سورة المدثر

सूरह मुद्दस्सिर हिंदी में

चादर ओढ़ने वाले

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह मुद्दस्सिर (المدثر) क़ुरआन की 74वीं सूरह है और इसमें 56 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "चादर ओढ़ने वाले" है। यह मक्की सूरह है और पारा 29 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह मुद्दस्सिर का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह मुद्दस्सिर: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ۝١

    Ya ayyuha almuddaththiru

    ऐ कपड़े में लिपटने वाले!1

    टिप्पणियाँ
    [1] नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर प्रथम वह़्य के पश्चात् कुछ दिनों तक वह़्य नहीं आई। फिर एक बार आप जा रहे थे कि आकाश से एक आवाज़ सुनी। ऊपर देखा, तो वही फ़रिश्ता जो आपके पास 'ह़िरा' नामी गुफ़ा में आया था आकाश तथा धरती के बीच एक कुर्सी पर विराजमान था। जिससे आप डर गए और धरती पर गिर गए। फिर घर आए और अपनी पत्नी से कहा : मुझे चादर ओढ़ा दो, मुझे चादर ओढ़ा दो। उन्होंने चादर ओढ़ा दी। और अल्लाह ने यह सूरत उतारी। फिर निरंतर वह़्य आने लगी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4925, 4926, सह़ीह़ मुस्लिम : 161) प्रथम वह़्य से आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को नबी बनाया गया। और अब आपपर धर्म के प्रचार का भार रख दिया गया। इन आयतों में आपके माध्यम से मुसलमानों को पवित्र रहने के निर्देश दिए गए हैं।
  2. قُمْ فَأَنذِرْ۝٢

    Qum faanthir

    खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।

  3. وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ۝٣

    Warabbaka fakabbir

    तथा अपने पालनहार ही की महिमा का वर्णन करो।

  4. وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ۝٤

    Wathiyabaka fatahhir

    तथा अपने कपड़े को पवित्र रखो।

  5. وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ۝٥

    Waalrrujza faohjur

    और गंदगी (बुतों) से दूर रहो।

  6. وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ۝٦

    Wala tamnun tastakthiru

    तथा उपकार न जताओ (अपनी नेकियों को) अधिक समझ कर।

  7. وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ۝٧

    Walirabbika faisbir

    और अपने पालनहार ही के लिए धैर्य से काम लो।

  8. فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ۝٨

    Faitha nuqira fee alnnaqoori

    फिर जब सूर में फूँक2 मारी जाएगी।

    टिप्पणियाँ
    [2] अर्थात प्रलय के दिन।
  9. فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍ يَوْمٌ عَسِيرٌ۝٩

    Fathalika yawmaithin yawmun ʿaseerun

    तो वह दिन अति भीषण दिन होगा।

  10. عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍ۝١٠

    ʿAla alkafireena ghayru yaseerin

    काफ़िरों पर आसान न होगा।

  11. ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا۝١١

    Tharnee waman khalaqtu waheedan

    आप मुझे और उसे छोड़ दें, जिसे मैंने अकेला पैदा किया।

  12. وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًا مَّمْدُودًا۝١٢

    Wajaʿaltu lahu malan mamdoodan

    और मैंने उसे बहुत सारा धन प्रदान किया।

  13. وَبَنِينَ شُهُودًا۝١٣

    Wabaneena shuhoodan

    और उपस्थित रहने वाले बेटे3 दिए।

    टिप्पणियाँ
    [3] जो उसकी सेवा में उपस्थित रहते हैं। कहा गया है कि इससे अभिप्राय वलीद बिन मुग़ीरह है, जिसके दस पुत्र थे।
  14. وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًا۝١٤

    Wamahhadtu lahu tamheedan

    और मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन दिया।

  15. ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ۝١٥

    Thumma yatmaʿu an azeeda

    फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसे और अधिक दूँ।

  16. كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِـَٔايَـٰتِنَا عَنِيدًا۝١٦

