سورة المطففين

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन हिंदी में

नाप-तौल में कमी करने वाले

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन (المطففين) क़ुरआन की 83वीं सूरह है और इसमें 36 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "नाप-तौल में कमी करने वाले" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. وَيْلٌ لِّلْمُطَفِّفِينَ۝١

    Waylun lilmutaffifeena

    विनाश है नाप-तौल में कमी करने वालों के लिए।

  2. ٱلَّذِينَ إِذَا ٱكْتَالُوا۟ عَلَى ٱلنَّاسِ يَسْتَوْفُونَ۝٢

    Allatheena itha iktaloo ʿala alnnasi yastawfoona

    वे लोग कि जब लोगों से नापकर लेते हैं, तो पूरा लेते हैं।

  3. وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ۝٣

    Waitha kaloohum aw wazanoohum yukhsiroona

    और जब उन्हें नापकर या तौलकर देते हैं, तो कम देते हैं।

  4. أَلَا يَظُنُّ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ۝٤

    Ala yathunnu olaika annahum mabʿoothoona

    क्या वे लोग विश्वास नहीं रखते कि वे (मरने के बाद) उठाए जाने वाले हैं?

  5. لِيَوْمٍ عَظِيمٍ۝٥

    Liyawmin ʿatheemin

    एक बहुत बड़े दिन के लिए।

  6. يَوْمَ يَقُومُ ٱلنَّاسُ لِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ۝٦

    Yawma yaqoomu alnnasu lirabbi alʿalameena

    जिस दिन लोग सर्व संसार के पालनहार के सामने खड़े होंगे।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-6) इस सूरत की प्रथम छह आयतों में इसी व्यवसायिक विश्वास घात पर पकड़ की गई है कि न्याय तो यह है कि अपने लिए अन्याय नहीं चाहते, तो दूसरों के साथ न्याय करो। और इस रोग का निवारण अल्लाह के भय तथा परलोक पर विश्वास ही से हो सकता है। क्योंकि इस स्थिति में अमानतदारी एक नीति ही नहीं, बल्कि धार्मिक कर्तव्य होगा औ इस पर स्थित रहना लाभ तथा हानि पर निर्भर नहीं रहेगा।
  7. كَلَّآ إِنَّ كِتَـٰبَ ٱلْفُجَّارِ لَفِى سِجِّينٍ۝٧

    Kalla inna kitaba alfujjari lafee sijjeenin

    हरगिज़ नहीं, निःसंदेह दुराचारियों का कर्म-पत्र "सिज्जीन" में है।

  8. وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سِجِّينٌ۝٨

    Wama adraka ma sijjeenun

    और तुम क्या जानो कि 'सिज्जीन' क्या है?

  9. كِتَـٰبٌ مَّرْقُومٌ۝٩

    Kitabun marqoomun

    वह एक लिखित पुस्तक है।

  10. وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ۝١٠

    Waylun yawmaithin lilmukaththibeena

    उस दिन झुठलाने वालों के लिए विनाश है।

  11. ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ۝١١

    Allatheena yukaththiboona biyawmi alddeeni

    जो बदले के दिन को झुठलाते हैं।

  12. وَمَا يُكَذِّبُ بِهِۦٓ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ۝١٢

    Wama yukaththibu bihi illa kullu muʿtadin atheemin

    तथा उसे केवल वही झुठलाता है, जो सीमा का उल्लंघन करने वाला, बड़ा पापी है।

  13. إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَـٰتُنَا قَالَ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ۝١٣

    Itha tutla ʿalayhi ayatuna qala asateeru alawwaleena

    जब उसके सामने हमारी आयतों को पढ़ा जाता है, तो कहता है : यह पहले लोगों की कहानियाँ हैं।

