سورة الضحى

सूरह ज़ुहा हिंदी में

चाश्त का वक़्त

मुसहफ़

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सूरह ज़ुहा (الضحى) क़ुरआन की 93वीं सूरह है और इसमें 11 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "चाश्त का वक़्त" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह ज़ुहा का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह ज़ुहा: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. وَٱلضُّحَىٰ۝١

    Waaldduha

    कस़म है धूप चढ़ने के समय की!

  2. وَٱلَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ۝٢

    Waallayli itha saja

    और क़सम है रात की, जब वह छा जाए।

  3. مَا وَدَّعَكَ رَبُّكَ وَمَا قَلَىٰ۝٣

    Ma waddaʿaka rabbuka wama qala

    (ऐ नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और न नाराज़ हुआ।

  4. وَلَلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌ لَّكَ مِنَ ٱلْأُولَىٰ۝٤

    Walalakhiratu khayrun laka mina aloola

    और निश्चित रूप से आख़िरत आपके लिए दुनिया से बेहतर है।

  5. وَلَسَوْفَ يُعْطِيكَ رَبُّكَ فَتَرْضَىٰٓ۝٥

    Walasawfa yuʿteeka rabbuka fatarda

    और निश्चय तेरा पालनहार तुझे प्रदान करेगा, तो तू प्रसन्न हो जाएगा।

  6. أَلَمْ يَجِدْكَ يَتِيمًا فَـَٔاوَىٰ۝٦

    Alam yajidka yateeman faawa

    क्या उसने आपको अनाथ पाकर शरण नहीं दी?

  7. وَوَجَدَكَ ضَآلًّا فَهَدَىٰ۝٧

    Wawajadaka dallan fahada

    और आपको मार्ग से अनभिज्ञ पाया, तो सीधा मार्ग दिखाया।

  8. وَوَجَدَكَ عَآئِلًا فَأَغْنَىٰ۝٨

    Wawajadaka ʿailan faaghna

    और उसने आपको निर्धन पाया, तो संपन्न कर दिया।

  9. فَأَمَّا ٱلْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ۝٩

    Faamma alyateema fala taqhar

    अतः आप अनाथ पर कठोरता न दिखाएँ।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-9) इन आयतों में अल्लाह ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से फरमाया है कि तुम्हें यह चिंता कैसे हो गई है कि हम अप्रसन्न हो गए? हमने तो तुम्हारे जन्म के दिन से निरंतर तुमपर उपकार किए हैं। तुम अनाथ थे, तो तुम्हारे पालन और रक्षा की व्यवस्था की। राह से अंजान थे, तो राह दिखाई। निर्धन थे, तो धनी बना दिया। ये बातें बता रही हैं कि तुम आरंभ ही से हमारे प्रियवर हो और तुमपर हमारा उपकार निरंतर रहा है।
  10. وَأَمَّا ٱلسَّآئِلَ فَلَا تَنْهَرْ۝١٠

    Waamma alssaila fala tanhar

    और माँगने वाले को न झिड़कें।

  11. وَأَمَّا بِنِعْمَةِ رَبِّكَ فَحَدِّثْ۝١١

    Waamma biniʿmati rabbika fahaddith

    और अपने रब के उपकार का वर्णन करते रहें।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (10-11) इन अंतिम आयतों में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को बताया गया है कि हमने तुमपर जो उपकार किए हैं, उनके बदले में तुम अल्लाह की उत्पत्ति के साथ दया और उपकार करो यही हमारे उपकारों की कृतज्ञता होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह ज़ुहा के नाम का मतलब क्या है?

ज़ुहा का मतलब "चाश्त का वक़्त" है।

सूरह ज़ुहा किस पारे में है?

सूरह ज़ुहा पारा 30 में है।

सूरह ज़ुहा में कितनी आयतें हैं?

सूरह ज़ुहा में 11 आयतें हैं।

सूरह ज़ुहा मक्की है या मदनी?

सूरह ज़ुहा मक्की सूरह है।

सूरह ज़ुहा क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 93वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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