سورة المدثر
सूरह मुद्दस्सिर हिंदी में
चादर ओढ़ने वाले
- 74
- 56 आयतें
- मक्की
- पारा 29
- पन्ने 575–577
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सूरह मुद्दस्सिर (المدثر) क़ुरआन की 74वीं सूरह है और इसमें 56 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "चादर ओढ़ने वाले" है। यह मक्की सूरह है और पारा 29 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह मुद्दस्सिर का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह मुद्दस्सिर: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ١
Ya ayyuha almuddaththiru
ऐ कपड़े में लिपटने वाले!1
टिप्पणियाँ
[1] नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर प्रथम वह़्य के पश्चात् कुछ दिनों तक वह़्य नहीं आई। फिर एक बार आप जा रहे थे कि आकाश से एक आवाज़ सुनी। ऊपर देखा, तो वही फ़रिश्ता जो आपके पास 'ह़िरा' नामी गुफ़ा में आया था आकाश तथा धरती के बीच एक कुर्सी पर विराजमान था। जिससे आप डर गए और धरती पर गिर गए। फिर घर आए और अपनी पत्नी से कहा : मुझे चादर ओढ़ा दो, मुझे चादर ओढ़ा दो। उन्होंने चादर ओढ़ा दी। और अल्लाह ने यह सूरत उतारी। फिर निरंतर वह़्य आने लगी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4925, 4926, सह़ीह़ मुस्लिम : 161) प्रथम वह़्य से आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नबी बनाया गया। और अब आपपर धर्म के प्रचार का भार रख दिया गया। इन आयतों में आपके माध्यम से मुसलमानों को पवित्र रहने के निर्देश दिए गए हैं। -
قُمْ فَأَنذِرْ٢
Qum faanthir
खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।
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وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ٣
Warabbaka fakabbir
तथा अपने पालनहार ही की महिमा का वर्णन करो।
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وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ٤
Wathiyabaka fatahhir
तथा अपने कपड़े को पवित्र रखो।
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وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ٥
Waalrrujza faohjur
और गंदगी (बुतों) से दूर रहो।
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وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ٦
Wala tamnun tastakthiru
तथा उपकार न जताओ (अपनी नेकियों को) अधिक समझ कर।
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وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ٧
Walirabbika faisbir
और अपने पालनहार ही के लिए धैर्य से काम लो।
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فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ٨
Faitha nuqira fee alnnaqoori
फिर जब सूर में फूँक2 मारी जाएगी।
टिप्पणियाँ
[2] अर्थात प्रलय के दिन। -
فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌ٩
Fathalika yawmaithin yawmun ʿaseerun
तो वह दिन अति भीषण दिन होगा।
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عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍ١٠
ʿAla alkafireena ghayru yaseerin
काफ़िरों पर आसान न होगा।
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ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا١١
Tharnee waman khalaqtu waheedan
आप मुझे और उसे छोड़ दें, जिसे मैंने अकेला पैदा किया।
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وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًا مَّمْدُودًا١٢
Wajaʿaltu lahu malan mamdoodan
और मैंने उसे बहुत सारा धन प्रदान किया।
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وَبَنِينَ شُهُودًا١٣
Wabaneena shuhoodan
और उपस्थित रहने वाले बेटे3 दिए।
टिप्पणियाँ
[3] जो उसकी सेवा में उपस्थित रहते हैं। कहा गया है कि इससे अभिप्राय वलीद बिन मुग़ीरह है, जिसके दस पुत्र थे। -
وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًا١٤
Wamahhadtu lahu tamheedan
और मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन दिया।
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ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ١٥
Thumma yatmaʿu an azeeda
फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसे और अधिक दूँ।
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كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِـَٔايَـٰتِنَا عَنِيدًا١٦
Kalla innahu kana liayatina ʿaneedan
कदापि नहीं! निश्चय वह हमारी आयतों का सख़्त विरोधी है।
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سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا١٧
Saorhiquhu saʿoodan
शीघ्र ही मैं उसे एक कठोर चढ़ाई4 चढ़ाऊँगा।
टिप्पणियाँ
[4] अर्थात कड़ी यातना दूँगा। (इब्ने कसीर) -
إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ١٨
Innahu fakkara waqaddara
निःसंदेह उसने सोच-विचार किया और बात बनाई।5
टिप्पणियाँ
[5] क़ुरआन के संबंध में प्रश्न किया गया तो वह सोचने लगा कि कौन सी बात बनाए और उसके बारे में क्या कहे? (इब्ने कसीर) -
فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ١٩
Faqutila kayfa qaddara
तो वह मारा जाए! उसने कैसी कैसी बात बनाई?
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ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ٢٠
Thumma qutila kayfa qaddara
फिर मारा जाए! उसने कैसी बात बनाई?