  14. كَلَّا ۖ بَلْ ۜ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ۝١٤

    Kalla bal rana ʿala quloobihim ma kanoo yaksiboona

    हरगिज़ नहीं, बल्कि जो कुछ वे कमाते थे, वह ज़ंग बनकर उनके दिलों पर छा गया है।

  15. كَلَّآ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّمَحْجُوبُونَ۝١٥

    Kalla innahum ʿan rabbihim yawmaithin lamahjooboona

    हरगिज़ नहीं, निश्चय वे उस दिन अपने पालनहार (के दर्शन) से रोक दिए जाएँगे।

  16. ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُوا۟ ٱلْجَحِيمِ۝١٦

    Thumma innahum lasaloo aljaheemi

    फिर निःसंदेह वे अवश्य जहन्नम में प्रवेश करने वाले हैं।

  17. ثُمَّ يُقَالُ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ۝١٧

    Thumma yuqalu hatha allathee kuntum bihi tukaththiboona

    फिर कहा जाएगा : यही है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (7-17) इन आयतों में कुकर्मियों के दुष्परिणाम का विवरण दिया गया है। तथा यह बताया गया है कि उनके कुकर्म पहले ही से अपराध पत्रों में अंकित किए जा रहे हैं। तथा वे परलोक में कड़ी यातना का सामना करेंगे। और नरक में झोंक दिए जाएँगे। "सिज्जीन" से अभिप्राय, एक जगह है जहाँ पर काफ़िरों, अत्याचारियों और मुश्रिकों के कुकर्म पत्र तथा प्राण एकत्र किए जाते हैं। दिलों का लोहमल, पापों की कालिमा को कहा गया है। पाप अंतरात्मा को अंधकार बना देते हैं, तो सत्य को स्वीकार करने की स्वभाविक योग्यता खो देते हैं।
  18. كَلَّآ إِنَّ كِتَـٰبَ ٱلْأَبْرَارِ لَفِى عِلِّيِّينَ۝١٨

    Kalla inna kitaba alabrari lafee ʿilliyyeena

    हरगिज़ नहीं, निःसंदेह नेक लोगों का कर्म-पत्र निश्चय "इल्लिय्यीन" में है।

  19. وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا عِلِّيُّونَ۝١٩

    Wama adraka ma ʿilliyyoona

    और तुम क्या जानो कि 'इल्लिय्यीन' क्या है?

  20. كِتَـٰبٌ مَّرْقُومٌ۝٢٠

    Kitabun marqoomun

    वह एक लिखित पुस्तक है।

  21. يَشْهَدُهُ ٱلْمُقَرَّبُونَ۝٢١

    Yashhaduhu almuqarraboona

    जिसके पास समीपवर्ती (फरिश्ते) उपस्थित रहते हैं।

  22. إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ۝٢٢

    Inna alabrara lafee naʿeemin

    निःसंदेह नेक लोग बड़ी नेमत (आनंद) में होंगे।

  23. عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ۝٢٣

    ʿAla alaraiki yanthuroona

    तख़्तों पर (बैठे) देख रहे होंगे।

  24. تَعْرِفُ فِى وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ ٱلنَّعِيمِ۝٢٤

    Taʿrifu fee wujoohihim nadrata alnnaʿeemi

    तुम उनके चेहरों पर नेमत की ताज़गी का आभास करोगे।

  25. يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍ مَّخْتُومٍ۝٢٥

    Yusqawna min raheeqin makhtoomin

    उन्हें मुहर लगी शुद्ध शराब पिलाई जाएगी।

  26. خِتَـٰمُهُۥ مِسْكٌ ۚ وَفِى ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ ٱلْمُتَنَـٰفِسُونَ۝٢٦

    Khitamuhu miskun wafee thalika falyatanafasi almutanafisoona

    उसकी मुहर कस्तूरी की होगी। अतः प्रतिस्पर्धा करने वालों को इसी (की प्राप्ति) के लिए प्रतिस्पर्धा करना चाहिए।

