سورة النازعات
सूरह नाज़िआत हिंदी में
खींच निकालने वाले
- 79
- 46 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ने 583–584
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सूरह नाज़िआत (النازعات) क़ुरआन की 79वीं सूरह है और इसमें 46 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "खींच निकालने वाले" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह नाज़िआत का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह नाज़िआत: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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وَٱلنَّـٰزِعَـٰتِ غَرْقًا١
Waalnnaziʿati gharqan
क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!
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وَٱلنَّـٰشِطَـٰتِ نَشْطًا٢
Waalnnashitati nashtan
और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!
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وَٱلسَّـٰبِحَـٰتِ سَبْحًا٣
Waalssabihati sabhan
और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!
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فَٱلسَّـٰبِقَـٰتِ سَبْقًا٤
Faalssabiqati sabqan
फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!
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فَٱلْمُدَبِّرَٰتِ أَمْرًا٥
Faalmudabbirati amran
फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं!1
टिप्पणियाँ
[1] (1-5) यहाँ से बताया गया है कि प्रलय का आरंभ भारी भूकंप से होगा और दूसरे ही क्षण सब जीवित होकर धरती के ऊपर होंगे। -
يَوْمَ تَرْجُفُ ٱلرَّاجِفَةُ٦
Yawma tarjufu alrrajifatu
जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।
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تَتْبَعُهَا ٱلرَّادِفَةُ٧
Tatbaʿuha alrradifatu
उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।
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قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ٨
Quloobun yawmaithin wajifatun
उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।
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أَبْصَـٰرُهَا خَـٰشِعَةٌ٩
Absaruha khashiʿatun
उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।
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يَقُولُونَ أَءِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِى ٱلْحَافِرَةِ١٠
Yaqooloona ainna lamardoodoona fee alhafirati
वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?
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أَءِذَا كُنَّا عِظَـٰمًا نَّخِرَةً١١
Aitha kunna ʿithaman nakhiratan
क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?
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قَالُوا۟ تِلْكَ إِذًا كَرَّةٌ خَاسِرَةٌ١٢
Qaloo tilka ithan karratun khasiratun
उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।
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فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ١٣
Fainnama hiya zajratun wahidatun
वह तो केवल एक डाँट होगी।
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فَإِذَا هُم بِٱلسَّاهِرَةِ١٤
Faitha hum bialssahirati
फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।
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هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ١٥
Hal ataka hadeethu moosa
(ऐ नबी!) क्या आपके पास मूसा की बात पहुँची है?2
टिप्पणियाँ
[2] (6-15) इन आयतों में प्रलय दिवस का चित्र पेश किया गया है। और काफ़िरों की स्थिति बताई गई है कि वे उस दिन किस प्रकार अपने आपको एक खुले मैदान में पाएँगे। -
إِذْ نَادَىٰهُ رَبُّهُۥ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى١٦
Ith nadahu rabbuhu bialwadi almuqaddasi tuwan
जब उसके पालनहार ने उसे पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा।
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ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ١٧
Ithhab ila firʿawna innahu tagha
फ़िरऔन के पास जाओ, निश्चय वह हद से बढ़ गया है।
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فَقُلْ هَل لَّكَ إِلَىٰٓ أَن تَزَكَّىٰ١٨
Faqul hal laka ila an tazakka
फिर उससे कहो : क्या तुझे इस बात की इच्छा है कि तू पवित्र हो जाए?
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وَأَهْدِيَكَ إِلَىٰ رَبِّكَ فَتَخْشَىٰ١٩
Waahdiyaka ila rabbika fatakhsha
और मैं तेरे पालनहार की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ, तो तू डर जाए?
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فَأَرَىٰهُ ٱلْـَٔايَةَ ٱلْكُبْرَىٰ٢٠
Faarahu alayata alkubra
फिर उसे सबसे बड़ी निशानी (चमत्कार) दिखाई।
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فَكَذَّبَ وَعَصَىٰ٢١
Fakaththaba waʿasa
तो उसने झुठला दिया और अवज्ञा की।
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ثُمَّ أَدْبَرَ يَسْعَىٰ٢٢
Thumma adbara yasʿa
फिर वह पलटा (मूसा अलैहिस्सलाम के विरोध का) प्रयास करते हुए।
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فَحَشَرَ فَنَادَىٰ٢٣
Fahashara fanada
फिर उसने (लोगों को) एकत्रित किया। फिर पुकारा।
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فَقَالَ أَنَا۠ رَبُّكُمُ ٱلْأَعْلَىٰ٢٤
Faqala ana rabbukumu alaʿla
तो उसने कहा : मैं तुम्हारा सबसे ऊँचा पालनहार हूँ।
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فَأَخَذَهُ ٱللَّهُ نَكَالَ ٱلْـَٔاخِرَةِ وَٱلْأُولَىٰٓ٢٥
Faakhathahu Allahu nakala alakhirati waaloola
तो अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की यातना में पकड़ लिया।
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إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰٓ٢٦
Inna fee thalika laʿibratan liman yakhsha
निःसंदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा है, जो डरता है।
