سورة الفاتحة
सूरह फ़ातिहा हिंदी में
खोलने वाली
- 1
- 7 आयतें
- मक्की
- पारा 1
- पन्ना 1
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सूरह फ़ातिहा (الفاتحة) क़ुरआन की पहली सूरह है और इसमें 7 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "खोलने वाली" है। यह मक्की सूरह है और पारा 1 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह फ़ातिहा का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह फ़ातिहा: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ١
Bismi Allahi alrrahmani alrraheemi
अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला है।
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ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ٢
Alhamdu lillahi rabbi alʿalameena
हर प्रकार की प्रशंसा उस अल्लाह1 के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार2 है।
टिप्पणियाँ
[1] 'अल्लाह' का अर्थ 'ह़क़ीक़ी पूज्य' है। जो संसार के रचयिता, विधाता के लिए विशिष्ट है। [2] 'पालनहार' होने का अर्थ यह है कि जिस ने इस संसार की रचना करके इसके प्रतिपालन की ऐसी विचित्र व्यवस्था की है कि सभी को अपनी आवश्यक्ता तथा स्थिति के अनुसार सब कुछ मिल रहा है। यह संसार का पूरा कार्य, सूर्य, वायु, जल, धरती सब जीवन की रक्षा एवं जीवन की प्रत्येक योग्यता की रखवाली में लगे हुए हैं। इससे सत्य पूज्य का परिचय एवं ज्ञान होता है। -
ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ٣
Alrrahmani alrraheemi
जो अत्यंत दयावान्, असीम दया वाला3 है।
टिप्पणियाँ
[3] अर्थात वह संसार की व्यवस्था एवं रक्षा अपनी अपार दया से कर रहा है। अतः प्रशंसा एवं पूजा के योग्य भी मात्र वही है। -
مَـٰلِكِ يَوْمِ ٱلدِّينِ٤
Maliki yawmi alddeeni
जो बदले4 के दिन का मालिक है।
टिप्पणियाँ
[4] बदले के दिन से अभिप्राय प्रलय का दिन है। आयत का भावार्थ यह है कि सत्य धर्म बदले के नियम पर आधारित है। अर्थात जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। जैसे कोई जौ बोकर गेहूँ की, तथा आग में कूदकर शीतल होने की आशा नहीं कर सकता, ऐसे ही भले-बुरे कर्मों का भी अपना स्वभाविक गुण और प्रभाव होता है। फिर संसार में भी कुकर्मों का दुष्परिणाम कभी-कभी देखा जाता है। परंतु यह भी देखा जाता है कि दुराचारी और अत्याचारी सुखी जीवन निर्वाह कर लेता है, और उसकी पकड़ इस संसार में नहीं होती। इसलिए न्याय के लिए एक दिन अवश्य होना चाहिए। उसी का नाम 'क़ियामत' (प्रलय का दिन) है। "बदले के दिन का मालिक" होने का अर्थ यह है कि संसार में भी उसने इनसानों को अधिकार और राज्य दिए हैं। परंतु प्रलय के दिन सब अधिकार उसी का रहेगा। और वही न्यायपूर्वक सबको उनके कर्मों का प्रतिफल देगा। -
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ٥
Iyyaka naʿbudu waiyyaka nastaʿeenu
(ऐ अल्लाह!) हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझी से सहायता माँगते5 हैं।
टिप्पणियाँ
[5] इन आयतों में प्रार्थना के रूप में मात्र अल्लाह ही की पूजा और उसी को सहायतार्थ गुहारने की शिक्षा दी गई है। इस्लाम की परिभाषा में इसी का नाम 'तौह़ीद' (एकेश्वरवाद) है, जो सत्य धर्म का आधार है। और अल्लाह के सिवा या उसके साथ किसी देवी-देवता आदि को पुकारना, उसकी पूजा करना, किसी प्रत्यक्ष साधन के बिना किसी को सहायता के लिये गुहारना, किसी व्यक्ति और वस्तु में अल्लाह का कोई विशेष गुण मानना आदि एकेश्वरवाद (तौह़ीद) के विरुद्ध हैं जो अक्षम्य पाप हैं। जिसके साथ कोई पुण्य का कार्य मान्य नहीं। -
ٱهْدِنَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ٦
Ihdina alssirata almustaqeema
हमें सीधे मार्ग पर चला।
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صِرَٰطَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ ٱلْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا ٱلضَّآلِّينَ٧
Sirata allatheena anʿamta ʿalayhim ghayri almaghdoobi ʿalayhim wala alddalleena
उन लोगों का मार्ग, जिनपर तूने अनुग्रह किया।6 उनका नहीं, जिनपर तेरा प्रकोप7 हुआ और न ही उनका, जो गुमराह हैं।
टिप्पणियाँ
[6] इस आयत में सीधे मार्ग का चिह्न यह बताया गया है कि यह उनका मार्ग है, जिनपर अल्लाह का पुरस्कार हुआ। उनका नहीं, जो प्रकोपित हुए और न उनका, जो सत्य मार्ग से बहक गए। [7] 'प्रकोपित' से अभिप्राय वे हैं, जो सत्य धर्म को, जानते हुए, मात्र अभिमान अथवा अपने पुर्वजों की परंपरागत प्रथा के मोह में अथवा अपनी बड़ाई के जाने के भय से, नहीं मानते। 'गुमराह' से अभिप्रेत वे हैं, जो सत्य धर्म के होते हुए, उससे दूर हो गए और देवी-देवताओं आदि में अल्लाह के विशेष गुण मानकर उनको रोग निवारण, दुःख दूर करने और सुख-संतान आदि देने के लिए गुहारने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह फ़ातिहा के नाम का मतलब क्या है?
फ़ातिहा का मतलब "खोलने वाली" है।
सूरह फ़ातिहा किस पारे में है?
सूरह फ़ातिहा पारा 1 में है।
सूरह फ़ातिहा में कितनी आयतें हैं?
सूरह फ़ातिहा में 7 आयतें हैं।
सूरह फ़ातिहा मक्की है या मदनी?
सूरह फ़ातिहा मक्की सूरह है।
सूरह फ़ातिहा क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की पहली सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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