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ثُمَّ نَظَرَ٢١
Thumma nathara
फिर उसने देखा।
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ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ٢٢
Thumma ʿabasa wabasara
फिर उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया।
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ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَ٢٣
Thumma adbara waistakbara
फिर उसने पीठ फेरी और घमंड किया।
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فَقَالَ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ٢٤
Faqala in hatha illa sihrun yutharu
फिर उसने कहा : यह तो मात्र एक जादू है, जो (पहलों से) नक़ल (उद्धृत) किया जाता है।6
टिप्पणियाँ
[6] अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यह किसी से सीख लिया है। कहा जाता है कि वलीद बिन मुग़ीरह ने अबू जह्ल से कहा था कि लोगों में क़ुरआन के जादू होने का प्रचार किया जाए। -
إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِ٢٥
In hatha illa qawlu albashari
यह तो मात्र मनुष्य7 की वाणी है।
टिप्पणियाँ
[7] अर्थात अल्लाह की वाणी नहीं है। -
سَأُصْلِيهِ سَقَرَ٢٦
Saosleehi saqara
मैं उसे शीघ्र ही 'सक़र' (जहन्नम) में झोंक दूँगा।
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وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُ٢٧
Wama adraka ma saqaru
और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि 'सक़र' (जहन्नम) क्या है?
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لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُ٢٨
La tubqee wala tatharu
वह न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।
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لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِ٢٩
Lawwahatun lilbashari
वह खाल को झुलस देने वाली है।
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عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ٣٠
ʿAlayha tisʿata ʿashara
उसपर उन्नीस (फ़रिश्ते) नियुक्त हैं।
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وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَـٰٓئِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِيمَـٰنًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَٱلْكَـٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَـٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ٣١
Wama jaʿalna ashaba alnnari illa malaikatan wama jaʿalna ʿiddatahum illa fitnatan lillatheena kafaroo liyastayqina allatheena ootoo alkitaba wayazdada allatheena amanoo eemanan wala yartaba allatheena ootoo alkitaba waalmuminoona waliyaqoola allatheena fee quloobihim maradun waalkafiroona matha arada Allahu bihatha mathalan kathalika yudillu Allahu man yashao wayahdee man yashao wama yaʿlamu junooda rabbika illa huwa wama hiya illa thikra lilbashari
और हमने जहन्नम के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाए हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षण बनाया है। ताकि अह्ले किताब8 विश्वास कर लें और ईमान वाले ईमान में आगे बढ़ जाएँ। और किताब वाले एवं ईमान वाले किसी संदेह में न पड़ें। और ताकि वे लोग जिनके दिलों में रोग है और वे लोग जो काफ़िर9 हैं, यह कहें कि इस उदाहरण से अल्लाह का क्या तात्पर्य है? ऐसे ही, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। और आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह तो केवल मनुष्य के लिए उपदेश है।
टिप्पणियाँ
[8] क्योंकि यहूदियों तथा ईसाइयों की पुस्तकों में भी नरक के अधिकारियों की यही संख्या बताई गई है। [9] जब क़ुरैश ने नरक के अधिकारियों की चर्चा सुनी, तो अबू जह्ल ने कहा : ऐ क़ुरैश के समूह! क्या तुम में से दस-दस लोग, एक-एक फ़रिश्ते के लिए काफ़ी नहीं हैं? और एक व्यक्ति ने जिसे अपने बल पर बड़ा गर्व था कहा कि 17 को मैं अकेला देख लूँगा। और तुम सब मिलकर दो को देख लेना। (इब्ने कसीर) -
كَلَّا وَٱلْقَمَرِ٣٢
Kalla waalqamari
कदापि नहीं, क़सम है चाँद की!
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وَٱلَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ٣٣
Waallayli ith adbara
तथा रात की, जब वह जाने लगे!
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وَٱلصُّبْحِ إِذَآ أَسْفَرَ٣٤
Waalssubhi itha asfara
और सुबह की, जब वह प्रकाशित हो जाए!