    Kalla innahu kana liayatina ʿaneedan

    कदापि नहीं! निश्चय वह हमारी आयतों का सख़्त विरोधी है।

  17. سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا۝١٧

    Saorhiquhu saʿoodan

    शीघ्र ही मैं उसे एक कठोर चढ़ाई4 चढ़ाऊँगा।

    टिप्पणियाँ
    [4] अर्थात कड़ी यातना दूँगा। (इब्ने कसीर)
  18. إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ۝١٨

    Innahu fakkara waqaddara

    निःसंदेह उसने सोच-विचार किया और बात बनाई।5

    टिप्पणियाँ
    [5] क़ुरआन के संबंध में प्रश्न किया गया तो वह सोचने लगा कि कौन सी बात बनाए और उसके बारे में क्या कहे? (इब्ने कसीर)
  19. فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ۝١٩

    Faqutila kayfa qaddara

    तो वह मारा जाए! उसने कैसी कैसी बात बनाई?

  20. ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ۝٢٠

    Thumma qutila kayfa qaddara

    फिर मारा जाए! उसने कैसी बात बनाई?

  21. ثُمَّ نَظَرَ۝٢١

    Thumma nathara

    फिर उसने देखा।

  22. ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ۝٢٢

    Thumma ʿabasa wabasara

    फिर उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया।

  23. ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَ۝٢٣

    Thumma adbara waistakbara

    फिर उसने पीठ फेरी और घमंड किया।

  24. فَقَالَ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ يُؤْثَرُ۝٢٤

    Faqala in hatha illa sihrun yutharu

    फिर उसने कहा : यह तो मात्र एक जादू है, जो (पहलों से) नक़ल (उद्धृत) किया जाता है।6

    टिप्पणियाँ
    [6] अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने यह किसी से सीख लिया है। कहा जाता है कि वलीद बिन मुग़ीरह ने अबू जह्ल से कहा था कि लोगों में क़ुरआन के जादू होने का प्रचार किया जाए।
  25. إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِ۝٢٥

    In hatha illa qawlu albashari

    यह तो मात्र मनुष्य7 की वाणी है।

    टिप्पणियाँ
    [7] अर्थात अल्लाह की वाणी नहीं है।
  26. سَأُصْلِيهِ سَقَرَ۝٢٦

    Saosleehi saqara

    मैं उसे शीघ्र ही 'सक़र' (जहन्नम) में झोंक दूँगा।

  27. وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُ۝٢٧

    Wama adraka ma saqaru

    और आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि 'सक़र' (जहन्नम) क्या है?

  28. لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُ۝٢٨

    La tubqee wala tatharu

    वह न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।

  29. لَوَّاحَةٌ لِّلْبَشَرِ۝٢٩

    Lawwahatun lilbashari

    वह खाल को झुलस देने वाली है।

  30. عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ۝٣٠

    ʿAlayha tisʿata ʿashara

    उसपर उन्नीस (फ़रिश्ते) नियुक्त हैं।

  31. وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَـٰٓئِكَةً ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِيمَـٰنًا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَـٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ وَٱلْكَـٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَـٰذَا مَثَلًا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ۝٣١

    Wama jaʿalna ashaba alnnari illa malaikatan wama jaʿalna ʿiddatahum illa fitnatan lillatheena kafaroo liyastayqina allatheena ootoo alkitaba wayazdada allatheena amanoo eemanan wala yartaba allatheena ootoo alkitaba waalmuminoona waliyaqoola allatheena fee quloobihim maradun waalkafiroona matha arada Allahu bihatha mathalan kathalika yudillu Allahu man yashao wayahdee man yashao wama yaʿlamu junooda rabbika illa huwa wama hiya illa thikra lilbashari

