سورة الغاشية

सूरह ग़ाशिया हिंदी में

छा जाने वाली

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह ग़ाशिया (الغاشية) क़ुरआन की 88वीं सूरह है और इसमें 26 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "छा जाने वाली" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह ग़ाशिया का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह ग़ाशिया: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْغَـٰشِيَةِ۝١

    Hal ataka hadeethu alghashiyati

    क्या तेरे पास ढाँपने लेने वाली (क़ियामत) की ख़बर पहुँची?

  2. وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ خَـٰشِعَةٌ۝٢

    Wujoohun yawmaithin khashiʿatun

    उस दिन कई चेहरे अपमानित होंगे।

  3. عَامِلَةٌ نَّاصِبَةٌ۝٣

    ʿamilatun nasibatun

    कठिन परिश्रम करने वाले, थक जाने वाले।

  4. تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةً۝٤

    Tasla naran hamiyatan

    वे गर्म धधकती आग में प्रवेश करेंगे।

  5. تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ ءَانِيَةٍ۝٥

    Tusqa min ʿaynin aniyatin

    उन्हें खौलते सोते का जल पिलाया जाएगा।

  6. لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍ۝٦

    Laysa lahum taʿamun illa min dareeʿin

    उनके लिए कांटेदार झाड़ के सिवा कोई खाना नहीं होगा।

  7. لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِى مِن جُوعٍ۝٧

    La yusminu wala yughnee min jooʿin

    जो न मोटा करेगा और न भूख मिटाएगा।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-7) इन आयतों में सबसे पहले सांसारिक स्वार्थ में मग्न इनसानों को एक प्रश्न द्वारा सावधान किया गया है कि उसे उस समय की सूचना है जब एक आपदा समस्त संसार पर छा जाएगी? फिर इसी के साथ यह विवरण भी दिया गया है कि उस समय इनसानों के दो भेद हो जाएँगे, और दोनों के प्रतिफल भी भिन्न होंगे : एक नरक में तथा दूसरा स्वर्ग में जाएगा। तीसरी आयत में "नासिबह" का शब्द आया है जिसका अर्थ है, थक कर चूर हो जाना, अर्थात काफ़िरों को क़ियामत के दिन इतनी कड़ी यातना दी जाएगी कि उनकी दशा बहुत ख़राब हो जाएगी। और वे थके-थके से दिखाई देंगे। इसका दूसरा अर्थ यह भी है कि उन्होंने संसार में बहुत-से कर्म किए होंगे, परंतु वे सत्य धर्म के अनुसार नहीं होंगे, इसलिए वे उपासना और कड़ी तपस्या करके भी नरक में जाएँगे। क्योंकि सत्य आस्था के बिना कोई कर्म मान्य नहीं होगा।
  8. وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ نَّاعِمَةٌ۝٨

    Wujoohun yawmaithin naʿimatun

    उस दिन कई चेहरे प्रफुल्लित होंगे।

  9. لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌ۝٩

    Lisaʿyiha radiyatun

    अपने प्रयास पर प्रसन्न होंगे।

  10. فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍ۝١٠

    Fee jannatin ʿaliyatin

    ऊँची जन्नत में होंगे।

  11. لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَـٰغِيَةً۝١١

    La tasmaʿu feeha laghiyatan

    उसमें कोई बेकार (अशिष्ट) बात नहीं सुनेंगे।

  12. فِيهَا عَيْنٌ جَارِيَةٌ۝١٢

    Feeha ʿaynun jariyatun

    उसमें बहने वाले स्रोत (चश्मे) हैं।

  13. فِيهَا سُرُرٌ مَّرْفُوعَةٌ۝١٣

    Feeha sururun marfooʿatun

    उसमें ऊँचे-ऊँचे तख्त हैं।

  14. وَأَكْوَابٌ مَّوْضُوعَةٌ۝١٤

    Waakwabun mawdooʿatun

    और (पीने वालों के लिए तैयार) रखे हुए प्याले हैं।

  15. وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌ۝١٥

    Wanamariqu masfoofatun

    और क्रम में लगे हुए गाव-तकिए हैं।

  16. وَزَرَابِىُّ مَبْثُوثَةٌ۝١٦

    Wazarabiyyu mabthoothatun

    और बिछाए हुए क़ालीन हैं।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (8-16) इन आयतों में जो इस संसार में सत्य आस्था के साथ क़ुरआन आदेशानुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं परलोक में उनके सदा के सुख का दृश्य दिखाया गया है।
  17. أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى ٱلْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ۝١٧

    Afala yanthuroona ila alibili kayfa khuliqat

    क्या वे ऊँटों को नहीं देखते कि वे कैसे पैदा किए गए हैं?

