سورة النبإ
सूरह नबा हिंदी में
ख़बर
- 78
- 40 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ने 582–583
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सूरह नबा (النبإ) क़ुरआन की 78वीं सूरह है और इसमें 40 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "ख़बर" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह नबा का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह नबा: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ١
ʿAmma yatasaaloona
वे आपस में किस चीज़ के विषय में प्रश्न कर रहे हैं?
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عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ٢
ʿAni alnnabai alʿatheemi
बहुत बड़ी सूचना के विषय में।
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ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ٣
Allathee hum feehi mukhtalifoona
जिसमें वे मतभेद करने वाले हैं।
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كَلَّا سَيَعْلَمُونَ٤
Kalla sayaʿlamoona
हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।
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ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ٥
Thumma kalla sayaʿlamoona
फिर हरगिज़ नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।1
टिप्पणियाँ
[1] (1-5) इन आयतों में उनको धिक्कारा गया है, जो प्रलय की हँसी उड़ाते हैं। जैसे उनके लिए प्रलय की सूचना किसी गंभीर चिंता के योग्य नहीं। परंतु वह दिन दूर नहीं जब प्रलय उनके आगे आ जाएगी और वे विश्व विधाता के सामने उत्तरदायित्व के लिए उपस्थित होंगे। -
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَـٰدًا٦
Alam najʿali alarda mihadan
क्या हमने धरती को बिछौना नहीं बनाया?
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وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًا٧
Waaljibala awtadan
और पर्वतों को मेखें?
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وَخَلَقْنَـٰكُمْ أَزْوَٰجًا٨
Wakhalaqnakum azwajan
तथा हमने तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।
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وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا٩
Wajaʿalna nawmakum subatan
तथा हमने तुम्हारी नींद को आराम (का साधन) बनाया।
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وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًا١٠
Wajaʿalna allayla libasan
और हमने रात को आवरण बनाया।
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وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًا١١
Wajaʿalna alnnahara maʿashan
और हमने दिन को कमाने के लिए बनाया।
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وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا١٢
Wabanayna fawqakum sabʿan shidadan
तथा हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आकाश) बनाए।
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وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا١٣
Wajaʿalna sirajan wahhajan
और हमने एक प्रकाशमान् तप्त दीप (सूर्य) बनाया।
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وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءً ثَجَّاجًا١٤
Waanzalna mina almuʿsirati maan thajjajan
और हमने बदलियों से मूसलाधार पानी उतारा।
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لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّا وَنَبَاتًا١٥
Linukhrija bihi habban wanabatan
ताकि हम उसके द्वारा अन्न और वनस्पति उगाएँ।
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وَجَنَّـٰتٍ أَلْفَافًا١٦
Wajannatin alfafan
और घने-घने बाग़।2
टिप्पणियाँ
[2] (6-16) इन आयतों में अल्लाह की शक्ति और प्रतिपालन (रूबूबिय्यत) के लक्षण दर्शाए गए हैं, जो यह साक्ष्य देते हैं कि प्रतिकार (बदले) का दिन आवश्यक है, क्योंकि जिसके लिए इतनी बड़ी व्यवस्था की गई हो और उसे कर्मों के अधिकार भी दिए गए हों, तो उसके कर्मों का पुरस्कार या दंड तो मिलना ही चाहिए। -
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَـٰتًا١٧
Inna yawma alfasli kana meeqatan
निःसंदेह निर्णय (फ़ैसले) का दिन एक नियत समय है।
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يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا١٨
Yawma yunfakhu fee alssoori fatatoona afwajan
जिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी, तो तुम दल के दल चले आओगे।
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وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًا١٩
Wafutihati alssamao fakanat abwaban
और आकाश खोल दिया जाएगा, तो उसमें द्वार ही द्वार हो जाएँगे।
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وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا٢٠
Wasuyyirati aljibalu fakanat saraban
और पर्वत चलाए जाएँगे, तो वे मरीचिका बन जाएँगे।3
टिप्पणियाँ
[3] (17-20) इन आयतों में बताया जा रहा है कि निर्णय का दिन अपने निश्चित समय पर आकर रहेगा, उस दिन आकाश तथा धरती में एक बड़ी उथल-पुथल होगी। इसके लिए सूर में एक फूँक मारने की देर है। फिर जिसकी सूचना दी जा रही है तुम्हारे सामने आ जाएगी। तुम्हारे मानने या न मानने का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। और सब अपना ह़िसाब देने के लिए अल्लाह के न्यायालय की ओर चल पड़ेंगे। -
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا٢١
Inna jahannama kanat mirsadan
निःसंदेह जहन्नम घात में है।
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لِّلطَّـٰغِينَ مَـَٔابًا٢٢
Lilttagheena maaban
सरकशों का ठिकाना है।
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لَّـٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًا٢٣
Labitheena feeha ahqaban
जिसमें वे अनगिनत वर्षों तक रहेंगे।
