سورة الشمس
सूरह शम्स हिंदी में
सूरज
- 91
- 15 आयतें
- मक्की
- पारा 30
- पन्ना 595
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सूरह शम्स (الشمس) क़ुरआन की 91वीं सूरह है और इसमें 15 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "सूरज" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।
इस पन्ने पर आप सूरह शम्स का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।
मुकम्मल सूरह शम्स: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ
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وَٱلشَّمْسِ وَضُحَىٰهَا١
Waalshshamsi waduhaha
सूरज की क़सम! तथा उसके ऊपर चढ़ने के समय की क़सम!
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وَٱلْقَمَرِ إِذَا تَلَىٰهَا٢
Waalqamari itha talaha
तथा चाँद की (क़सम), जब वह सूरज के पीछे आए।
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وَٱلنَّهَارِ إِذَا جَلَّىٰهَا٣
Waalnnahari itha jallaha
और दिन की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को प्रकट कर दे!
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وَٱلَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰهَا٤
Waallayli itha yaghshaha
और रात की (क़सम), जब वह उस (सूरज) को ढाँप ले।
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وَٱلسَّمَآءِ وَمَا بَنَىٰهَا٥
Waalssamai wama banaha
और आकाश की तथा उसके निर्माण की (क़सम)।
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وَٱلْأَرْضِ وَمَا طَحَىٰهَا٦
Waalardi wama tahaha
और धरती की तथा उसे बिछाने की (क़सम!)1
टिप्पणियाँ
[1] (1-6) इन आयतों का भावार्थ यह है कि जिस प्रकार सूर्य के विपरीत चाँद, तथा दिन के विपरीत रात है, इसी प्रकार पुण्य और पाप तथा इस संसार का प्रति एक दूसरा संसार परलोक भी है। और इन्हीं स्वभाविक लक्ष्यों से परलोक का विश्वास होता है। -
وَنَفْسٍ وَمَا سَوَّىٰهَا٧
Wanafsin wama sawwaha
और आत्मा की तथा उसके ठीक-ठाक बनाने की (क़सम)।
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فَأَلْهَمَهَا فُجُورَهَا وَتَقْوَىٰهَا٨
Faalhamaha fujooraha wataqwaha
फिर उसके दिल में उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी (की समझ) डाल दी।2
टिप्पणियाँ
[2] (7-8) इन आयतों में कहा गया है कि अल्लाह ने इनसान को शारीरिक और बौद्धिक शक्तियाँ देकर बस नहीं किया, बल्कि उसने पाप और पुण्य का स्वभाविक ज्ञान देकर नबियों को भी भेजा। और वह़्य (प्रकाशना) द्वारा पाप और पुण्य के सभी रूप समझा दिए। जिसकी अंतिम कड़ी क़ुरआन, और अंतिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं। -
قَدْ أَفْلَحَ مَن زَكَّىٰهَا٩
Qad aflaha man zakkaha
निश्चय वह सफल हो गया, जिसने उसे पवित्र कर लिया।
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وَقَدْ خَابَ مَن دَسَّىٰهَا١٠
Waqad khaba man dassaha
तथा निश्चय वह विफल हो गया, जिसने उसे (पापों में) दबा दिया।3
टिप्पणियाँ
[3] (9-10) इन दोनों आयतों में यह बताया जा रहा है कि अब भविष्य की सफलता और विफलता इस बात पर निर्भर है कि कौन अपनी स्वभाविक योग्यता का प्रयोग किसके लिए कितना करता है। और इस प्रकाशना : क़ुरआन के आदेशों को कितना मानता और पालन करता है। -
كَذَّبَتْ ثَمُودُ بِطَغْوَىٰهَآ١١
Kaththabat thamoodu bitaghwaha
समूद (की जाति) ने अपनी सरकशी के कारण झुठलाया।
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إِذِ ٱنۢبَعَثَ أَشْقَىٰهَا١٢
Ithi inbaʿatha ashqaha
जब उसका सबसे दुष्ट व्यक्ति उठ खड़ा हुआ।
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فَقَالَ لَهُمْ رَسُولُ ٱللَّهِ نَاقَةَ ٱللَّهِ وَسُقْيَـٰهَا١٣
Faqala lahum rasoolu Allahi naqata Allahi wasuqyaha
तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा : अल्लाह की ऊँटनी और उसके पीने की बारी का ध्यान रखो।
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فَكَذَّبُوهُ فَعَقَرُوهَا فَدَمْدَمَ عَلَيْهِمْ رَبُّهُم بِذَنۢبِهِمْ فَسَوَّىٰهَا١٤
Fakaththaboohu faʿaqarooha fadamdama ʿalayhim rabbuhum bithanbihim fasawwaha
परंतु उन्होंने उसे झुठलाया और उस (ऊँटनी) की कूँचें काट दीं, तो उनके पालनहार ने उनके गुनाह के कारण उन्हें पीस कर विनष्ट कर दिया और उन्हें मटियामेट कर दिया।
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وَلَا يَخَافُ عُقْبَـٰهَا١٥
Wala yakhafu ʿuqbaha
और वह उसके परिणाम से नहीं डरता।4
टिप्पणियाँ
[4] (11-15) इन आयतों में समूद जाति का ऐतिहासिक उदाहरण देकर दूतत्व (रिसालत) का महत्व समझाया गया है कि नबी इस लिए भेजा जाता है कि भलाई और बुराई का जो स्वभाविक ज्ञान अल्लाह ने इनसान के स्वभाव में रख दिया है उसे उभारने में उसकी सहायता करे। ऐसे ही एक नबी जिन का नाम सालेह था समूद की जाति की ओर भेजे गए। परंतु उन्होंने उनको नहीं माना, तो वे ध्वस्त कर दिए गए। उस समय मक्का के मूर्ति पूजकों की स्थिति समूद जाति से मिलती जुलती थी। इसलिए उनको सालेह नबी की कथा सुनाकर सचेत किया जा रहा है कि सावधान! कहीं तुम लोग भी समूद की तरह यातना में न घिर जाओ। वह तो हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की इस प्रार्थना के कारण बच गए कि ऐ अल्लाह! इन्हें नष्ट न कर। क्योंकि इन्हीं में से ऐसे लोग उठेंगे जो तेरे धर्म का प्रचार करेंगे। इसलिए कि अल्लाह ने आप सल्लल्लाहु अलैहि सल्लम को सारे संसारों के लिए दया बना कर भेजा था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सूरह शम्स के नाम का मतलब क्या है?
शम्स का मतलब "सूरज" है।
सूरह शम्स किस पारे में है?
सूरह शम्स पारा 30 में है।
सूरह शम्स में कितनी आयतें हैं?
सूरह शम्स में 15 आयतें हैं।
सूरह शम्स मक्की है या मदनी?
सूरह शम्स मक्की सूरह है।
सूरह शम्स क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?
यह क़ुरआन की 91वीं सूरह है।
स्रोत
- Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
- Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
- Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
- Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
- Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
- Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.
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