سورة النجم

सूरह नज्म हिंदी में

तारा

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह नज्म (النجم) क़ुरआन की 53वीं सूरह है और इसमें 62 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "तारा" है। यह मक्की सूरह है और पारा 27 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह नज्म का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह नज्म: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. وَٱلنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰ۝١

    Waalnnajmi itha hawa

    क़सम है तारे की जब वह गिरे!

  2. مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ۝٢

    Ma dalla sahibukum wama ghawa

    तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।

  3. وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلْهَوَىٰٓ۝٣

    Wama yantiqu ʿani alhawa

    और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।

  4. إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْىٌ يُوحَىٰ۝٤

    In huwa illa wahyun yooha

    वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।

  5. عَلَّمَهُۥ شَدِيدُ ٱلْقُوَىٰ۝٥

    ʿAllamahu shadeedu alquwa

    उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते)1 ने सिखाया है।

    टिप्पणियाँ
    [1] इससे अभिप्राय जिबरील (अलैहिस्सलाम) हैं, जो वह़्य लाते थे।
  6. ذُو مِرَّةٍ فَٱسْتَوَىٰ۝٦

    Thoo mirratin faistawa

    जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।

  7. وَهُوَ بِٱلْأُفُقِ ٱلْأَعْلَىٰ۝٧

    Wahuwa bialofuqi alaʿla

    जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।

  8. ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ۝٨

    Thumma dana fatadalla

    फिर वह निकट हुआ और उतर आया।

  9. فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ۝٩

    Fakana qaba qawsayni aw adna

    फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।

  10. فَأَوْحَىٰٓ إِلَىٰ عَبْدِهِۦ مَآ أَوْحَىٰ۝١٠

    Faawha ila ʿabdihi ma awha

    फिर उसने अल्लाह के बंदे2 की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।

    टिप्पणियाँ
    [2] अर्थात मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर। इन आयतों में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जिबरील (फरिश्ते) को उनके वास्तविक रूप में दो बार देखने का वर्णन है। आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहा : जो कहे कि मुह़म्मद (सल्लल्लहु अलैहि व सल्लम) ने अल्लाह को देखा है, तो वह झूठा है। और जो कहे कि आप कल (भविष्य) की बात जानते थे, तो वह झूठा है। तथा जो कहे कि आप ने धर्म की कुछ बातें छिपा लीं, तो वह झूठा है। किंतु आपने जिबरील (अलैहिस्सलाम) को उनके रूप में दो बार देखा। (बुख़ारी : 4855) इब्ने मसऊद ने कहा कि आपने जिबरील को देखा जिनके छह सौ पंख थे। (बुख़ारी : 4856)
  11. مَا كَذَبَ ٱلْفُؤَادُ مَا رَأَىٰٓ۝١١

    Ma kathaba alfuadu ma raa

    दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।

  12. أَفَتُمَـٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ۝١٢

    Afatumaroonahu ʿala ma yara

    फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

  13. وَلَقَدْ رَءَاهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ۝١٣

    Walaqad raahu nazlatan okhra

    हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

  14. عِندَ سِدْرَةِ ٱلْمُنتَهَىٰ۝١٤

    ʿInda sidrati almuntaha

    सिदरतुल-मुनतहा'3 के पास।

    टिप्पणियाँ
    [3] 'सिदरतुल मुनतहा', यह छठे या सातवें आकाश पर बैरी का एक वृक्ष है। जिस तक धरती की चीज़ पहुँचती है। तथा ऊपर की चीज़ उतरती है। (सह़ीह़ मुस्लिम : 173)
  15. عِندَهَا جَنَّةُ ٱلْمَأْوَىٰٓ۝١٥

    ʿIndaha jannatu almawa

    उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

  16. إِذْ يَغْشَى ٱلسِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ۝١٦

    Ith yaghsha alssidrata ma yaghsha

    जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।4

    टिप्पणियाँ
    [4] ह़दीस में है कि वह सोने के पतिंगे थे। (सह़ीह़ मुस्लिम : 173)
  17. مَا زَاغَ ٱلْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ۝١٧