  27. وَمِزَاجُهُۥ مِن تَسْنِيمٍ۝٢٧

    Wamizajuhu min tasneemin

    उसमें 'तसनीम' की मिलावट होगी।

  28. عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا ٱلْمُقَرَّبُونَ۝٢٨

    ʿAynan yashrabu biha almuqarraboona

    वह एक स्रोत है, जिससे समीपवर्ती लोग पिएँगे।3

    टिप्पणियाँ
    [3] (18-28) इन आयतों में बताया गया है कि सदाचारियों के कर्म ऊँचे पत्रों में अंकित किए जा रहे हैं जो फ़रिश्तों के पास सुरक्षित हैं। और वे स्वर्ग में सुख के साथ रहेंगे। "इल्लिय्यीन" से अभिप्राय, जन्नत में एक जगह है। जहाँ पर नेक लोगों के कर्म पत्र तथा प्राण एकत्र किए जाते हैं। वहाँ पर समीपवर्ती फ़रिश्ते उपस्थित रहते हैं।
  29. إِنَّ ٱلَّذِينَ أَجْرَمُوا۟ كَانُوا۟ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَضْحَكُونَ۝٢٩

    Inna allatheena ajramoo kanoo mina allatheena amanoo yadhakoona

    निःसंदेह जो लोग अपराधी हैं, वे (दुनिया में) ईमान लाने वालों पर हँसा करते थे।

  30. وَإِذَا مَرُّوا۟ بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ۝٣٠

    Waitha marroo bihim yataghamazoona

    और जब वे उनके पास से गुज़रते, तो आपस में आँखों से इशारे किया करते थे।

  31. وَإِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمُ ٱنقَلَبُوا۟ فَكِهِينَ۝٣١

    Waitha inqalaboo ila ahlihimu inqalaboo fakiheena

    और जब अपने घर वालों की ओर लौटते, तो (मोमिनों के परिहास का) आनंद लेते हुए लौटते थे।

  32. وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوٓا۟ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ۝٣٢

    Waitha raawhum qaloo inna haolai ladalloona

    और जब वे उन (मोमिनों) को देखते, तो कहते थे : निःसंदेह ये लोग निश्चय भटके हुए हैं।

  33. وَمَآ أُرْسِلُوا۟ عَلَيْهِمْ حَـٰفِظِينَ۝٣٣

    Wama orsiloo ʿalayhim hafitheena

    हालाँकि वे उनपर निरीक्षक बनाकर नहीं भेजे गए थे।

  34. فَٱلْيَوْمَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنَ ٱلْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ۝٣٤

    Faalyawma allatheena amanoo mina alkuffari yadhakoona

    तो आज वे लोग जो ईमान लाए, काफ़िरों पर हँस रहे हैं।

  35. عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ۝٣٥

    ʿAla alaraiki yanthuroona

    तख़्तों पर बैठे देख रहे हैं।

  36. هَلْ ثُوِّبَ ٱلْكُفَّارُ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ۝٣٦

    Hal thuwwiba alkuffaru ma kanoo yafʿaloona

    क्या काफ़िरों को उसका बदला मिल गया, जो वे किया करते थे?4

    टिप्पणियाँ
    [4] (29-36) इन आयतों में बताया गया है कि परलोक में कर्मों का फल दिया जाएगा, तो सांसारिक परिस्थितियाँ बदल जाएँगी। संसार में तो सब के लिए अल्लाह की दया है, परंतु न्याय के दिन जो अपने सुख सुविधा पर गर्व करते थे और जिन निर्धन मुसलमानों को देखकर आँखें मारते थे, वहाँ पर वही उनके दुष्परिणाम को देख कर प्रसन्न होंगे। अंतिम आयत में विश्वासहीनों के दुष्परिणाम को उनका कर्म कहा गया है। जिसमें यह संकेत है कि अच्छा फल और कुफल स्वयं इमसान के अपने कर्मों का स्वभाविक प्रभाव होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन के नाम का मतलब क्या है?

मुतफ़्फ़िफ़ीन का मतलब "नाप-तौल में कमी करने वाले" है।

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन किस पारे में है?

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन पारा 30 में है।

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन में कितनी आयतें हैं?

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन में 36 आयतें हैं।

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन मक्की है या मदनी?

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन मक्की सूरह है।

सूरह मुतफ़्फ़िफ़ीन क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 83वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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