِهِۦ وَٱلنُّورِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلْنَا ۚ وَٱللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ۝٨

    Faaminoo biAllahi warasoolihi waalnnoori allathee anzalna waAllahu bima taʿmaloona khabeerun

    अतः तुम ईमान लाओ अल्लाह तथा उसके रसूल5 पर एवं उस नूर (प्रकाश)6 पर, जिसे हमने उतारा है। तथा अल्लाह, जो तुम करते हो, उससे भली-भाँति अवगत है।

    टिप्पणियाँ
    [5] इससे अभिप्राय अंतिम रसूल मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। [6] प्रकाश से अभिप्राय अंतिम ईश-वाणी क़ुरआन है।
  9. يَوْمَ يَجْمَعُكُمْ لِيَوْمِ ٱلْجَمْعِ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلتَّغَابُنِ ۗ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ وَيَعْمَلْ صَـٰلِحًا يُكَفِّرْ عَنْهُ سَيِّـَٔاتِهِۦ وَيُدْخِلْهُ جَنَّـٰتٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَآ أَبَدًا ۚ ذَٰلِكَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ۝٩

    Yawma yajmaʿukum liyawmi aljamʿi thalika yawmu alttaghabuni waman yumin biAllahi wayaʿmal salihan yukaffir ʿanhu sayyiatihi wayudkhilhu jannatin tajree min tahtiha alanharu khalideena feeha abadan thalika alfawzu alʿatheemu

    जिस दिन वह तुम्हें, एकत्र होने के दिन एकत्रित करेगा, वही दिन है हार जीत का। और जो अल्लाह पर ईमान लाए और सत्कर्म करे, अल्लाह उसकी बुराइयों को उससे दूर कर देगा और उसे ऐसी जन्नतों में दाख़िल करेगा, जिनके नीचे से नहरें बहतीं होंगी। वे वहाँ हमेशा रहेंगे। यही बड़ी सफलता है।

  10. وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَآ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ۝١٠

    Waallatheena kafaroo wakaththaboo biayatina olaika ashabu alnnari khalideena feeha wabisa almaseeru

    और जिन लोगों ने कुफ़्र किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही जहन्नम वाले हैं, जो उसमें हमेशा रहने वाले हैं। तथा वह बुरा ठिकाना है।

  11. مَآ أَصَابَ مِن مُّصِيبَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ وَمَن يُؤْمِنۢ بِٱللَّهِ يَهْدِ قَلْبَهُۥ ۚ وَٱللَّهُ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ۝١١

    Ma asaba min museebatin illa biithni Allahi waman yumin biAllahi yahdi qalbahu waAllahu bikulli shayin ʿaleemun

    कोई भी विपत्ति नहीं पहुँची परंतु अल्लाह की अनुमति से। तथा जो अल्लाह पर ईमान7 लाए, वह उसके दिल को मार्गदर्शन प्रदान करता8 है। तथा अल्लाह प्रत्येक वस्तु को भली-भाँति जानने वाला है।

    टिप्पणियाँ
    [7] अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आपदा को यह समझ कर सहन करता है कि अल्लाह ने यही उस के भाग्य में लिखा है। [8] ह़दीस में है कि ईमान वाले की दशा विभिन्न होती है। और उसकी दशा उत्तम ही होती है। जब उसे सुख मिले, तो कृतज्ञ होता है। और दुख हो, तो सहन करता है। और यह उसके लिए उत्तम है। (मुस्लिम : 2999)
  12. وَأَطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ ۚ فَإِن تَوَلَّيْتُمْ فَإِنَّمَا عَلَىٰ رَسُولِنَا ٱلْبَلَـٰغُ ٱلْمُبِينُ۝١٢

    Waateeʿoo Allaha waateeʿoo alrrasoola fain tawallaytum fainnama ʿala rasoolina albalaghu almubeenu

    तथा अल्लाह का आज्ञापालन करो और रसूल का आज्ञापालन करो। फिर यदि तुम विमुख हुए, तो हमारे रसूल का दायित्व केवल स्पष्ट रूप से पहुँचा देना है।

  13. ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ۝١٣

    Allahu la ilaha illa huwa waʿala Allahi falyatawakkali almuminoona

    अल्लाह वह है, जिसके सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। अतः, ईमान वालों को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।