  18. وَإِلَى ٱلسَّمَآءِ كَيْفَ رُفِعَتْ۝١٨

    Waila alssamai kayfa rufiʿat

    और आकाश को (नहीं देखते) कि उसे कैसे ऊँचा किया गया?

  19. وَإِلَى ٱلْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ۝١٩

    Waila aljibali kayfa nusibat

    और पर्वतों को (नहीं देखते) कि कैसे गाड़े गए हैं?

  20. وَإِلَى ٱلْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ۝٢٠

    Waila alardi kayfa sutihat

    तथा धरती को (नहीं देखते) कि कैसे बिछाई गई है?3

    टिप्पणियाँ
    [3] (17-20) इन आयतों में फिर विषय बदल कर एक प्रश्न किया जा रहा है कि जो क़ुरआन की शिक्षा तथा परलोक की सूचना को नहीं मानते, अपने सामने उन चीज़ों को नहीं देखते जो रात दिन उनके सामने आती रहती हैं, ऊँटों तथा पर्वतों और आकाश एवं धरती पर विचार क्यों नहीं करते कि क्या ये सब अपने आप पैदा हो गए हैं या इनका कोई रचयिता है? यह तो असंभव है कि रचना हो और रचयिता न हो। यदि मानते हैं कि किसी शक्ति ने इनको बनाया है जिसका कोई साझी नहीं तो उसके अकेले पूज्य होने और उसके फिर से पैदा करने की शक्ति और सामर्थ्य का क्यों इनकार करते हैं? (तर्जुमानुल क़ुरआन)
  21. فَذَكِّرْ إِنَّمَآ أَنتَ مُذَكِّرٌ۝٢١

    Fathakkir innama anta muthakkirun

    अतः आप नसीहत करें, आप केवल नसीहत करने वाले हैं।

  22. لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ۝٢٢

    Lasta ʿalayhim bimusaytirin

    आप उनपर कोई दरोग़ा (नियंत्रक) नहीं हैं।

  23. إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ۝٢٣

    Illa man tawalla wakafara

    परंतु जिसने मुँह फेरा और कुफ़्र किया।

  24. فَيُعَذِّبُهُ ٱللَّهُ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَكْبَرَ۝٢٤

    Fayuʿaththibuhu Allahu alʿathaba alakbara

    तो अल्लाह उसे सबसे बड़ी यातना देगा।

  25. إِنَّ إِلَيْنَآ إِيَابَهُمْ۝٢٥

    Inna ilayna iyabahum

    निःसंदेह हमारी ही ओर उनका लौटकर आना है।

  26. ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم۝٢٦

    Thumma inna ʿalayna hisabahum

    फिर बेशक हमारे ही ज़िम्मे उनका ह़िसाब लेना है।4

    टिप्पणियाँ
    [4] (21-26) इन आयतों का भावार्थ यह है कि क़ुरआन किसी को बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं है, और न नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का यह कर्तव्य है कि किसी को बलपूर्वक मनवाएँ। आप जिससे डरा रहे हैं, ये मानें या न मानें, वह खुली बात है। फिर भी जो नहीं सुनते उनको अल्लाह ही समझेगा। ये और इस जैसी क़ुरआन की अनेक आयतें इस आरोप का खंडन करती हैं कि इस्लाम ने अपने मनवाने के लिए अस्त्र शस्त्र का प्रयोग किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह ग़ाशिया के नाम का मतलब क्या है?

ग़ाशिया का मतलब "छा जाने वाली" है।

सूरह ग़ाशिया किस पारे में है?

सूरह ग़ाशिया पारा 30 में है।

सूरह ग़ाशिया में कितनी आयतें हैं?

सूरह ग़ाशिया में 26 आयतें हैं।

सूरह ग़ाशिया मक्की है या मदनी?

सूरह ग़ाशिया मक्की सूरह है।

सूरह ग़ाशिया क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 88वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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