سورة الإنشقاق

सूरह इनशिक़ाक़ हिंदी में

चिर जाना

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह इनशिक़ाक़ (الإنشقاق) क़ुरआन की 84वीं सूरह है और इसमें 25 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "चिर जाना" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह इनशिक़ाक़ का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह इनशिक़ाक़: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ۝١

    Itha alssamao inshaqqat

    जब आकाश फट जाएगा।

  2. وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ۝٢

    Waathinat lirabbiha wahuqqat

    और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगा और यही उसके योग्य है।

  3. وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ۝٣

    Waitha alardu muddat

    तथा जब धरती फैला दी जाएगी।

  4. وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ۝٤

    Waalqat ma feeha watakhallat

    और जो कुछ उसके भीतर है, उसे निकाल बाहर फेंक देगी और खाली हो जाएगी।

  5. وَأَذِنَتْ لِرَبِّهَا وَحُقَّتْ۝٥

    Waathinat lirabbiha wahuqqat

    और अपने पालनहार के आदेश पर कान लगाएगी और यही उसके योग्य है।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-5) इन आयतों में प्रलय के समय आकाश एवं धरती में जो हलचल होगी उसका चित्रण करते हुए यह बताया गया है कि इस ब्रह्मांड के विधाता के आज्ञानुसार ये आकाश और धरती कार्यरत हैं और प्रलय के समय भी उसी की आज्ञा का पालन करेंगे। धरती को फैलाने का अर्थ यह है कि पर्वत आदि खंड-खंड होकर समस्त भूमि चौरस कर दी जाएगी।
  6. يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَـٰقِيهِ۝٦

    Ya ayyuha alinsanu innaka kadihun ila rabbika kadhan famulaqeehi

    ऐ इनसान! निःसंदेह तू कठिन परिश्रम करते-करते अपने पालनहार की ओर जाने वाला है, फिर तू उससे मिलने वाला है।

  7. فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ۝٧

    Faama man ootiya kitabahu biyameenihi

    फिर जिस व्यक्ति को उसका कर्मपत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया।

  8. فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًا يَسِيرًا۝٨

    Fasawfa yuhasabu hisaban yaseeran

    तो उसका आसान हिसाब लिया जाएगा।

  9. وَيَنقَلِبُ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا۝٩

    Wayanqalibu ila ahlihi masrooran

    तथा वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश लौटेगा।

  10. وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ۝١٠

    Waamma man ootiya kitabahu waraa thahrihi

    और लेकिन जिसे उसका कर्मपत्र उसकी पीठ के पीछे दिया गया।

  11. فَسَوْفَ يَدْعُوا۟ ثُبُورًا۝١١

    Fasawfa yadʿoo thubooran

    तो वह विनाश को पुकारेगा।

  12. وَيَصْلَىٰ سَعِيرًا۝١٢

    Wayasla saʿeeran

    तथा जहन्नम में प्रवेश करेगा।

  13. إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا۝١٣

    Innahu kana fee ahlihi masrooran

    निःसंदेह वह अपने घर वालों में बड़ा प्रसन्न था।

  14. إِنَّهُۥ ظَنَّ أَن لَّن يَحُورَ۝١٤

    Innahu thanna an lan yahoora

    निश्चय उसने समझा था कि वह कभी (अल्लाह की ओर) वापस नहीं लौटेगा।

  15. بَلَىٰٓ إِنَّ رَبَّهُۥ كَانَ بِهِۦ بَصِيرًا۝١٥

    Bala inna rabbahu kana bihi baseeran

    क्यों नहीं, निश्चय उसका पालनहार उसे देख रहा था।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (6-15) इन आयतों में इनसान को सावधान किया गया है कि तुझे भी अपने पालनहार से मिलना है। और धीरे-धीरे उसी की ओर जा रहा है। वहाँ अपने कर्मानुसार जिसे दाएँ हाथ में कर्म-पत्र मिलेगा, वह अपनों से प्रसन्न होकर मिलेगा। और जिसको बाएँ हाथ में कर्म-पत्र दिया जाएगा, तो वह विनाश को पुकारेगा। यह वही होगा जिसने माया मोह में क़ुरआन को नकार दिया था। और सोचा कि इस सांसारिक जीवन के पश्चात कोई जीवन नहीं आएगा।
  16. فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ۝١٦

    Fala oqsimu bialshshafaqi

    मैं क़सम खाता हूँ शफ़क़ (सूर्यास्त के बाद की लाली) की।

  17. وَٱلَّيْلِ وَمَا وَسَقَ۝١٧

    Waallayli wama wasaqa

    तथा रात की और उसकी जो कुछ वह एकत्रित करती है!

  18. وَٱلْقَمَرِ إِذَا ٱتَّسَقَ۝١٨

    Waalqamari itha ittasaqa

    तथा चाँद की, जब वह पूरा हो जाता है।

  19. لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍ۝١٩

    Latarkabunna tabaqan ʿan tabaqin

    तुम अवश्य एक अवस्था से दूसरी अवस्था में स्थानांतरित होते रहोगे।

  20. فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ۝٢٠

    Fama lahum la yuminoona

    फिर उन्हें क्या हो गया है कि वे ईमान नहीं लाते?

  21. وَإِذَا قُرِئَ عَلَيْهِمُ ٱلْقُرْءَانُ لَا يَسْجُدُونَ ۩۝٢١

    Waitha quria ʿalayhimu alquranu la yasjudoona

    और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है, तो सजदा नहीं करते।3

    टिप्पणियाँ
    [3] (16-21) इन आयतों में ब्रह्मांड के कुछ लक्षणों को साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत करके सावधान किया गया है कि जिस प्रकार यह ब्रह्मांड तीन स्थितियों से गुज़रता है, उसी प्रकार तुम्हें भी तीन स्थितियों से गुज़रना है : सांसारिक जीवन, फिर मरण, फिर परलोक का स्थायी जीवन जिसका सुख-दुख सांसारिक कर्मों के आधार पर होगा।
  22. بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ۝٢٢

    Bali allatheena kafaroo yukaththiboona

    बल्कि जिन्होंने कुफ़्र किया, वे (उसे) झुठलाते हैं।

  23. وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ۝٢٣

    WaAllahu aʿlamu bima yooʿoona

    और अल्लाह सबसे अधिक जानने वाला है जो कुछ वे अपने भीतर रखते हैं।

  24. فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ۝٢٤

    Fabashshirhum biʿathabin aleemin

    अतः उन्हें एक दर्दनाक यातना की शुभ सूचना दे दो।

  25. إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ۝٢٥

    Illa allatheena amanoo waʿamiloo alssalihati lahum ajrun ghayru mamnoonin

    परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है।4

    टिप्पणियाँ
    [4] (22-25) इन आयतों में उनके लिए चेतावनी है, जो इन स्वभाविक साक्ष्यों के होते हुए क़ुरआन को न मानने पर अड़े हुए हैं। और उनके लिए शुभ सूचना है जो इसे मानकर विश्वास (ईमान) तथा सुकर्म की राह पर अग्रसर हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह इनशिक़ाक़ के नाम का मतलब क्या है?

इनशिक़ाक़ का मतलब "चिर जाना" है।

सूरह इनशिक़ाक़ किस पारे में है?

सूरह इनशिक़ाक़ पारा 30 में है।

सूरह इनशिक़ाक़ में कितनी आयतें हैं?

सूरह इनशिक़ाक़ में 25 आयतें हैं।

सूरह इनशिक़ाक़ मक्की है या मदनी?

सूरह इनशिक़ाक़ मक्की सूरह है।

सूरह इनशिक़ाक़ क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 84वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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