سورة عبس

सूरह अबस हिंदी में

त्योरी चढ़ाई

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह अबस (عبس) क़ुरआन की 80वीं सूरह है और इसमें 42 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "त्योरी चढ़ाई" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह अबस का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह अबस: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. عَبَسَ وَتَوَلَّىٰٓ۝١

    ʿAbasa watawalla

    उस (नबी) ने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया।

  2. أَن جَآءَهُ ٱلْأَعْمَىٰ۝٢

    An jaahu alaʿma

    इस कारण कि उनके पास अंधा आया।

  3. وَمَا يُدْرِيكَ لَعَلَّهُۥ يَزَّكَّىٰٓ۝٣

    Wama yudreeka laʿallahu yazzakka

    और आपको क्या मालूम शायद वह पवित्रता प्राप्त कर ले।

  4. أَوْ يَذَّكَّرُ فَتَنفَعَهُ ٱلذِّكْرَىٰٓ۝٤

    Aw yaththakkaru fatanfaʿahu alththikra

    या नसीहत ग्रहण करे, तो वह नसीहत उसे लाभ दे।

  5. أَمَّا مَنِ ٱسْتَغْنَىٰ۝٥

    Amma mani istaghna

    लेकिन जो बेपरवाह हो गया।

  6. فَأَنتَ لَهُۥ تَصَدَّىٰ۝٦

    Faanta lahu tasadda

    तो आप उसके पीछे पड़ रहे हैं।

  7. وَمَا عَلَيْكَ أَلَّا يَزَّكَّىٰ۝٧

    Wama ʿalayka alla yazzakka

    हालाँकि आपपर कोई दोष नहीं कि वह पवित्रता ग्रहण नहीं करता।

  8. وَأَمَّا مَن جَآءَكَ يَسْعَىٰ۝٨

    Waamma man jaaka yasʿa

    लेकिन जो व्यक्ति आपके पास दौड़ता हुआ आया।

  9. وَهُوَ يَخْشَىٰ۝٩

    Wahuwa yakhsha

    और वह डर (भी) रहा है।

  10. فَأَنتَ عَنْهُ تَلَهَّىٰ۝١٠

    Faanta ʿanhu talahha

    तो आप उसकी ओर ध्यान नहीं देते।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-10) भावार्थ यह है कि सत्य के प्रचारक का यह कर्तव्य है कि जो सत्य की खोज में हो, भले ही वह दरिद्र हो, उसी के सुधार पर ध्यान दे। और जो अभिमान के कारण सत्य की परवाह नहीं करते उनके पीछे समय न गवाँए। आपका यह दायित्व भी नहीं है कि उन्हें अपनी बात मनवा दें।
  11. كَلَّآ إِنَّهَا تَذْكِرَةٌ۝١١

    Kalla innaha tathkiratun

    ऐसा हरगिज़ नहीं चाहिए, यह (क़ुरआन) तो एक उपदेश है।

  12. فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ۝١٢

    Faman shaa thakarahu

    अतः जो चाहे, उसे याद करे।

  13. فِى صُحُفٍ مُّكَرَّمَةٍ۝١٣

    Fee suhufin mukarramatin

    (यह क़ुरआन) सम्मानित सहीफ़ों (ग्रंथों) में है।

  14. مَّرْفُوعَةٍ مُّطَهَّرَةٍۭ۝١٤

    Marfooʿatin mutahharatin

    जो उच्च स्थान वाले तथा पवित्र हैं।

  15. بِأَيْدِى سَفَرَةٍ۝١٥

    Biaydee safaratin

    ऐसे लिखने वालों (फ़रिश्तों) के हाथों में हैं।

  16. كِرَامٍۭ بَرَرَةٍ۝١٦

    Kiramin bararatin

    जो माननीय और नेक हैं।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (11-16) इनमें क़ुरआन की महानता को बताया गया है कि यह एक स्मृति (याद दहानी) है। किसी पर थोपने के लिए नहीं आया है। बल्कि वह तो फ़रिश्तों के हाथों में स्वर्ग में एक पवित्र शास्त्र के अंदर सुरक्षित है। और वहीं से वह (क़ुरआन) इस संसार में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा जा रहा है।
  17. قُتِلَ ٱلْإِنسَـٰنُ مَآ أَكْفَرَهُۥ۝١٧

    Qutila alinsanu ma akfarahu

    सर्वनाश हो मनुष्य का, वह कितना कृतघ्न (नाशुक्रा) है।

  18. مِنْ أَىِّ شَىْءٍ خَلَقَهُۥ۝١٨

    Min ayyi shayin khalaqahu

    (अल्लाह ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया?

