سورة العصر

सूरह अस्र हिंदी में

ज़माना

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह अस्र (العصر) क़ुरआन की 103वीं सूरह है और इसमें 3 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "ज़माना" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह अस्र का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह अस्र: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. وَٱلْعَصْرِ۝١

    Waalʿasri

    अस्र के समय की क़सम!

  2. إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَفِى خُسْرٍ۝٢

    Inna alinsana lafee khusrin

    निःसंदेह इनसान घाटे में है।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-2) 'अस्र' का अर्थ निचोड़ना है। युग तथा संध्या के समय के भाग के लिए भी इसका प्रयोग होता है। और यहाँ इसका अर्थ युग और दिन का अंतिम समय दोनों लिया जा सकता है। इस युग की गवाही इस बात पर पेश की गई है कि इनसान जब तक ईमान (सत्य विश्वास) के गुणों को नहीं अपनाता, विनाश से सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए कि इनसान के पास सबसे मूल्यवान पूँजी समय है, जो तेज़ी से गुज़रता है। इसलिए यदि वह परलोक का सामान न करे, तो अवश्य क्षति में पड़ जाएगा।
  3. إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْحَقِّ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ۝٣

    Illa allatheena amanoo waʿamiloo alssalihati watawasaw bialhaqqi watawasaw bialssabri

    सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए और एक-दूसरे को सत्य की ताकीद की और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की।2

    टिप्पणियाँ
    [2] इसका अर्थ यह है कि परलोक की क्षति से बचने के लिए मात्र ईमान ही पर बस नहीं, इसके लिए सदाचार भी आवश्यक है और उसमें से विशेष रूप से सत्य और सहनशीलता और दूसरों को इनकी शिक्षा देते रहना भी आवश्यक है। (तर्जुमानुल क़ुरआन, मौलाना आज़ाद)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह अस्र के नाम का मतलब क्या है?

अस्र का मतलब "ज़माना" है।

सूरह अस्र किस पारे में है?

सूरह अस्र पारा 30 में है।

सूरह अस्र में कितनी आयतें हैं?

सूरह अस्र में 3 आयतें हैं।

सूरह अस्र मक्की है या मदनी?

सूरह अस्र मक्की सूरह है।

सूरह अस्र क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 103वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

Found a mistake? Report a mistake and we will check it against the source.

पढ़ने की सेटिंग्स

क़ुरआन का फ़ॉन्ट
अरबी का साइज़
100%
तर्जुमे का साइज़
100%
थीम