سورة الليل
सूरह लैल हिंदी में
रात
- 92
- 21 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ने 595–596
मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें
सूरह लैल (الليل) क़ुरआन की 92वीं सूरह है और इसमें 21 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "रात" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह लैल का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह लैल: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
-
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ١
Waallayli itha yaghsha
रात की क़सम, जब वह छा जाए।
-
وَٱلنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ٢
Waalnnahari itha tajalla
और दिन की क़सम, जब वह रौशन हो जाए!
-
وَمَا خَلَقَ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰٓ٣
Wama khalaqa alththakara waalontha
तथा नर और मादा को पैदा करने की क़सम।
-
إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ٤
Inna saʿyakum lashatta
निःसंदेह तुम्हारे प्रयास विविध हैं।1
टिप्पणियाँ
[1] (1-4) इन आयतों का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार रात-दिन तथा नर-मादा (स्त्री-पुरुष) भिन्न हैं, और उनके लक्षण और प्रभाव भी भिन्न हैं, इसी प्रकार मानवजाति (इनसान) के विश्वास, कर्म भी दो भिन्न प्रकार के हैं। और दोनों के प्रभाव और परिणाम भी विभिन्न हैं। -
فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَٱتَّقَىٰ٥
Faamma man aʿta waittaqa
फिर जिसने (दान) दिया और (अवज्ञा से) बचा।
-
وَصَدَّقَ بِٱلْحُسْنَىٰ٦
Wasaddaqa bialhusna
और सबसे अच्छी बात को सत्य माना।
-
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْيُسْرَىٰ٧
Fasanuyassiruhu lilyusra
तो निश्चय हम उसके लिए भलाई को आसान कर देंगे।
-
وَأَمَّا مَنۢ بَخِلَ وَٱسْتَغْنَىٰ٨
Waamma man bakhila waistaghna
लेकिन वह (व्यक्ति) जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती।
-
وَكَذَّبَ بِٱلْحُسْنَىٰ٩
Wakaththaba bialhusna
और सबसे अच्छी बात को झुठलाया।
-
فَسَنُيَسِّرُهُۥ لِلْعُسْرَىٰ١٠
Fasanuyassiruhu lilʿusra
तो हम उसके लिए कठिनाई (बुराई का मार्ग) आसान कर देंगे।2
टिप्पणियाँ
[2] (5-10) इन आयतों में दोनों भिन्न कर्मों के प्रभाव का वर्णन है कि कोई अपना धन भलाई में लगाता है तथा अल्लाह से डरता है और भलाई को मानता है। सत्य आस्था, स्वभाव और सत्कर्म का पालन करता है। जिसका प्रभाव यह होता है कि अल्लाह उसके लिए सत्कर्मों का मार्ग सरल कर देता है। और उसमें पाप करने तथा स्वार्थ के लिए अवैध धन अर्जन की भावना नहीं रह जाती। ऐसे व्यक्ति के लिए दोनों लोक में सुख है। दूसरा वह होता है जो धन का लोभी, तथा अल्लाह से निश्न्तचिंत होता है और भलाई को नहीं मानता। जिसका प्रभाव यह होता है कि उसका स्वभाव ऐसा बन जाता है कि उसे बुराई का मार्ग सरल लगने लगता है। तथा अपने स्वार्थ और मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रयास करता है। फिर इस बात को इस वाक्य पर समाप्त कर दिया गया है कि धन के लिए वह जान देता है, परंतु वह उसे अपने साथ लेकर नहीं जाएगा। फिर वह उसके किस काम आएगा? -
وَمَا يُغْنِى عَنْهُ مَالُهُۥٓ إِذَا تَرَدَّىٰٓ١١