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ءَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ ٱلسَّمَآءُ ۚ بَنَىٰهَا٢٧
Aantum ashaddu khalqan ami alssamao banaha
क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन है या आकाश को, जिसे उसने बनाया।3
टिप्पणियाँ
[3] (16-27) यहाँ से प्रलय के होने और पुनः जीवित करने के तर्क आकाश तथा धरती की रचना से दिए जा रहे हैं कि जिस शक्ति ने यह सब बनाया और तुम्हारे जीवन रक्षा की व्यवस्था की है, प्रलय करना और फिर सब को जीवित करना उसके लिए असंभव कैसे हो सकता है? तुम स्वयं विचार करके निर्णय करो। -
رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّىٰهَا٢٨
Rafaʿa samkaha fasawwaha
उसकी छत को ऊँचा किया, फिर उसे बराबर किया।
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وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَىٰهَا٢٩
Waaghtasha laylaha waakhraja duhaha
और उसकी रात को अंधेरा कर दिया तथा उसके दिन के प्रकाश को प्रकट कर दिया।
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وَٱلْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَىٰهَآ٣٠
Waalarda baʿda thalika dahaha
और उसके बाद धरती को बिछाया।
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أَخْرَجَ مِنْهَا مَآءَهَا وَمَرْعَىٰهَا٣١
Akhraja minha maaha wamarʿaha
उससे उसका पानी और उसका चारा निकाला।
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وَٱلْجِبَالَ أَرْسَىٰهَا٣٢
Waaljibala arsaha
और पर्वतों को गाड़ दिया।
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مَتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَـٰمِكُمْ٣٣
Mataʿan lakum walianʿamikum
तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लाभ के लिए।
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فَإِذَا جَآءَتِ ٱلطَّآمَّةُ ٱلْكُبْرَىٰ٣٤
Faitha jaati alttammatu alkubra
फिर जब बड़ी आपदा (क़ियामत) आ जाएगी।4
टिप्पणियाँ
[4] (28-34) 'बड़ी आपदा' प्रलय को कहा गया है जो उसकी घोर स्थिति का चित्रण है। -
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ مَا سَعَىٰ٣٥
Yawma yatathakkaru alinsanu ma saʿa
जिस दिन इनसान अपने किए को याद करेगा।5
टिप्पणियाँ
[5] (35) यह प्रलय का तीसरा चरण होगा जबकि वह सामने होगी। उस दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने सांसारिक कर्म याद आएँगे और कर्मानुसार जिसने सत्य धर्म की शिक्षा का पालन किया होगा उसे स्वर्ग का सुख मिलेगा और जिसने सत्य धर्म और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को नकारा और मनमानी धर्म और कर्म किया होगा वह नरक का स्थायी दुःख भोगेगा। -
وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ٣٦
Waburrizati aljaheemu liman yara
और देखने वाले के लिए जहन्नम सामने कर दी जाएगी।
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فَأَمَّا مَن طَغَىٰ٣٧
Faamma man tagha
तो जो व्यक्ति हद से बढ़ गया।
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وَءَاثَرَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا٣٨
Waathara alhayata alddunya
और उसने सांसारिक जीवन को वरीयता दी।
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فَإِنَّ ٱلْجَحِيمَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ٣٩
Fainna aljaheema hiya almawa
तो निःसंदेह जहन्नम ही उसका ठिकाना है।
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وَأَمَّا مَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ وَنَهَى ٱلنَّفْسَ عَنِ ٱلْهَوَىٰ٤٠
Waama man khafa maqama rabbihi wanaha alnnafsa ʿani alhawa
लेकिन जो अपने पालनहार के समक्ष खड़ा होने से डर गया तथा अपने मन को बुरी इच्छा से रोक लिया।
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فَإِنَّ ٱلْجَنَّةَ هِىَ ٱلْمَأْوَىٰ٤١
Fainna aljannata hiya almawa
तो निःसंदेह जन्नत ही उसका ठिकाना है।
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يَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلسَّاعَةِ أَيَّانَ مُرْسَىٰهَا٤٢
Yasaloonaka ʿani alssaʿati ayyana mursaha
वे आपसे क़ियामत के बारे में पूछते हैं कि वह कब घटित होगी?6
टिप्पणियाँ
[6] (42) काफ़िरों का यह प्रश्न समय जानने के लिए नहीं, बल्कि हँसी उड़ाने के लिए था। -
فِيمَ أَنتَ مِن ذِكْرَىٰهَآ٤٣
Feema anta min thikraha
आपका उसके उल्लेख करने से क्या संबंध है?
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إِلَىٰ رَبِّكَ مُنتَهَىٰهَآ٤٤
Ila rabbika muntahaha
उस (के ज्ञान) की अंतिमता तुम्हारे पालनहार ही की ओर है।
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إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرُ مَن يَخْشَىٰهَا٤٥
Innama anta munthiru man yakhshaha
आप तो केवल उसे डराने वाले हैं, जो उससे डरता है।7
टिप्पणियाँ
[7] (45) इस आयत में कहा गया है कि (ऐ नबी!) सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आप का दायित्व मात्र उस दिन से सावधान करना है। धर्म बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं। जो नहीं मानेगा, उसे स्वयं उस दिन समझ में आ जाएगा कि उसने क्षण भर के सांसारिक जीवन के स्वार्थ के लिए अपना स्थायी सुख खो दिया। और उस समय पछतावे का कुछ लाभ नहीं होगा। -
كَأَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَهَا لَمْ يَلْبَثُوٓا۟ إِلَّا عَشِيَّةً أَوْ ضُحَىٰهَا٤٦
Kaannahum yawma yarawnaha lam yalbathoo illa ʿashiyyatan aw duhaha
जिस दिन वे उसे देखेंगे, तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) केवल एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह नाज़िआत के नाम का मतलब क्या है?
नाज़िआत का मतलब "खींच निकालने वाले" है।
सूरह नाज़िआत किस पारे में है?
सूरह नाज़िआत पारा 30 में है।
सूरह नाज़िआत में कितनी आयतें हैं?
सूरह नाज़िआत में 46 आयतें हैं।
सूरह नाज़िआत मक्की है या मदनी?
सूरह नाज़िआत मक्की सूरह है।
सूरह नाज़िआत क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 79वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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