  14. يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِنَّ مِنْ أَزْوَٰجِكُمْ وَأَوْلَـٰدِكُمْ عَدُوًّا لَّكُمْ فَٱحْذَرُوهُمْ ۚ وَإِن تَعْفُوا۟ وَتَصْفَحُوا۟ وَتَغْفِرُوا۟ فَإِنَّ ٱللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ۝١٤

    Ya ayyuha allatheena amanoo inna min azwajikum waawladikum ʿaduwwan lakum faihtharoohum wain taʿfoo watasfahoo wataghfiroo fainna Allaha ghafoorun raheemun

    ऐ ईमान वालो! निःसंदेह तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी संतान में से कुछ तुम्हारे शत्रु9 हैं। अतः उनसे सावधान रहो। और यदि तुम माफ़ करो तथा दरगुज़र करो और क्षमा कर दो, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील, अत्यंत दयावान् है।

    टिप्पणियाँ
    [9] अर्थात जो तुम्हें सत्कर्म एवं अल्लाह के आज्ञापालन से रोकते हों, फिर भी उनका सुधार करने और क्षमा करने का निर्देश दिया गया है।
  15. إِنَّمَآ أَمْوَٰلُكُمْ وَأَوْلَـٰدُكُمْ فِتْنَةٌ ۚ وَٱللَّهُ عِندَهُۥٓ أَجْرٌ عَظِيمٌ۝١٥

    Innama amwalukum waawladukum fitnatun waAllahu ʿindahu ajrun ʿatheemun

    निःसंदेह तुम्हारे धन और तुम्हारी संतान एक परीक्षा हैं तथा अल्लाह ही के पास बड़ा प्रतिफल10 है।

    टिप्पणियाँ
    [10] भावार्थ यह है कि धन और संतान के मोह में अल्लाह की अवज्ञा न करो।
  16. فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ مَا ٱسْتَطَعْتُمْ وَٱسْمَعُوا۟ وَأَطِيعُوا۟ وَأَنفِقُوا۟ خَيْرًا لِّأَنفُسِكُمْ ۗ وَمَن يُوقَ شُحَّ نَفْسِهِۦ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُفْلِحُونَ۝١٦

    Faittaqoo Allaha ma istataʿtum waismaʿoo waateeʿoo waanfiqoo khayran lianfusikum waman yooqa shuhha nafsihi faolaika humu almuflihoona

    अतः अल्लाह से डरते रहो, जितना तुमसे हो सके, तथा सुनो और आज्ञापालन करो और खर्च करो। यह तुम्हारे लिए उत्तम है। तथा जो अपने मन की कंजूसी (लालच) से बचा लिया जाए, तो वही लोग सफल होने वाले हैं।

  17. إِن تُقْرِضُوا۟ ٱللَّهَ قَرْضًا حَسَنًا يُضَـٰعِفْهُ لَكُمْ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَٱللَّهُ شَكُورٌ حَلِيمٌ۝١٧

    In tuqridoo Allaha qardan hasanan yudaʿifhu lakum wayaghfir lakum waAllahu shakoorun haleemun

    यदि तुम अल्लाह को उत्तम ऋण11 दोगो, तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना कर देगा और तुम्हें क्षमा कर देगा और अल्लाह बड़ा गुणग्राही, अपार सहनशील है।

    टिप्पणियाँ
    [11] ऋण से अभिप्राय अल्लाह की राह में दान करना है।
  18. عَـٰلِمُ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ۝١٨

    ʿalimu alghaybi waalshshahadati alʿazeezu alhakeemu

    वह हर परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानने वाला, सब पर प्रभुत्वशाली, पूर्ण हिकमत वाला है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह तग़ाबुन के नाम का मतलब क्या है?

तग़ाबुन का मतलब "हार-जीत" है।

सूरह तग़ाबुन किस पारे में है?

सूरह तग़ाबुन पारा 28 में है।

सूरह तग़ाबुन में कितनी आयतें हैं?

सूरह तग़ाबुन में 18 आयतें हैं।

सूरह तग़ाबुन मक्की है या मदनी?

सूरह तग़ाबुन मदनी सूरह है।

सूरह तग़ाबुन क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 64वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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