    और हमने जहन्नम के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाए हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षण बनाया है। ताकि अह्ले किताब8 विश्वास कर लें और ईमान वाले ईमान में आगे बढ़ जाएँ। और किताब वाले एवं ईमान वाले किसी संदेह में न पड़ें। और ताकि वे लोग जिनके दिलों में रोग है और वे लोग जो काफ़िर9 हैं, यह कहें कि इस उदाहरण से अल्लाह का क्या तात्पर्य है? ऐसे ही, अल्लाह जिसे चाहता है गुमराह करता है और जिसे चाहता है सीधा मार्ग दिखाता है। और आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई नहीं जानता। और यह तो केवल मनुष्य के लिए उपदेश है।

    टिप्पणियाँ
    [8] क्योंकि यहूदियों तथा ईसाइयों की पुस्तकों में भी नरक के अधिकारियों की यही संख्या बताई गई है। [9] जब क़ुरैश ने नरक के अधिकारियों की चर्चा सुनी, तो अबू जह्ल ने कहा : ऐ क़ुरैश के समूह! क्या तुम में से दस-दस लोग, एक-एक फ़रिश्ते के लिए काफ़ी नहीं हैं? और एक व्यक्ति ने जिसे अपने बल पर बड़ा गर्व था कहा कि 17 को मैं अकेला देख लूँगा। और तुम सब मिलकर दो को देख लेना। (इब्ने कसीर)
  32. كَلَّا وَٱلْقَمَرِ۝٣٢

    Kalla waalqamari

    कदापि नहीं, क़सम है चाँद की!

  33. وَٱلَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ۝٣٣

    Waallayli ith adbara

    तथा रात की, जब वह जाने लगे!

  34. وَٱلصُّبْحِ إِذَآ أَسْفَرَ۝٣٤

    Waalssubhi itha asfara

    और सुबह की, जब वह प्रकाशित हो जाए!

  35. إِنَّهَا لَإِحْدَى ٱلْكُبَرِ۝٣٥

    Innaha laihda alkubari

    निःसंदेह वह (जहन्नम) निश्चय बहुत बड़ी चीज़ों10 में से एक है।

    टिप्पणियाँ
    [10] अर्थात जैसे रात्रि के पश्चात दिन होता है, उसी प्रकार कर्मों का भी परिणाम सामने आना है। और दुष्कर्मों का परिणाम नरक है।
  36. نَذِيرًا لِّلْبَشَرِ۝٣٦

    Natheeran lilbashari

    मनुष्य के लिए डराने वाली है।

  37. لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ۝٣٧

    Liman shaa minkum an yataqaddama aw yataakhkhara

    तुम में से उसके लिए, जो आगे बढ़ना चाहे अथवा पीछे हटना चाहे।11

    टिप्पणियाँ
    [11] अर्थात आज्ञापालन द्वारा अग्रसर हो जाए, अथवा अवज्ञा करके पीछे रह जाए।
  38. كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ۝٣٨

    Kullu nafsin bima kasabat raheenatun

    प्रत्येक व्यक्ति उसके बदले जो उसने कमाया, गिरवी12 रखा हुआ है।

    टिप्पणियाँ
    [12] यदि सत्कर्म किया, तो मुक्त हो जाएगा।
  39. إِلَّآ أَصْحَـٰبَ ٱلْيَمِينِ۝٣٩

    Illa ashaba alyameeni

    सिवाय दाहिने वालों के।

  40. فِى جَنَّـٰتٍ يَتَسَآءَلُونَ۝٤٠

    Fee jannatin yatasaaloona

    वे जन्नतों में एक-दूसरे से पूछेंगे।

  41. عَنِ ٱلْمُجْرِمِينَ۝٤١

    ʿAni almujrimeena

    अपराधियों के बारे में।

  42. مَا سَلَكَكُمْ فِى سَقَرَ۝٤٢

    Ma salakakum fee saqara

    तुम्हें किस चीज़ ने जहन्नम में डाला?

