سورة الإنفطار

सूरह इनफ़ितार हिंदी में

फट पड़ना

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह इनफ़ितार (الإنفطار) क़ुरआन की 82वीं सूरह है और इसमें 19 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "फट पड़ना" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह इनफ़ितार का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह इनफ़ितार: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ۝١

    Itha alssamao infatarat

    जब आकाश फट जाएगा।

  2. وَإِذَا ٱلْكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتْ۝٢

    Waitha alkawakibu intatharat

    तथा जब तारे झड़ जाएँगे।

  3. وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ۝٣

    Waitha albiharu fujjirat

    और जब समुद्र बह निकलेंगे।

  4. وَإِذَا ٱلْقُبُورُ بُعْثِرَتْ۝٤

    Waitha alqubooru buʿthirat

    और जब क़बरें उलट दी जाएँगी।

  5. عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ۝٥

    ʿAlimat nafsun ma qaddamat waakhkharat

    तब प्रत्येक प्राणी जान लेगा, जो उसने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-5) इनमें प्रलय के दिन आकाश ग्रहों तथा धरती और समाधियों पर जो दशा गुज़रेगी, उसका चित्रण किया गया है। तथा चेतावनी दी गई है कि हर एक की करतूत उसके सामने आ जाएगी।
  6. يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ۝٦

    Ya ayyuha alinsanu ma gharraka birabbika alkareemi

    ऐ इनसान! तुझे किस चीज़ ने तेरे उदार पालनहार से बहका दिया?

  7. ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ۝٧

    Allathee khalaqaka fasawwaka faʿadalaka

    जिसने तेरी रचना की, फिर तुझे ठीक ठाक किया, फिर तुझे संतुलित बनाया।

  8. فِىٓ أَىِّ صُورَةٍ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ۝٨

    Fee ayyi sooratin ma shaa rakkabaka

    जिस रूप में भी उसने चाहा, तुझे बना दिया।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (6-8) भावार्थ यह है कि इनसान की पैदाइश में अल्लाह की शक्ति, दक्षता तथा दया के जो लक्षण हैं, उनके दर्पण में यह बताया गया है कि प्रलय को असंभव न समझो। यह सब व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि तुम्हारा अस्तित्व व्यर्थ नहीं है कि मनमानी करो। (देखिए : तर्जुमानुल क़ुरआन, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद) इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि जब तुम्हारा अस्तित्व और रूप-रेखा कुछ भी तुम्हारे बस में नहीं, तो फिर जिस शक्ति ने सब किया उसी की शक्ति में प्रलय तथा प्रतिकार के होने को क्यों नहीं मानते?
  9. كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ۝٩

    Kalla bal tukaththiboona bialddeeni

    हरगिज़ नहीं, बल्कि तुम बदले (के दिन) को झुठलाते हो।

  10. وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَـٰفِظِينَ۝١٠

    Wainna ʿalaykum lahafitheena

    हालाँकि निःसंदेह तुमपर निगेहबान नियुक्त हैं।

  11. كِرَامًا كَـٰتِبِينَ۝١١

    Kiraman katibeena

    जो सम्माननीय लिखने वाले हैं।

  12. يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ۝١٢

    Yaʿlamoona ma tafʿaloona

    वे जानते हैं, जो तुम करते हो।3

    टिप्पणियाँ
    [3] (9-12) इन आयतों में इस भ्रम का खंडन किया गया है कि सभी कर्मों और कथनों का ज्ञान कैसे हो सकता है।
  13. إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ۝١٣

    Inna alabrara lafee naʿeemin

    निःसंदेह नेक लोग बड़ी नेमत (आनंद) में होंगे।

  14. وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍ۝١٤

    Wainna alfujjara lafee jaheemin

    और निःसंदेह दुराचारी लोग जहन्नम में होंगे।

  15. يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ۝١٥

    Yaslawnaha yawma alddeeni

    वे उसमें बदले के दिन प्रवेश करेंगे।

  16. وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ۝١٦

    Wama hum ʿanha bighaibeena

    और वे उससे कभी ग़ायब होने वाले नहीं हैं।4

    टिप्पणियाँ
    [4] (13-16) इन आयतों में सदाचारियों तथा दुराचारियों का परिणाम बताया गया है कि एक स्वर्ग के सुखों में रहेगा और दूसरा नरक के दंड का भागी बनेगा।
  17. وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ۝١٧

    Wama adraka ma yawmu alddeeni

    और आप क्या जानें कि बदले का दिन क्या है?

  18. ثُمَّ مَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ۝١٨

    Thumma ma adraka ma yawmu alddeeni

    फिर आप क्या जानें कि बदले का दिन क्या है?

  19. يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِّنَفْسٍ شَيْـًٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ۝١٩

    Yawma la tamliku nafsun linafsin shayan waalamru yawmaithin lillahi

    जिस दिन कोई प्राणी किसी प्राणी के लिए किसी चीज़ का अधिकार न रखेगा और उस दिन आदेश केवल अल्लाह का होगा।5

    टिप्पणियाँ
    [5] (17-19) इन आयतों में दो वाक्यों में प्रलय की चर्चा दोहराकर उसकी भयानकता को दर्शाते हुए बताया गया है कि निर्णय बे लाग होगा। कोई किसी की सहायता नहीं कर सकेगा। सत्य आस्था और सत्कर्म ही सहायक होंगे जिसका मार्ग क़ुरआन दिखा रहा है। क़ुरआन की सभी आयतों में प्रतिकार का दिन प्रलय के दिन को ही बताया गया है जिस दिन प्रत्येक मनुष्य को अपने कर्मानुसार प्रतिकार मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह इनफ़ितार के नाम का मतलब क्या है?

इनफ़ितार का मतलब "फट पड़ना" है।

सूरह इनफ़ितार किस पारे में है?

सूरह इनफ़ितार पारा 30 में है।

सूरह इनफ़ितार में कितनी आयतें हैं?

सूरह इनफ़ितार में 19 आयतें हैं।

सूरह इनफ़ितार मक्की है या मदनी?

सूरह इनफ़ितार मक्की सूरह है।

सूरह इनफ़ितार क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 82वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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