سورة الفلق
सूरह फ़लक़ हिंदी में
सुबह का उजाला
- 113
- 5 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ना 604
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सूरह फ़लक़ (الفلق) क़ुरआन की 113वीं सूरह है और इसमें 5 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "सुबह का उजाला" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह फ़लक़ का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह फ़लक़: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ١
Qul aʿoothu birabbi alfalaqi
(ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं सुबह के पालनहार की शरण लेता हूँ।
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مِن شَرِّ مَا خَلَقَ٢
Min sharri ma khalaqa
उस चीज़ की बुराई से, जो उसने पैदा की।
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وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ٣
Wamin sharri ghasiqin itha waqaba
तथा अंधेरी रात की बुराई से, जब वह छा जाए।1
टिप्पणियाँ
[1] (1-3) इनमें संबोधित तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को किया गया है, परंतु आपके माध्यम से पूरे मुसलमानों के लिए संबोधन है। शरण माँगने के लिए तीन बातें ज़रूरी हैं : (1) शरण माँगाना। (2) जो शरण माँगता हो। (3) जिसके भय से शरण माँगी जाती हो और अपने को उससे बचाने के लिए दूसरे की सुरक्षा और शरण में जाना चाहता हो। फिर शरण वही माँगता है, जो यह सोचता है कि वह स्वयं अपनी रक्षा नहीं कर सकता। और अपनी रक्षा के लिए वह ऐसे व्यक्ति या अस्तित्व की शरण लेता है जिसके बारे में उसका विश्वास होता है कि वह उसकी रक्षा कर सकता है। अब स्वभाविक नियमानुसार इस संसार में सुरक्षा किसी वस्तु या व्यक्ति से प्राप्त की जाती है, जैसे धूप से बचने के लिये पेड़ या भवन आदि की। परंतु एक खतरा वह भी होता है जिससे रक्षा के लिए किसी अनदेखी शक्ति से शरण माँगी जाती है, जो इस विश्व पर राज करती है। और वह उसकी रक्षा अवश्य कर सकती है। यही दूसरे प्रकार की शरण है, जो इन दोनों सूरतों में अभिप्रेत है। और क़ुरआन में जहाँ भी अल्लाह की शरण लेने की चर्चा है उसका अर्थ यही विशेष प्रकार की शरण है। और यह तौह़ीद पर विश्वास का अंश है। ऐसे ही शरण के लिए विश्वासहीन देवी-देवताओं इत्यादि को पुकारना शिर्क और घोर पापा है। -
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّـٰثَـٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ٤
Wamin sharri alnnaffathati fee alʿuqadi
तथा गाँठों में फूँकने वालियों की बुराई से।
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وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ٥
Wamin sharri hasidin itha hasada
तथा ईर्ष्या करने वाले की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।2
टिप्पणियाँ
[2] (4-5) इन दोनों आयतों में जादू और हसद (ईर्ष्या) की बुराई से अल्लाह की शरण में आने की शिक्षा दी गई है। और हसद ऐसा रोग है जो किसी व्यक्ति को दूसरों को हानि पहुँचाने के लिए तैयार कर देता है। और आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर भी जादू, हसद ही के कारण किया गया था। यहाँ ज्ञातव्य है कि इस्लाम ने जादू को अधर्म कहा है जिससे इनसान के परलोक का विनाश हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह फ़लक़ के नाम का मतलब क्या है?
फ़लक़ का मतलब "सुबह का उजाला" है।
सूरह फ़लक़ किस पारे में है?
सूरह फ़लक़ पारा 30 में है।
सूरह फ़लक़ में कितनी आयतें हैं?
सूरह फ़लक़ में 5 आयतें हैं।
सूरह फ़लक़ मक्की है या मदनी?
सूरह फ़लक़ मक्की सूरह है।
सूरह फ़लक़ क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 113वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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