  43. قَالُوا۟ لَمْ نَكُ مِنَ ٱلْمُصَلِّينَ۝٤٣

    Qaloo lam naku mina almusalleena

    वे कहेंगे : हम नमाज़ पढ़ने वालों में से न थे।

  44. وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ ٱلْمِسْكِينَ۝٤٤

    Walam naku nutʿimu almiskeena

    और न हम निर्धन को खाना खिलाते थे।

  45. وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلْخَآئِضِينَ۝٤٥

    Wakunna nakhoodu maʿa alkhaideena

    और हम बेहूदा बहस करने वालों के साथ मिलकर व्यर्थ बहस किया करते थे।

  46. وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ۝٤٦

    Wakunna nukaththibu biyawmi alddeeni

    और हम बदले के दिन को झुठलाया करते थे।

  47. حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلْيَقِينُ۝٤٧

    Hatta atana alyaqeenu

    यहाँ तक कि मौत हमारे पास आ गई।

  48. فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَـٰعَةُ ٱلشَّـٰفِعِينَ۝٤٨

    Fama tanfaʿuhum shafaʿatu alshshafiʿeena

    तो उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी।13

    टिप्पणियाँ
    [13] अर्थात नबियों और फ़रिश्तों इत्यादि की। किंतु जिससे अल्लाह प्रसन्न हो और उसके लिए सिफ़ारिश की अनुमति दे।
  49. فَمَا لَهُمْ عَنِ ٱلتَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ۝٤٩

    Fama lahum ʿani alttathkirati muʿrideena

    तो उन्हें क्या हो गया है कि उपदेश से मुँह फेर रहे हैं?

  50. كَأَنَّهُمْ حُمُرٌ مُّسْتَنفِرَةٌ۝٥٠

    Kaannahum humurun mustanfiratun

    जैसे वे सख़्त बिदकने वाले गधे हैं।

  51. فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍۭ۝٥١

    Farrat min qaswaratin

    जो शेर से भागे हैं।

  52. بَلْ يُرِيدُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًا مُّنَشَّرَةً۝٥٢

    Bal yureedu kullu imriin minhum an yuta suhufan munashsharatan

    बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली पुस्तकें14 दी जाएँ।

    टिप्पणियाँ
    [14] अर्थात वे चाहते हैं कि प्रत्येक के ऊपर वैसे ही पुस्तक उतारी जाए, जैसे मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारी गई है। तब वे ईमान लाएँगे। (इब्ने कसीर)
  53. كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلْـَٔاخِرَةَ۝٥٣

    Kalla bal la yakhafoona alakhirata

    ऐसा कदापि नहीं हो सकता, बल्कि वे आख़िरत से नहीं डरते।

  54. كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذْكِرَةٌ۝٥٤

    Kalla innahu tathkiratun

    हरगिज़ नहीं, निश्चय यह (क़ुरआन) एक उपदेश (याददेहानी) है।

  55. فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ۝٥٥

    Faman shaa thakarahu

    अतः जो चाहे, उससे नसीहत प्राप्त करे।

  56. وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ۝٥٦

    Wama yathkuroona illa an yashaa Allahu huwa ahlu alttaqwa waahlu almaghfirati

    और वे नसीहत प्राप्त नहीं कर सकते, परंतु यह कि अल्लाह चाहे। वही इस योग्य है कि उससे डरा जाए और वही इस योग्य है कि क्षमा करे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह मुद्दस्सिर के नाम का मतलब क्या है?

मुद्दस्सिर का मतलब "चादर ओढ़ने वाले" है।

सूरह मुद्दस्सिर किस पारे में है?

सूरह मुद्दस्सिर पारा 29 में है।

सूरह मुद्दस्सिर में कितनी आयतें हैं?

सूरह मुद्दस्सिर में 56 आयतें हैं।

सूरह मुद्दस्सिर मक्की है या मदनी?

सूरह मुद्दस्सिर मक्की सूरह है।

सूरह मुद्दस्सिर क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 74वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

Found a mistake? Report a mistake and we will check it against the source.

पढ़ने की सेटिंग्स

क़ुरआन का फ़ॉन्ट
अरबी का साइज़
100%
तर्जुमे का साइज़
100%
थीम