سورة البلد
सूरह बलद हिंदी में
शहर
- 90
- 20 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ना 594
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सूरह बलद (البلد) क़ुरआन की 90वीं सूरह है और इसमें 20 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "शहर" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह बलद का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह बलद: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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لَآ أُقْسِمُ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ١
La oqsimu bihatha albaladi
मैं इस नगर (मक्का) की क़सम खाता हूँ!
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وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَـٰذَا ٱلْبَلَدِ٢
Waanta hillun bihatha albaladi
तथा तुम्हारे लिए इस नगर में लड़ाई हलाल होने वाली है।
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وَوَالِدٍ وَمَا وَلَدَ٣
Wawalidin wama walada
तथा क़सम है पिता तथा उसकी संतान की!
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لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ فِى كَبَدٍ٤
Laqad khalaqna alinsana fee kabadin
निःसंदेह हमने मनुष्य को बड़ी कठिनाई में पैदा किया है।
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أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌ٥
Ayahsabu an lan yaqdira ʿalayhi ahadun
क्या वह समझता है कि उसपर कभी किसी का वश नहीं चलेगा?1
टिप्पणियाँ
[1] (1-5) इन आयतों में सर्व प्रथम मक्का नगर में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर जो घटनाएँ घट रही थीं, और आप तथा आपके अनुयायियों को सताया जा रहा था, उसको साक्षी के रूप में प्रस्तुत किया गया है कि इनसान की पैदाइश (रचना) संसार का स्वाद लेने के लिए नहीं हुई है। संसार परिश्रम तथा पीड़ाएँ झेलने का स्थान है। कोई इनसान इस स्थिति से गुज़रे बिना नहीं रह सकता। "पिता" से अभिप्राय आदम अलैहिस्सलमा और "संतान" से अभिप्राय समस्त मानवजाति (इनसान) हैं। फिर इनसान के इस भ्रम को दूर किया है कि उसके ऊपर कोई शक्ति नहीं है, जो उसके कर्मों को देख रही है, और समय आने पर उसकी पकड़ करेगी। -
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًا لُّبَدًا٦
Yaqoolu ahlaktu malan lubadan
वह कहता है कि मैंने ढेर सारा धन ख़र्च कर दिया।
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أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ٧
Ayahsabu an lam yarahu ahadun
क्या वह समझता है कि उसे किसी ने नहीं देखा?2
टिप्पणियाँ
[2] (1-5) इनमें यह बताया गया है कि संसार में बड़ाई तथा प्रधानता के ग़लत पैमाने बना लिए गए हैं, और जो दिखावे के लिए धन व्यय (ख़र्च) करता है उसकी प्रशंसा की जाती है, जबकि उसके ऊपर एक शक्ति है जो यह देख रही है कि उसने किन राहों में और किस लिए धन ख़र्च किया है। -
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ٨
Alam najʿal lahu ʿaynayni
क्या हमने उसके लिए दो आँखें नहीं बनाईं?
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وَلِسَانًا وَشَفَتَيْنِ٩
Walisanan washafatayni
तथा एक ज़बान और दो होंठ (नहीं बनाए)?
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وَهَدَيْنَـٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ١٠
Wahadaynahu alnnajdayni
और हमने उसे दोनों मार्ग दिखा दिए?!
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فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ١١
Fala iqtahama alʿaqabata
परंतु उसने दुर्लभ घाटी में प्रवेश ही नहीं किया।
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وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ١٢
Wama adraka ma alʿaqabatu
और तुम्हें किस चीज़ ने ज्ञात कराया कि वह दुर्लभ 'घाटी' क्या है?
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فَكُّ رَقَبَةٍ١٣
Fakku raqabatin
(वह) गर्दन छुड़ाना है।
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أَوْ إِطْعَـٰمٌ فِى يَوْمٍ ذِى مَسْغَبَةٍ١٤
Aw itʿamun fee yawmin thee masghabatin
या किसी भूख वाले दिन में खाना खिलाना है।
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يَتِيمًا ذَا مَقْرَبَةٍ١٥
Yateeman tha maqrabatin
किसी रिश्तेदार अनाथ को।
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أَوْ مِسْكِينًا ذَا مَتْرَبَةٍ١٦
Aw miskeenan tha matrabatin
या मिट्टी में लथड़े हुए निर्धन को।3
टिप्पणियाँ
[3] (8-16) इन आयतों में फरमाया गया है कि इनसान को ज्ञान और चिंतन के साधन और योग्यताएँ देकर हमने उसके सामने भलाई तथा बुराई के दोनों मार्ग खोल दिए हैं, एक नैतिक पतन की ओर ले जाता है और उसमें मन को अति स्वाद मिलता है। दूसरा नैतिक ऊँचाईयों की राह जिस में कठिनाईयाँ हैं। और उसी को घाटी कहा गया है। जिसमें प्रवेश करने वालों के कर्तव्य में है कि दासों को मुक्त करें, निर्धनों को भोजन कराएँ इत्यादि, वही लोग स्वर्गवासी हैं। और वे जिन्होंने अल्लाह की आयतों का इनकार किया, वे नरकवासी हैं। आयत संख्या 17 का अर्थ यह है कि सत्य विश्वास (ईमान) के बिना कोई सत्कर्म मान्य नहीं है। इसमें सुखी समाज की विशेषता भी बताई गई है कि दूसरे को सहनशीलता तथा दया का उपदेश दिया जाए और अल्लाह पर सत्य विश्वास रखा जाए। -
ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ١٧
Thumma kana mina allatheena amanoo watawasaw bialssabri watawasaw bialmarhamati
फिर वह उन लोगों में से हो, जो ईमान लाए और एक-दूसरे को धैर्य रखने की सलाह दी और एक-दूसरे को दया करने की सलाह दी।
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أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ١٨
Olaika ashabu almaymanati
यही लोग दाहिने हाथ वाले (सौभाग्यशाली) हैं।
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وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا هُمْ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ١٩
Waallatheena kafaroo biayatina hum ashabu almashamati
और जिन लोगों ने हमारी आयतों का इनकार किया, वही लोग बाएँ हाथ वाले (दुर्भाग्यशाली) हैं।
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عَلَيْهِمْ نَارٌ مُّؤْصَدَةٌۢ٢٠
ʿAlayhim narun musadatun
उनपर (हर ओर से) बंद की हुई आग होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह बलद के नाम का मतलब क्या है?
बलद का मतलब "शहर" है।
सूरह बलद किस पारे में है?
सूरह बलद पारा 30 में है।
सूरह बलद में कितनी आयतें हैं?
सूरह बलद में 20 आयतें हैं।
सूरह बलद मक्की है या मदनी?
सूरह बलद मक्की सूरह है।
सूरह बलद क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 90वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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