سورة الكوثر

सूरह कौसर हिंदी में

बहुत ज़्यादा भलाई

मुसहफ़

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सूरह कौसर (الكوثر) क़ुरआन की 108वीं सूरह है और इसमें 3 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "बहुत ज़्यादा भलाई" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह कौसर का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह कौसर: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. إِنَّآ أَعْطَيْنَـٰكَ ٱلْكَوْثَرَ۝١

    Inna aʿtaynaka alkawthara

    (ऐ नबी!) हमने आपको कौसर प्रदान किया है।1

    टिप्पणियाँ
    [1] कौसर का अर्थ है बहुत ज़्यादा और अत्यधिक भलाई। और नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया कि कौसर एक ह़ौज़ (कुंड) है, जो मुझे परलोक में प्रदान किया जाएगा। जब प्रत्येक व्यक्ति प्यास-प्यास कर रहा होगा और आपकी उम्मत आपके पास आएगी, आप पहले ही से वहाँ उपस्थित होंगे और आप उन्हें उससे पिलाएँगे, जिसका जल दूध से उजला और मधु से अधिक मधुर होगा। उसकी भूमि कस्तूरी होगी, उसकी सीमा और बरतनों का सविस्तार वर्णन ह़दीसों में आया है।
  2. فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَٱنْحَرْ۝٢

    Fasalli lirabbika wainhar

    तो आप अपने पालनहार ही के लिए नमाज़ पढ़ें तथा क़ुर्बानी करें।2

    टिप्पणियाँ
    [2] इस आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और आपके माध्यम से सभी मुसलमानों से कहा जा रहा है कि जब समस्त भलाइयाँ तुम्हारे पालनहार ही ने प्रदान की हैं, तो तुम भी मात्र उसी की पूजा करो और बलि भी उसी के लिए दो। मूर्तिपूजकों की भाँति देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना न करो और न उनके लिए बलि दो। वे तुम्हें कोई लाभ और हानि देने का सामर्थ्य नहीं रखते।
  3. إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ ٱلْأَبْتَرُ۝٣

    Inna shaniaka huwa alabtaru

    निःसंदेह आपका शत्रु ही बे नाम व निशान है।3

    टिप्पणियाँ
    [3] आयत संख्या 3 में 'अब्तर' का शब्द प्रयोग हुआ है। जिसका अर्थ है जड़ से अलग कर देना जिसके बाद कोई पेड़ सूख जाता है। और इस शब्द का प्रयोग उसके लिए भी किया जाता है जो अपनी जाति से अलग हो जाए, या जिसका कोई पुत्र जीवित न रह जाए, और उसके निधन के बाद उसका कोई नाम लेवा न हो। इस आयत में जो भविष्यवाणी की गई है, वह सत्य सिद्ध होकर पूरे मानव संसार को इस्लाम और क़ुरआन पर विचार करने के लिए बाध्य कर रही है। (इब्ने कसीर)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह कौसर के नाम का मतलब क्या है?

कौसर का मतलब "बहुत ज़्यादा भलाई" है।

सूरह कौसर किस पारे में है?

सूरह कौसर पारा 30 में है।

सूरह कौसर में कितनी आयतें हैं?

सूरह कौसर में 3 आयतें हैं।

सूरह कौसर मक्की है या मदनी?

सूरह कौसर मक्की सूरह है।

सूरह कौसर क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 108वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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