    Ma zagha albasaru wama tagha

    न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

  18. لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ ءَايَـٰتِ رَبِّهِ ٱلْكُبْرَىٰٓ۝١٨

    Laqad raa min ayati rabbihi alkubra

    निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ5 देखीं।

    टिप्पणियाँ
    [5] इसमें मे'राज की रात आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आकाशों में अल्लाह की निशानियाँ देखने का वर्णन है।
  19. أَفَرَءَيْتُمُ ٱللَّـٰتَ وَٱلْعُزَّىٰ۝١٩

    Afaraaytumu allata waalʿuzza

    फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।

  20. وَمَنَوٰةَ ٱلثَّالِثَةَ ٱلْأُخْرَىٰٓ۝٢٠

    Wamanata alththalithata alokhra

    तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?6

    टिप्पणियाँ
    [6] लात, उज़्ज़ा और मनात ये तीनों मक्का के मुश्रिकों की देवियों के नाम हैं। और अर्थ यह है कि क्या इनकी भी कोई वास्तविकता है?
  21. أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلْأُنثَىٰ۝٢١

    Alakumu alththakaru walahu alontha

    क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?

  22. تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰٓ۝٢٢

    Tilka ithan qismatun deeza

    तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।

  23. إِنْ هِىَ إِلَّآ أَسْمَآءٌ سَمَّيْتُمُوهَآ أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَـٰنٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهْوَى ٱلْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلْهُدَىٰٓ۝٢٣

    In hiya illa asmaon sammaytumooha antum waabaokum ma anzala Allahu biha min sultanin in yattabiʿoona illa alththanna wama tahwa alanfusu walaqad jaahum min rabbihimu alhuda

    ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल7 के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।

    टिप्पणियाँ
    [7] मुश्रिक अपनी मूर्तियों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहकर उनकी पूजा करते थे, जिसका यहाँ खंडन किया जा रहा है।
  24. أَمْ لِلْإِنسَـٰنِ مَا تَمَنَّىٰ۝٢٤

    Am lilinsani ma tamanna

    क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?

  25. فَلِلَّهِ ٱلْـَٔاخِرَةُ وَٱلْأُولَىٰ۝٢٥

    Falillahi alakhiratu waaloola

    (नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।

  26. ۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ لَا تُغْنِى شَفَـٰعَتُهُمْ شَيْـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعْدِ أَن يَأْذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرْضَىٰٓ۝٢٦

    Wakam min malakin fee alssamawati la tughnee shafaʿatuhum shayan illa min baʿdi an yathana Allahu liman yashao wayarda

    और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।8

    टिप्पणियाँ
    [8] अरब के मुश्रिक यह समझते थे कि यदि हम फ़रिश्तों की पूजा करेंगे, तो वे अल्लाह से सिफ़ारिश करके हमें यातना से मुक्त करा देंगे। इसी का खंडन यहाँ किया जा रहा है।
  27. إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ لَيُسَمُّونَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ تَسْمِيَةَ ٱلْأُنثَىٰ۝٢٧

    Inna allatheena la yuminoona bialakhirati layusammoona almalaikata tasmiyata alontha

    निःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।

  28. وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ ۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغْنِى مِنَ ٱلْحَقِّ شَيْـًٔا۝٢٨

    Wama lahum bihi min ʿilmin in yattabiʿoona illa alththanna wainna alththanna la yughnee mina alhaqqi shayan

    हालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।

  29. فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا۝٢٩

    Faaʿrid ʿan man tawalla ʿan thikrina walam yurid illa alhayata alddunya

    अतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।

  30. ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ ٱلْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱهْتَدَىٰ۝٣٠

    Thalika mablaghuhum mina alʿilmi inna rabbaka huwa aʿlamu biman dalla ʿan sabeelihi wahuwa aʿlamu bimani ihtada

    यही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।

  31. وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ لِيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَسَـٰٓـُٔوا۟ بِمَا عَمِلُوا۟ وَيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَحْسَنُوا۟ بِٱلْحُسْنَى۝٣١

    Walillahi ma fee alssamawati wama fee alardi liyajziya allatheena asaoo bima ʿamiloo wayajziya allatheena ahsanoo bialhusna

    तथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।

  32. ٱلَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَـٰٓئِرَ ٱلْإِثْمِ وَٱلْفَوَٰحِشَ إِلَّا ٱللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَٰسِعُ ٱلْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِى بُطُونِ أُمَّهَـٰتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱتَّقَىٰٓ۝٣٢

    Allatheena yajtaniboona kabaira alithmi waalfawahisha illa allamama inna rabbaka wasiʿu almaghfirati huwa aʿlamu bikum ith anshaakum mina alardi waith antum ajinnatun fee butooni ommahatikum fala tuzakkoo anfusakum huwa aʿlamu bimani ittaqa

    वे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों9 से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती10 से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।

    टिप्पणियाँ
    [9] इससे अभिप्राय अश्लीलता पर आधारित कुकर्म हैं। जैसे बाल-मैथुन, व्यभिचार, नारियों का अपने सौंदर्य का प्रदर्शन और पर्दे का त्याग, मिश्रित शिक्षा, मिश्रित सभाएँ, सौंदर्य की प्रतियोगिता आदि। जिसे आधुनिक युग में सभ्यता का नाम दिया जाता है। और मुस्लिम समाज भी इससे प्रभावित हो रहा है। ह़दीस में है कि सात विनाशकारी कर्मों से बचो : 1- अल्लाह का साझी बनाने से। 2- जादू करना। 3- अकारण जान मारना। 4- मदिरा पीना। 5- अनाथ का धन खाना। 6- युद्ध के दिन भागना। 7- तथा भोली-भाली पवित्र स्त्री को कलंक लगाना। (सह़ीह़ बुख़ारी : 2766, मुस्लिम : 89) [10] अर्थात तुम्हारे मूल आदम (अलैहिस्सलाम) को।
  33. أَفَرَءَيْتَ ٱلَّذِى تَوَلَّىٰ۝٣٣

    Afaraayta allathee tawalla

    फिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?

  34. وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰٓ۝٣٤

    Waaʿta qaleelan waakda

    और थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।

  35. أَعِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰٓ۝٣٥

    aʿindahu ʿilmu alghaybi fahuwa yara

    क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।11

    टिप्पणियाँ
    [11] इस आयत में जो परंपरागत धर्म को मोक्ष का साधन समझता है उससे कहा जा रहा है कि क्या वह जानता है कि प्रलय के दिन इतने ही से सफल हो जाएगा? जबकि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वह़्य के आधार पर जो प्रस्तुत कर रहे हैं, वही सत्य है। और अल्लाह की वह़्य ही परोक्ष के ज्ञान का साधन है।
  36. أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِى صُحُفِ مُوسَىٰ۝٣٦

    Am lam yunabba bima fee suhufi moosa

    या उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?

  37. وَإِبْرَٰهِيمَ ٱلَّذِى وَفَّىٰٓ۝٣٧

    Waibraheema allathee waffa

    और इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।

  38. أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ۝٣٨

    Alla taziru waziratun wizra okhra

    कि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।

  39. وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَـٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ۝٣٩

    Waan laysa lilinsani illa ma saʿa

    और यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।

  40. وَأَنَّ سَعْيَهُۥ سَوْفَ يُرَىٰ۝٤٠

    Waanna saʿyahu sawfa yura

    और यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।

  41. ثُمَّ يُجْزَىٰهُ ٱلْجَزَآءَ ٱلْأَوْفَىٰ۝٤١

    Thumma yujzahu aljazaa alawfa

    फिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।

  42. وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلْمُنتَهَىٰ۝٤٢

    Waanna ila rabbika almuntaha

    और यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।

  43. وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضْحَكَ وَأَبْكَىٰ۝٤٣

    Waannahu huwa adhaka waabka

    तथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।

  44. وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحْيَا۝٤٤

    Waannahu huwa amata waahya

    तथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।

  45. وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰ۝٤٥

    Waannahu khalaqa alzzawjayni alththakara waalontha

    और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।

  46. مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ۝٤٦

    Min nutfatin itha tumna

    एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।

  47. وَأَنَّ عَلَيْهِ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُخْرَىٰ۝٤٧