  19. مِن نُّطْفَةٍ خَلَقَهُۥ فَقَدَّرَهُۥ۝١٩

    Min nutfatin khalaqahu faqaddarahu

    एक नुत्फ़े (वीर्य) से उसे पैदा किया, फिर विभिन्न चरणों में उसकी रचना की।

  20. ثُمَّ ٱلسَّبِيلَ يَسَّرَهُۥ۝٢٠

    Thumma alssabeela yassarahu

    फिर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया।

  21. ثُمَّ أَمَاتَهُۥ فَأَقْبَرَهُۥ۝٢١

    Thumma amatahu faaqbarahu

    फिर उसे मृत्यु दी, फिर उसे क़ब्र में रखवाया।

  22. ثُمَّ إِذَا شَآءَ أَنشَرَهُۥ۝٢٢

    Thumma itha shaa ansharahu

    फिर जब वह चाहेगा, उसे उठाएगा।

  23. كَلَّا لَمَّا يَقْضِ مَآ أَمَرَهُۥ۝٢٣

    Kalla lamma yaqdi ma amarahu

    हरगिज़ नहीं, अभी तक उसने उसे पूरा नहीं किया, जिसका अल्लाह ने उसे आदेश दिया था।3

    टिप्पणियाँ
    [3] (17-23) तक विश्वासहीनों पर धिक्कार है कि यदि वे अपने अस्तित्व पर विचार करें कि हमने कितनी तुच्छ वीर्य की बूँद से उसकी रचना की तथा अपनी दया से उसे चेतना और समझ दी। परंतु इन सब उपकारों को भूलकर कृतघ्न बना हुआ है, और उपासना अन्य की करता है।
  24. فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ إِلَىٰ طَعَامِهِۦٓ۝٢٤

    Falyanthuri alinsanu ila taʿamihi

    अतः इनसान को चाहिए कि अपने भोजन को देखे।

  25. أَنَّا صَبَبْنَا ٱلْمَآءَ صَبًّا۝٢٥

    Anna sababna almaa sabban

    कि हमने ख़ूब पानी बरसाया।

  26. ثُمَّ شَقَقْنَا ٱلْأَرْضَ شَقًّا۝٢٦

    Thumma shaqaqna alarda shaqqan

    फिर हमने धरती को विशेष रूप से फाड़ा।

  27. فَأَنۢبَتْنَا فِيهَا حَبًّا۝٢٧

    Faanbatna feeha habban

    फिर हमने उसमें अनाज उगाया।

  28. وَعِنَبًا وَقَضْبًا۝٢٨

    Waʿinaban waqadban

    तथा अंगूर और (मवेशियों का) चारा।

  29. وَزَيْتُونًا وَنَخْلًا۝٢٩

    Wazaytoonan wanakhlan

    तथा ज़ैतून और खजूर के पेड़।

  30. وَحَدَآئِقَ غُلْبًا۝٣٠

    Wahadaiqa ghulban

    तथा घने बाग़।

  31. وَفَـٰكِهَةً وَأَبًّا۝٣١

    Wafakihatan waabban

    तथा फल और चारा।

  32. مَّتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ۝٣٢

    Mataʿan lakum walianʿamikum

    तुम्हारे लिए तथा तुम्हारे पशुओं के लिए जीवन-सामग्री के रूप में।4

    टिप्पणियाँ
    [4] (24-32) इन आयतों में इनसान के जीवन साधनों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अल्लाह की अपार दया की परिचायक हैं। अतः जब सारी व्यवस्था वही करता है, तो फिर उसके इन उपकारों पर इनसान के लिए उचित था कि उसी की बात माने और उसी के आदेशों का पालन करे जो क़ुरआन के माध्यम से अंतिम नबी मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्म) द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। (दावतुल क़ुरआन)
  33. فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ۝٣٣

    Faitha jaati alssakhkhatu

    तो जब कानों को बहरा कर देने वाली प्रचंड आवाज़ (क़ियामत) आ जाएगी।

  34. يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ۝٣٤

    Yawma yafirru almaro min akheehi

    जिस दिन इनसान अपने भाई से भागेगा।

  35. وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ۝٣٥

    Waommihi waabeehi

    तथा अपनी माता और अपने पिता (से)।

  36. وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ۝٣٦

    Wasahibatihi wabaneehi

    तथा अपनी पत्नी और अपने बेटों से।

  37. لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ۝٣٧

    Likulli imriin minhum yawmaithin shanun yughneehi

    उस दिन उनमें से प्रत्येक व्यक्ति की ऐसी स्थिति होगी, जो उसे (दूसरों से) बेपरवाह कर देगी।

  38. وُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ مُّسْفِرَةٌ۝٣٨

    Wujoohun yawmaithin musfiratun

    उस दिन कुछ चेहरे रौशन होंगे।

  39. ضَاحِكَةٌ مُّسْتَبْشِرَةٌ۝٣٩

    Dahikatun mustabshiratun

    हँसते हुए, प्रसन्न होंगे।

  40. وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ عَلَيْهَا غَبَرَةٌ۝٤٠

    Wawujoohun yawmaithin ʿalayha ghabaratun

    तथा कुछ चेहरों उस दिन धूल से ग्रस्त होंगे।

  41. تَرْهَقُهَا قَتَرَةٌ۝٤١

    Tarhaquha qataratun

    उनपर कालिमा छाई होगी।

  42. أُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْكَفَرَةُ ٱلْفَجَرَةُ۝٤٢

    Olaika humu alkafaratu alfajaratu

    वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।5

    टिप्पणियाँ
    [5] (33-42) इन आयतों का भावार्थ यह है कि संसार में किसी पर कोई आपदा आती है, तो उसके अपने लोग उसकी सहायता और रक्षा करते हैं। परंतु प्रलय के दिन सबको अपनी-अपनी पड़ी होगी और उसके कर्म ही उसकी रक्षा करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह अबस के नाम का मतलब क्या है?

अबस का मतलब "त्योरी चढ़ाई" है।

सूरह अबस किस पारे में है?

सूरह अबस पारा 30 में है।

सूरह अबस में कितनी आयतें हैं?

सूरह अबस में 42 आयतें हैं।

सूरह अबस मक्की है या मदनी?

सूरह अबस मक्की सूरह है।

सूरह अबस क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 80वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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