سورة النازعات

सूरह नाज़िआत हिंदी में

खींच निकालने वाले

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह नाज़िआत (النازعات) क़ुरआन की 79वीं सूरह है और इसमें 46 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "खींच निकालने वाले" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह नाज़िआत का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह नाज़िआत: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًا۝١

    Waalnnaziʿati gharqan

    क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!

  2. وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًا۝٢

    Waalnnashitati nashtan

    और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!

  3. وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًا۝٣

    Waalssabihati sabhan

    और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!

  4. فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًا۝٤

    Faalssabiqati sabqan

    फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!

  5. فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًا۝٥

    Faalmudabbirati amran

    फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं!1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-5) यहाँ से बताया गया है कि प्रलय का आरंभ भारी भूकंप से होगा और दूसरे ही क्षण सब जीवित होकर धरती के ऊपर होंगे।
  6. يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ۝٦

    Yawma tarjufu alrrajifatu

    जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।

  7. تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ۝٧

    Tatbaʿuha alrradifatu

    उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।

  8. قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ۝٨

    Quloobun yawmaithin wajifatun

    उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।

  9. أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌ۝٩

    Absaruha khashiʿatun

    उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।

  10. يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ۝١٠

    Yaqooloona ainna lamardoodoona fee alhafirati

    वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?

  11. أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًا نَّخِرَةً۝١١

    Aitha kunna ʿithaman nakhiratan

    क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?

  12. قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ۝١٢

    Qaloo tilka ithan karratun khasiratun

    उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।

  13. فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ۝١٣

    Fainnama hiya zajratun wahidatun

    वह तो केवल एक डाँट होगी।

  14. فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ۝١٤

    Faitha hum bialssahirati

    फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।

  15. هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ۝١٥

    Hal ataka hadeethu moosa

    (ऐ नबी!) क्या आपके पास मूसा की बात पहुँची है?2

    टिप्पणियाँ
    [2] (6-15) इन आयतों में प्रलय दिवस का चित्र पेश किया गया है। और काफ़िरों की स्थिति बताई गई है कि वे उस दिन किस प्रकार अपने आपको एक खुले मैदान में पाएँगे।
  16. إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى۝١٦

    Ith nadahu rabbuhu bialwadi almuqaddasi tuwan

    जब उसके पालनहार ने उसे पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा।

  17. ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ۝١٧

    Ithhab ila firʿawna innahu tagha

    फ़िरऔन के पास जाओ, निश्चय वह हद से बढ़ गया है।

  18. فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ۝١٨

    Faqul hal laka ila an tazakka

    फिर उससे कहो : क्या तुझे इस बात की इच्छा है कि तू पवित्र हो जाए?

  19. وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ۝١٩

    Waahdiyaka ila rabbika fatakhsha

    और मैं तेरे पालनहार की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ, तो तू डर जाए?

  20. فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ۝٢٠

    Faarahu alayata alkubra

    फिर उसे सबसे बड़ी निशानी (चमत्कार) दिखाई।

  21. فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ۝٢١

    Fakaththaba waʿasa

    तो उसने झुठला दिया और अवज्ञा की।

  22. ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ۝٢٢

    Thumma adbara yasʿa

    फिर वह पलटा (मूसा अलैहिस्सलाम के विरोध का) प्रयास करते हुए।

  23. فَحَشَرَ فَنَادَىٰ۝٢٣

    Fahashara fanada

    फिर उसने (लोगों को) एकत्रित किया। फिर पुकारा।

  24. فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ۝٢٤

    Faqala ana rabbukumu alaʿla

    तो उसने कहा : मैं तुम्हारा सबसे ऊँचा पालनहार हूँ।

  25. فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ۝٢٥

    Faakhathahu Allahu nakala alakhirati waaloola

    तो अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की यातना में पकड़ लिया।

  26. إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰٓ۝٢٦

    Inna fee thalika laʿibratan liman yakhsha

    निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा है, जो डरता है।

  27. ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا۝٢٧

    Aantum ashaddu khalqan ami alssamao banaha

    क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन है या आकाश को, जिसे उसने बनाया।3

    टिप्पणियाँ
    [3] (16-27) यहाँ से प्रलय के होने और पुनः जीवित करने के तर्क आकाश तथा धरती की रचना से दिए जा रहे हैं कि जिस शक्ति ने यह सब बनाया और तुम्हारे जीवन रक्षा की व्यवस्था की है, प्रलय करना और फिर सब को जीवित करना उसके लिए असंभव कैसे हो सकता है? तुम स्वयं विचार करके निर्णय करो।
  28. رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا۝٢٨