    Waanna ʿalayhi alnnashata alokhra

    और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार12 पैदा करना है।

    टिप्पणियाँ
    [12] अर्थात प्रलय के दिन प्रतिफल प्रदान करने के लिए।
  48. وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ۝٤٨

    Waannahu huwa aghna waaqna

    और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।

  49. وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعْرَىٰ۝٤٩

    Waannahu huwa rabbu alshshiʿra

    और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा''13 का रब है।

    टिप्पणियाँ
    [13] शे'रा एक तारे का नाम है। जिसकी पूजा कुछ अरब के लोग किया करते थे। (इब्ने कसीर) अर्थ यह है कि यह तारा पूज्य नहीं, वास्तविक पूज्य उसका स्वामी अल्लाह है।
  50. وَأَنَّهُۥٓ أَهْلَكَ عَادًا ٱلْأُولَىٰ۝٥٠

    Waannahu ahlaka ʿadan aloola

    और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद'14 को विनष्ट किया।

    टिप्पणियाँ
    [14] यह हूद (अलैहिस्सलाम) की जाति थे।
  51. وَثَمُودَا۟ فَمَآ أَبْقَىٰ۝٥١

    Wathamooda fama abqa

    तथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।

  52. وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ هُمْ أَظْلَمَ وَأَطْغَىٰ۝٥٢

    Waqawma noohin min qablu innahum kanoo hum athlama waatgha

    तथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।

  53. وَٱلْمُؤْتَفِكَةَ أَهْوَىٰ۝٥٣

    Waalmutafikata ahwa

    और उलट जाने वाली बस्ती15 को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।

    टिप्पणियाँ
    [15] अर्थात लूत अलैहिस्सलमा की जाति कि बस्तियों को।
  54. فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰ۝٥٤

    Faghashshaha ma ghashsha

    तो ढाँप दिया16 उसे जिस चीज़ से ढाँपा।

    टिप्पणियाँ
    [16] अर्थात पत्थरों की वर्षा करके उससे उनकी बस्ती को ढाँप दिया।
  55. فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ۝٥٥

    Fabiayyi alai rabbika tatamara

    तो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?

  56. هَـٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلْأُولَىٰٓ۝٥٦

    Hatha natheerun mina alnnuthuri aloola

    यह17 पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।

    टिप्पणियाँ
    [17] अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) भी एक रसूल हैं प्रथम रसूलों के समान।
  57. أَزِفَتِ ٱلْـَٔازِفَةُ۝٥٧

    Azifati alazifatu

    निकट आने वाली निकट आ गई।

  58. لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌ۝٥٨

    Laysa laha min dooni Allahi kashifatun

    जिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।

  59. أَفَمِنْ هَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ تَعْجَبُونَ۝٥٩

    Afamin hatha alhadeethi taʿjaboona

    तो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?

  60. وَتَضْحَكُونَ وَلَا تَبْكُونَ۝٦٠

    Watadhakoona wala tabkoona

    तथा हँसते हो और रोते नहीं हो?

  61. وَأَنتُمْ سَـٰمِدُونَ۝٦١

    Waantum samidoona

    तथा तुम ग़ाफ़िल हो!

  62. فَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ وَٱعْبُدُوا۟ ۩۝٦٢

    Faosjudoo lillahi waoʿbudoo

    अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत18 करो।

    टिप्पणियाँ
    [18] ह़दीस में है कि जब सजदे की प्रथम सूरत "नज्म" उतरी, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और जो आपके पास थे, सब ने सजदा किया, एक व्यक्ति के सिवा। उसने कुछ धूल ली, और उसपर सज्दा किया। तो मैंने इसके पश्चात् देखा कि वह काफ़िर रहते हुए मारा गया। और वह उमय्या बिन ख़लफ़ है। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4863)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह नज्म के नाम का मतलब क्या है?

नज्म का मतलब "तारा" है।

सूरह नज्म किस पारे में है?

सूरह नज्म पारा 27 में है।

सूरह नज्म में कितनी आयतें हैं?

सूरह नज्म में 62 आयतें हैं।

सूरह नज्म मक्की है या मदनी?

सूरह नज्म मक्की सूरह है।

सूरह नज्म क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 53वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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