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لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا٢٤
La yathooqoona feeha bardan wala sharaban
वे उसमें न कोई ठंड चखेंगे और न पीने की चीज़।
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إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا٢٥
Illa hameeman waghassaqan
सिवाय अत्यंत गर्म पानी और बहती पीप के।
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جَزَآءً وِفَاقًا٢٦
Jazaan wifaqan
यह पूरा-पूरा बदला है।
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إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًا٢٧
Innahum kanoo la yarjoona hisaban
निःसंदेह वे हिसाब से नहीं डरते थे।
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وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كِذَّابًا٢٨
Wakaththaboo biayatina kiththaban
तथा उन्होंने हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया।
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وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَـٰهُ كِتَـٰبًا٢٩
Wakulla shayin ahsaynahu kitaban
और हमने हर चीज़ को लिखकर संरक्षित कर रखा है।
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فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا٣٠
Fathooqoo falan nazeedakum illa ʿathaban
तो चखो, हम तुम्हारे लिए यातना ही अधिक करते रहेंगे।4
टिप्पणियाँ
[4] (21-30) इन आयतों में बताया गया है कि जो ह़िसाब की आशा नहीं रखते और हमारी आयतों को नहीं मानते हमने उनकी एक-एक करतूत को गिनकर अपने यहाँ लिख रखा है। और उनकी ख़बर लेने के लिए नरक घात लगाए तैयार है, जहाँ उनके कुकर्मों का भरपूर बदला दिया जाएगा। -
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا٣١
Inna lilmuttaqeena mafazan
निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सफलता है।
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حَدَآئِقَ وَأَعْنَـٰبًا٣٢
Hadaiqa waaʿnaban
बाग़ तथा अंगूर।
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وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا٣٣
Wakawaʿiba atraban
और समान उम्र वाली नवयुवतियाँ।
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وَكَأْسًا دِهَاقًا٣٤
Wakasan dihaqan
और छलकते हुए प्याले।
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لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّٰبًا٣٥
La yasmaʿoona feeha laghwan wala kiththaban
वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।
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جَزَآءً مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًا٣٦
Jazaan min rabbika ʿataan hisaban
यह तुम्हारे पालनहार की ओर से बदले में ऐसा प्रदान है जो पर्याप्त होगा।
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رَّبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَـٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا٣٧
Rabbi alssamawati waalardi wama baynahuma alrrahmani la yamlikoona minhu khitaban
जो आकाशों और धरती तथा उनके बीच की हर चीज़ का पालनहार है, अत्यंत दयावान् है। उससे बात करने का उन्हें अधिकार नहीं होगा।
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يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَقَالَ صَوَابًا٣٨
Yawma yaqoomu alrroohu waalmalaikatu saffan la yatakallamoona illa man athina lahu alrrahmanu waqala sawaban
जिस दिन रूह़ (जिबरील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, उससे केवल वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और वह ठीक बात कहेगा।
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ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا٣٩
Thalika alyawmu alhaqqu faman shaa ittakhatha ila rabbihi maaban
यही (वह) दिन है जो सत्य है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर लौटने की जगह (ठिकाना) बना ले।5
टिप्पणियाँ
[5] (37-39) इन आयतों में अल्लाह के न्यायालय में उपस्थिति (ह़ाज़िरी) का चित्र दिखाया गया है। और जो इस भ्रम में पड़े हैं कि उनके देवी-देवता आदि अभिस्ताव करेंगे उनको सावधान किया गया है कि उस दिन कोई बिना उस की आज्ञा के मुँह नहीं खोलेगा और अल्लाह की आज्ञा से अभिस्ताव भी करेगा तो उसी के लिए जो संसार में सत्य वचन "ला इलाहा इल्लल्लाह" को मानता हो। अल्लाह के द्रोही और सत्य के विरोधी किसी अभिस्ताव के योग्य नगीं होंगे। -
إِنَّآ أَنذَرْنَـٰكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَـٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا٤٠
Inna antharnakum ʿathaban qareeban yawma yanthuru almaro ma qaddamat yadahu wayaqoolu alkafiru ya laytanee kuntu turaban
निःसंदेह हमने तुम्हें एक निकट ही आने वाली यातना से डरा दिया है, जिस दिन मनुष्य देख लेगा, जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा : ऐ काश कि मैं मिट्टी होता!6
टिप्पणियाँ
[6] (40) बात को इस चेतावनी पर समाप्त किया गया है कि जिस दिन के आने की सूचना दी जा रही है, उस का आना सत्य है, उसे दूर न समझो। अब जिसका दिल चाहे इसे मानकर अपने पालनहार की ओर मार्ग बना ले। परंतु इस चेतावनी के होते जो इनकार करेगा, उसका किया-धरा सामने आएगा, तो पछता-पछता कर यह कामना करेगा कि मैं संसार में पैदा ही न होता। उस समय इस संसार के बारे में उसका यह विचार होगा जिसके प्रेम में आज वह परलोक से अंधा बना हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह नबा के नाम का मतलब क्या है?
नबा का मतलब "ख़बर" है।
सूरह नबा किस पारे में है?
सूरह नबा पारा 30 में है।
सूरह नबा में कितनी आयतें हैं?
सूरह नबा में 40 आयतें हैं।
सूरह नबा मक्की है या मदनी?
सूरह नबा मक्की सूरह है।
सूरह नबा क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 78वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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