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إِنَّهَا لَإِحْدَى ٱلْكُبَرِ٣٥
Innaha laihda alkubari
निःसंदेह वह (जहन्नम) निश्चय बहुत बड़ी चीज़ों10 में से एक है।
टिप्पणियाँ
[10] अर्थात जैसे रात्रि के पश्चात दिन होता है, उसी प्रकार कर्मों का भी परिणाम सामने आना है। और दुष्कर्मों का परिणाम नरक है। -
نَذِيرًا لِّلْبَشَرِ٣٦
Natheeran lilbashari
मनुष्य के लिए डराने वाली है।
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لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ٣٧
Liman shaa minkum an yataqaddama aw yataakhkhara
तुम में से उसके लिए, जो आगे बढ़ना चाहे अथवा पीछे हटना चाहे।11
टिप्पणियाँ
[11] अर्थात आज्ञापालन द्वारा अग्रसर हो जाए, अथवा अवज्ञा करके पीछे रह जाए। -
كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ٣٨
Kullu nafsin bima kasabat raheenatun
प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले जो उसने कमाया, गिरवी12 रखा हुआ है।
टिप्पणियाँ
[12] यदि सत्कर्म किया, तो मुक्त हो जाएगा। -
إِلَّآ أَصْحَـٰبَ ٱلْيَمِينِ٣٩
Illa ashaba alyameeni
सिवाय दाहिने वालों के।
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فِى جَنَّـٰتٍ يَتَسَآءَلُونَ٤٠
Fee jannatin yatasaaloona
वे जन्नतों में एक-दूसरे से पूछेंगे।
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عَنِ ٱلْمُجْرِمِينَ٤١
ʿAni almujrimeena
अपराधियों के बारे में।
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مَا سَلَكَكُمْ فِى سَقَرَ٤٢
Ma salakakum fee saqara
तुम्हें किस चीज़ ने जहन्नम में डाला?
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قَالُوا۟ لَمْ نَكُ مِنَ ٱلْمُصَلِّينَ٤٣
Qaloo lam naku mina almusalleena
वे कहेंगे : हम नमाज़ पढ़ने वालों में से न थे।
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وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ ٱلْمِسْكِينَ٤٤
Walam naku nutʿimu almiskeena
और न हम निर्धन को खाना खिलाते थे।
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وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلْخَآئِضِينَ٤٥
Wakunna nakhoodu maʿa alkhaideena
और हम बेहूदा बहस करने वालों के साथ मिलकर व्यर्थ बहस किया करते थे।
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وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ٤٦
Wakunna nukaththibu biyawmi alddeeni
और हम बदले के दिन को झुठलाया करते थे।
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حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلْيَقِينُ٤٧
Hatta atana alyaqeenu
यहाँ तक कि मौत हमारे पास आ गई।
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فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَـٰعَةُ ٱلشَّـٰفِعِينَ٤٨
Fama tanfaʿuhum shafaʿatu alshshafiʿeena
तो उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी।13
टिप्पणियाँ
[13] अर्थात नबियों और फ़रिश्तों इत्यादि की। किंतु जिससे अल्लाह प्रसन्न हो और उसके लिए सिफ़ारिश की अनुमति दे। -
فَمَا لَهُمْ عَنِ ٱلتَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ٤٩
Fama lahum ʿani alttathkirati muʿrideena
तो उन्हें क्या हो गया है कि उपदेश से मुँह फेर रहे हैं?
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كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌ٥٠
Kaannahum humurun mustanfiratun
जैसे वे सख़्त बिदकने वाले गधे हैं।
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فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍۭ٥١
Farrat min qaswaratin
जो शेर से भागे हैं।
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بَلْ يُرِيدُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً٥٢
Bal yureedu kullu imriin minhum an yuta suhufan munashsharatan
बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली पुस्तकें14 दी जाएँ।
टिप्पणियाँ
[14] अर्थात वे चाहते हैं कि प्रत्येक के ऊपर वैसे ही पुस्तक उतारी जाए, जैसे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारी गई है। तब वे ईमान लाएँगे। (इब्ने कसीर) -
كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ٥٣
Kalla bal la yakhafoona alakhirata
ऐसा कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वे आख़िरत से नहीं डरते।
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كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذْكِرَةٌ٥٤
Kalla innahu tathkiratun
हरगिज़ नहीं, निश्चय यह (क़ुरआन) एक उपदेश (याददेहानी) है।
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فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ٥٥
Faman shaa thakarahu
अतः जो चाहे, उससे नसीहत प्राप्त करे।
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وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ٥٦
Wama yathkuroona illa an yashaa Allahu huwa ahlu alttaqwa waahlu almaghfirati
और वे नसीहत प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही इस योग्य है कि क्षमा करे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह मुद्दस्सिर के नाम का मतलब क्या है?
मुद्दस्सिर का मतलब "चादर ओढ़ने वाले" है।
सूरह मुद्दस्सिर किस पारे में है?
सूरह मुद्दस्सिर पारा 29 में है।
सूरह मुद्दस्सिर में कितनी आयतें हैं?
सूरह मुद्दस्सिर में 56 आयतें हैं।
सूरह मुद्दस्सिर मक्की है या मदनी?
सूरह मुद्दस्सिर मक्की सूरह है।
सूरह मुद्दस्सिर क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 74वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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