سورة الطارق
सूरह तारिक़ हिंदी में
रात को आने वाला
- 86
- 17 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ना 591
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सूरह तारिक़ (الطارق) क़ुरआन की 86वीं सूरह है और इसमें 17 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "रात को आने वाला" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह तारिक़ का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह तारिक़: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ١
Waalssamai waalttariqi
क़सम है आकाश की तथा रात में प्रकट होने वाले की!
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وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلطَّارِقُ٢
Wama adraka ma alttariqu
और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होने वाला क्या है?
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ٱلنَّجْمُ ٱلثَّاقِبُ٣
Alnnajmu alththaqibu
वह चमकता हुआ सितारा है।
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إِن كُلُّ نَفْسٍ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ٤
In kullu nafsin lamma ʿalayha hafithun
प्रत्येक प्राणी पर एक निरीक्षक नियुक्त है।1
टिप्पणियाँ
[1] (1-4) इनमें आकाश के तारों को इस बात की गवाही में लाया गया है कि ब्रह्मांड की कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जो एक रक्षक के बिना अपने स्थान पर स्थित रह सकती है, और वह रक्षक स्वयं अल्लाह है। -
فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ مِمَّ خُلِقَ٥
Falyanthuri alinsanu mimma khuliqa
अतः इनसान को देखना चाहिए कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है?
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خُلِقَ مِن مَّآءٍ دَافِقٍ٦
Khuliqa min main dafiqin
वह एक उछलने वाले पानी से पैदा किया गया है।
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يَخْرُجُ مِنۢ بَيْنِ ٱلصُّلْبِ وَٱلتَّرَآئِبِ٧
Yakhruju min bayni alssulbi waalttaraibi
जो पीठ और सीने की हड्डियों के बीच से निकलता है।
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إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌ٨
Innahu ʿala rajʿihi laqadirun
निःसंदेह वह उसे लौटाने में निश्चय सक्षम है।2
टिप्पणियाँ
[2] (5-8) इन आयतों में इनसान का ध्यान उसके अस्तित्व की ओर आकर्षित किया गया है कि वह विचार तो करे कि कैसे पैदा किया गया है वीर्य से? फिर उसकी निरंतर रक्षा कर रहा है। फिर वही उसे मृत्यु के पश्चात पुनः पैदा करने की शक्ति भी रखता है। -
يَوْمَ تُبْلَى ٱلسَّرَآئِرُ٩
Yawma tubla alssarairu
जिस दिन छिपी हुई बातों की जाँच-पड़ताल की जाएगी।
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فَمَا لَهُۥ مِن قُوَّةٍ وَلَا نَاصِرٍ١٠
Fama lahu min quwwatin wala nasirin
तो (उस दिन) उसके पास न कोई शक्ति होगी और न ही कोई सहायक।3
टिप्पणियाँ
[3] (9-10) इन आयतों में यह बताया गया है कि फिर से पैदाइश इसलिए होगी ताकि इनसान के सभी भेदों की जाँच की जाए, जिनपर संसार में पर्दा पड़ा रह गया था और सबका बदला न्याय के साथ दिया जाए। -
وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ١١
Waalssamai thati alrrajʿi
क़सम है बार-बार बारिश बरसाने वाले आसमान की।
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وَٱلْأَرْضِ ذَاتِ ٱلصَّدْعِ١٢
Waalardi thati alssadʿi
तथा फटने वाली धरती की।
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إِنَّهُۥ لَقَوْلٌ فَصْلٌ١٣
Innahu laqawlun faslun
निश्चय ही यह (क़ुरआन) एक निर्णायक कथन है।
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وَمَا هُوَ بِٱلْهَزْلِ١٤
Wama huwa bialhazli
और यह हँसी-मज़ाक़ नही है।4
टिप्पणियाँ
[4] (11-14) इन आयतों में बताया गया है कि आकाश से वर्षा का होना तथा धरती से पेड़ पौधों का उपजना कोई खेल नहीं, एक गंभीर कर्म है। इसी प्रकार क़ुरआन में जो तथ्य बताए गए हैं, वे भी हँसी-उपहास नहीं हैं, पक्की और अडिग बातें हैं। काफ़िर (विश्वासहीन) इस भ्रम में न रहें कि उनकी चालें इस क़ुरआन के आमंत्रण को विफल कर देंगी। अल्लाह भी एक उपाय में लगा है जिसके आगे इनकी चालें धरी रह जाएँगी। -
إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًا١٥
Innahum yakeedoona kaydan
निःसंदेह वे गुप्त उपाय करते हैं।
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وَأَكِيدُ كَيْدًا١٦
Waakeedu kaydan
और मैं भी गुप्त उपाय करता हूँ।
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فَمَهِّلِ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا١٧
Famahhili alkafireena amhilhum ruwaydan
अतः काफ़िरों को मोहलत दे दें, उन्हें थोड़ी देर के लिए छोड़ दें।5
टिप्पणियाँ
[5] (15-17) इन आयतों में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को सांत्वना तथा अधर्मियों को यह धमकी देकर बात पूरी कर दी गई है कि आप तनिक सहन करें और विश्वासहीन को मनमानी कर लेने दें, कुछ ही देर होगी कि इन्हें अपने दुष्परिणाम का ज्ञान हो जाएगा। और इक्कीस वर्ष ही बीते थे कि पूरे मक्का और अरब द्वीप में इस्लाम का ध्वज लहराने लगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह तारिक़ के नाम का मतलब क्या है?
तारिक़ का मतलब "रात को आने वाला" है।
सूरह तारिक़ किस पारे में है?
सूरह तारिक़ पारा 30 में है।
सूरह तारिक़ में कितनी आयतें हैं?
सूरह तारिक़ में 17 आयतें हैं।
सूरह तारिक़ मक्की है या मदनी?
सूरह तारिक़ मक्की सूरह है।
सूरह तारिक़ क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 86वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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