Wama yughnee ʿanhu maluhu itha taradda
और जब वह (जहन्नम के गड्ढे में) गिरेगा, तो उसका धन उसके किसी काम नहीं आएगा।
-
إِنَّ عَلَيْنَا لَلْهُدَىٰ١٢
Inna ʿalayna lalhuda
निःसंदेह हमारा ही ज़िम्मे मार्ग दिखाना है।
-
وَإِنَّ لَنَا لَلْـَٔاخِرَةَ وَٱلْأُولَىٰ١٣
Wainna lana lalakhirata waaloola
निःसंदेह हमारे ही अधिकार में आख़िरत और दुनिया है।
-
فَأَنذَرْتُكُمْ نَارًا تَلَظَّىٰ١٤
Faanthartukum naran talaththa
अतः मैंने तुम्हें भड़कती आग से सावधान कर दिया है।3
टिप्पणियाँ
[3] (11-14) इन आयतों में मानवजाति (इनसान) को सावधान किया गया है कि अल्लाह का, दया और न्याय के कारण मात्र यह दायित्व था कि सत्य मार्ग दिखा दे। और क़ुरआन द्वारा उसने अपना यह दायित्व पूरा कर दिया। किसी को सत्य मार्ग पर लगा देना उसका दायित्व नहीं है। अब इस सीधी राह को अपनाओगे तो तुम्हारा ही भला होगा। अन्यथा याद रखो कि संसार और परलोक दोनों ही अल्लाह के अधिकार में हैं। न यहाँ कोई तुम्हें बचा सकता है, और न वहाँ कोई तुम्हारा सहायक होगा। -
لَا يَصْلَىٰهَآ إِلَّا ٱلْأَشْقَى١٥
La yaslaha illa alashqa
जिसमें केवल सबसे बड़ा अभागा ही प्रवेश करेगा।
-
ٱلَّذِى كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ١٦
Allathee kaththaba watawalla
जिसने झुठलाया तथा मुँह फेरा।
-
وَسَيُجَنَّبُهَا ٱلْأَتْقَى١٧
Wasayujannabuha alatqa
और उससे उस व्यक्ति को बचा लिया जाएगा, जो सबसे ज़्यादा परहेज़गार है।
-
ٱلَّذِى يُؤْتِى مَالَهُۥ يَتَزَكَّىٰ١٨
Allathee yutee malahu yatazakka
जो अपना धन देता है, ताकि वह पवित्र हो जाए।
-
وَمَا لِأَحَدٍ عِندَهُۥ مِن نِّعْمَةٍ تُجْزَىٰٓ١٩
Wama liahadin ʿindahu min niʿmatin tujza
और उसपर किसी का कोई उपकार नहीं है, जिसका बदला चुकाया जाए।
-
إِلَّا ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِ ٱلْأَعْلَىٰ٢٠
Illa ibtighaa wajhi rabbihi alaʿla
वह तो केवल अपने सर्वोच्च रब का चेहरा चाहता है।
-
وَلَسَوْفَ يَرْضَىٰ٢١
Walasawfa yarda
और निश्चय वह (बंदा) प्रसन्न हो जाएगा।4
टिप्पणियाँ
[4] (15-21) इन आयतों में यह वर्णन किया गया है कि कौन से कुकर्मी नरक में पड़ेंगे और कौन सुकर्मी उससे सुरक्षित रखे जाएँगे। और उन्हें क्या फल मिलेगा। आयत संख्या 10 के बारे में यह बात याद रखने की है कि अल्लाह ने सभी वस्तुओं और कर्मों का अपने नियमानुसार स्वभाविक प्रभाव रखा है। और क़ुरआन इसीलिए सभी कर्मों के स्वभाविक प्रभाव और फल को अल्लाह से जोड़ता है। और यूँ कहता है कि अल्लाह ने उसके लिए बुराई की राह सरल कर दी। कभी कहता है कि उनके दिलों पर मुहर लगा दी, जिसका अर्थ यह होता है कि यह अल्लाह के बनाए हुए नियमों के विरोध का स्वभाविक फल है। (देखिए : उम्मुल किताब, मौलाना आज़ाद)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह लैल के नाम का मतलब क्या है?
लैल का मतलब "रात" है।
सूरह लैल किस पारे में है?
सूरह लैल पारा 30 में है।
सूरह लैल में कितनी आयतें हैं?
सूरह लैल में 21 आयतें हैं।
सूरह लैल मक्की है या मदनी?
सूरह लैल मक्की सूरह है।
सूरह लैल क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 92वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
Found a mistake? Report a mistake and we will check it against the source.