سورة الناس

सूरह नास हिंदी में

इंसान

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह नास (الناس) क़ुरआन की 114वीं सूरह है और इसमें 6 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "इंसान" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह नास का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह नास: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ۝١

    Qul aʿoothu birabbi alnnasi

    (ऐ नबी!) कह दीजिए : मैं शरण लेता हूँ लोगों के पालनहार की।

  2. مَلِكِ ٱلنَّاسِ۝٢

    Maliki alnnasi

    लोगों के बादशाह की।

  3. إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ۝٣

    Ilahi alnnasi

    लोगों के सत्य पूज्य की।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-3) यहाँ अल्लाह को उसके तीन गुणों के साथ याद करके उसकी शरण लेने की शिक्षा दी गई है। एक उसका सब मानवजाति का पालनहार और स्वामी होना। दूसरे उसका सभी इनसानों का अधिपति और शासक होना। तीसरे उसका इनसानों का सत्य पूज्य होना। भावार्थ यह है कि (मैं) उस अल्लाह की शरण माँगता हूँ जो इनसानों का पालनहार, शासक और पूज्य होने के कारण उनपर पूरा नियंत्रण और अधिकार रखता है। जो वास्तव में, उस बुराई से इनसानों को बचा सकता है, जिससे वे स्वयं बचने और दूसरों को बचाने में अक्षम हैं, उसके सिवा कोई है भी नहीं जो शरण दे सकता हो।
  4. مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ۝٤

    Min sharri alwaswasi alkhannasi

    वसवसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले की बुराई से।

  5. ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ۝٥

    Allathee yuwaswisu fee sudoori alnnasi

    जो लोगों के दिलों में वसवसे डालता है।

  6. مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ۝٦

    Mina aljinnati wa alnnasm

    जिन्नों और इनसानों में से।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (4-6) आयत संख्या 4 में 'वसवास' शब्द का प्रयोग हुआ है। जिसका अर्थ है दिलों में ऐसी बुरी बातें डाल देना कि जिसके दिल में डाली जा रही हों उसे उसका ज्ञान भी न हो। और इसी प्रकार आयत संख्या 4 में 'ख़न्नास' का शब्द प्रयोग हुआ है। जिसका अर्थ है सुकड़ जाना, छुप जाना, पीछे हट जाना, धीरे-धीरे किसी को बुराई के लिए तैयार करना आदि। अर्थात दिलों में भ्रम डालने वाला, और सत्य के विरुद्ध मन में बुरी भावनाएँ उत्पन्न करने वाला। चाहे वह जिन्नों में से हो, अथवा मनुष्यों में से हो। इन सब की बुराइयों से हम अल्लाह की शरण लेते हैं, जो हमारा स्वामी और सच्चा पूज्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह नास के नाम का मतलब क्या है?

नास का मतलब "इंसान" है।

सूरह नास किस पारे में है?

सूरह नास पारा 30 में है।

सूरह नास में कितनी आयतें हैं?

सूरह नास में 6 आयतें हैं।

सूरह नास मक्की है या मदनी?

सूरह नास मक्की सूरह है।

सूरह नास क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 114वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

Found a mistake? Report a mistake and we will check it against the source.

पढ़ने की सेटिंग्स

क़ुरआन का फ़ॉन्ट
अरबी का साइज़
100%
तर्जुमे का साइज़
100%
थीम