    Rafaʿa samkaha fasawwaha

    उसकी छत को ऊँचा किया, फिर उसे बराबर किया।

  29. وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا۝٢٩

    Waaghtasha laylaha waakhraja duhaha

    और उसकी रात को अंधेरा कर दिया तथा उसके दिन के प्रकाश को प्रकट कर दिया।

  30. وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ۝٣٠

    Waalarda baʿda thalika dahaha

    और उसके बाद धरती को बिछाया।

  31. أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا۝٣١

    Akhraja minha maaha wamarʿaha

    उससे उसका पानी और उसका चारा निकाला।

  32. وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا۝٣٢

    Waaljibala arsaha

    और पर्वतों को गाड़ दिया।

  33. مَتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ۝٣٣

    Mataʿan lakum walianʿamikum

    तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लाभ के लिए।

  34. فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ۝٣٤

    Faitha jaati alttammatu alkubra

    फिर जब बड़ी आपदा (क़ियामत) आ जाएगी।4

    टिप्पणियाँ
    [4] (28-34) 'बड़ी आपदा' प्रलय को कहा गया है जो उसकी घोर स्थिति का चित्रण है।
  35. يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ۝٣٥

    Yawma yatathakkaru alinsanu ma saʿa

    जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा।5

    टिप्पणियाँ
    [5] (35) यह प्रलय का तीसरा चरण होगा जबकि वह सामने होगी। उस दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने सांसारिक कर्म याद आएँगे और कर्मानुसार जिसने सत्य धर्म की शिक्षा का पालन किया होगा उसे स्वर्ग का सुख मिलेगा और जिसने सत्य धर्म और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को नकारा और मनमानी धर्म और कर्म किया होगा वह नरक का स्थायी दुःख भोगेगा।
  36. وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ۝٣٦

    Waburrizati aljaheemu liman yara

    और देखने वाले के लिए जहन्नम सामने कर दी जाएगी।

  37. فَأَمَّا مَن طَغَىٰ۝٣٧

    Faamma man tagha

    तो जो व्यक्ति हद से बढ़ गया।

  38. وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا۝٣٨

    Waathara alhayata alddunya

    और उसने सांसारिक जीवन को वरीयता दी।

  39. فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ۝٣٩

    Fainna aljaheema hiya almawa

    तो निःसंदेह जहन्नम ही उसका ठिकाना है।

  40. وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ۝٤٠

    Waama man khafa maqama rabbihi wanaha alnnafsa ʿani alhawa

    लेकिन जो अपने पालनहार के समक्ष खड़ा होने से डर गया तथा अपने मन को बुरी इच्छा से रोक लिया।

  41. فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ۝٤١

    Fainna aljannata hiya almawa

    तो निःसंदेह जन्नत ही उसका ठिकाना है।

  42. يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا۝٤٢

    Yasaloonaka ʿani alssaʿati ayyana mursaha

    वे आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब घटित होगी?6

    टिप्पणियाँ
    [6] (42) काफ़िरों का यह प्रश्न समय जानने के लिए नहीं, बल्कि हँसी उड़ाने के लिए था।
  43. فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ۝٤٣

    Feema anta min thikraha

    आपका उसके उल्लेख करने से क्या संबंध है?

  44. إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ۝٤٤

    Ila rabbika muntahaha

    उस (के ज्ञान) की अंतिमता तुम्हारे पालनहार ही की ओर है।

  45. إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا۝٤٥

    Innama anta munthiru man yakhshaha

    आप तो केवल उसे डराने वाले हैं, जो उससे डरता है।7

    टिप्पणियाँ
    [7] (45) इस आयत में कहा गया है कि (ऐ नबी!) सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आप का दायित्व मात्र उस दिन से सावधान करना है। धर्म बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं। जो नहीं मानेगा, उसे स्वयं उस दिन समझ में आ जाएगा कि उसने क्षण भर के सांसारिक जीवन के स्वार्थ के लिए अपना स्थायी सुख खो दिया। और उस समय पछतावे का कुछ लाभ नहीं होगा।
  46. كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا۝٤٦

    Kaannahum yawma yarawnaha lam yalbathoo illa ʿashiyyatan aw duhaha

    जिस दिन वे उसे देखेंगे, तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) केवल एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह नाज़िआत के नाम का मतलब क्या है?

नाज़िआत का मतलब "खींच निकालने वाले" है।

सूरह नाज़िआत किस पारे में है?

सूरह नाज़िआत पारा 30 में है।

सूरह नाज़िआत में कितनी आयतें हैं?

सूरह नाज़िआत में 46 आयतें हैं।

सूरह नाज़िआत मक्की है या मदनी?

सूरह नाज़िआत मक्की सूरह है।

सूरह नाज़िआत क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 79वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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