سورة القلم

सूरह क़लम हिंदी में

क़लम

मुसहफ़

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सूरह क़लम (القلم) क़ुरआन की 68वीं सूरह है और इसमें 52 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "क़लम" है। यह मक्की सूरह है और पारा 29 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह क़लम का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह क़लम: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. نٓ ۚ وَٱلْقَلَمِ وَمَا يَسْطُرُونَ۝١

    Noon waalqalami wama yasturoona

    नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी1 जो वे लिखते हैं।

    टिप्पणियाँ
    [1] अर्थात क़ुरआन की। जिसे उतरने के साथ ही नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) लेखकों से लिखवाते थे। जैसे ही कोई सूरत या आयत उतरती, लेखक क़लम तथा चमड़ों और झिल्लियों के साथ उपस्थित हो जाते थे, ताकि पूरे संसार के मनुष्यों को क़ुरआन अपने वास्तविक रूप में पहुँच सके। और सदा के लिए सुरक्षित हो जाए। क्योंकि अब आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पश्चात् कोई नबी और कोई पुस्तक नहीं आएगी। और प्रलय तक के लिए अब पूरे संसार के नबी आप ही हैं। और उनके मार्गदर्शन के लिए क़ुरआन ही एकमात्र धर्म पुस्तक है। इसी लिए इसे सुरक्षित कर दिया गया है। और यह विशेषता किसी भी आकाशीय ग्रंथ को प्राप्त नहीं है। इस लिए अब मोक्ष के लिए अंतिम नबी तथा अंतिम धर्म ग्रंथ क़ुरआन पर ईमान लाना अनिवार्य है।
  2. مَآ أَنتَ بِنِعْمَةِ رَبِّكَ بِمَجْنُونٍ۝٢

    Ma anta biniʿmati rabbika bimajnoonin

    आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।

  3. وَإِنَّ لَكَ لَأَجْرًا غَيْرَ مَمْنُونٍ۝٣

    Wainna laka laajran ghayra mamnoonin

    तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।

  4. وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٍ۝٤

    Wainnaka laʿala khuluqin ʿatheemin

    तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।

  5. فَسَتُبْصِرُ وَيُبْصِرُونَ۝٥

    Fasatubsiru wayubsiroona

    अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।

  6. بِأَييِّكُمُ ٱلْمَفْتُونُ۝٦

    Biayyikumu almaftoonu

    कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।

  7. إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِٱلْمُهْتَدِينَ۝٧

    Inna rabbaka huwa aʿlamu biman dalla ʿan sabeelihi wahuwa aʿlamu bialmuhtadeena

    निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।

  8. فَلَا تُطِعِ ٱلْمُكَذِّبِينَ۝٨

    Fala tutiʿi almukaththibeena

    अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।

  9. وَدُّوا۟ لَوْ تُدْهِنُ فَيُدْهِنُونَ۝٩

    Waddoo law tudhinu fayudhinoona

    वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी2 करें।

    टिप्पणियाँ
    [2] जब काफ़िर, इस्लाम के प्रभाव को रोकने में असफल हो गए, तो आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को धमकी और लालच देने के पश्चात्, कुछ लो और कुछ दो की नीति पर आ गए। इस लिए कहा गया कि आप उनकी बातों में न आएँ और परिणाम की प्रतीक्षा करें।
  10. وَلَا تُطِعْ كُلَّ حَلَّافٍ مَّهِينٍ۝١٠

    Wala tutiʿ kulla hallafin maheenin

    और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।3

    टिप्पणियाँ
    [3] इन आयतों में किसी विशेष काफ़िर की दशा का वर्णन नहीं, बल्कि काफ़िरों के प्रमुखों के नैतिक पतन तथा कुविचारों और दुराचारों को बताया गया है, जो लोगों को इस्लाम के विरुद्ध उकसा रहे थे। तो फिर क्या इनकी बात मानी जा सकती है?
  11. هَمَّازٍ مَّشَّآءٍۭ بِنَمِيمٍ۝١١

    Hammazin mashshain binameemin

    जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।

  12. مَّنَّاعٍ لِّلْخَيْرِ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ۝١٢

    Mannaʿin lilkhayri muʿtadin atheemin

    भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।

  13. عُتُلٍّۭ بَعْدَ ذَٰلِكَ زَنِيمٍ۝١٣

    ʿUtullin baʿda thalika zaneemin

    क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।

  14. أَن كَانَ ذَا مَالٍ وَبَنِينَ۝١٤

    An kana tha malin wabaneena

    इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।

  15. إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَـٰتُنَا قَالَ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ۝١٥

    Itha tutla ʿalayhi ayatuna qala asateeru alawwaleena

    जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।

  16. سَنَسِمُهُۥ عَلَى ٱلْخُرْطُومِ۝١٦

    Sanasimuhu ʿala alkhurtoomi

    शीघ्र ही हम उसकी थूथन4 पर दाग़ लगाएँगे।

    टिप्पणियाँ
    [4] अर्थात नाक पर जिसे वह घमंड से ऊँची रखना चाहता है। और दाग़ लगाने का अर्थ अपमानित करना है।
  17. إِنَّا بَلَوْنَـٰهُمْ كَمَا بَلَوْنَآ أَصْحَـٰبَ ٱلْجَنَّةِ إِذْ أَقْسَمُوا۟ لَيَصْرِمُنَّهَا مُصْبِحِينَ۝١٧

    Inna balawnahum kama balawna ashaba aljannati ith aqsamoo layasrimunnaha musbiheena

    निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला5 है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।

    टिप्पणियाँ
    [5] अर्थात मक्का वालों को। इस लिए यदि वे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाएँगे, तो उनपर सफलता की राह खुलेगी। अन्यथा संसार और परलोक दोनों की यातना के भागी होंगे।
  18. وَلَا يَسْتَثْنُونَ۝١٨

    Wala yastathnoona

    और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।

  19. فَطَافَ عَلَيْهَا طَآئِفٌ مِّن رَّبِّكَ وَهُمْ نَآئِمُونَ۝١٩

    Fatafa ʿalayha taifun min rabbika wahum naimoona

    तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।

  20. فَأَصْبَحَتْ كَٱلصَّرِيمِ۝٢٠

    Faasbahat kaalssareemi

    तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।

  21. فَتَنَادَوْا۟ مُصْبِحِينَ۝٢١

    Fatanadaw musbiheena

    फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :

  22. أَنِ ٱغْدُوا۟ عَلَىٰ حَرْثِكُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰرِمِينَ۝٢٢

    Ani ighdoo ʿala harthikum in kuntum sarimeena

    कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।

  23. فَٱنطَلَقُوا۟ وَهُمْ يَتَخَـٰفَتُونَ۝٢٣

    Faintalaqoo wahum yatakhafatoona

    चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।

  24. أَن لَّا يَدْخُلَنَّهَا ٱلْيَوْمَ عَلَيْكُم مِّسْكِينٌ۝٢٤

    An la yadkhulannaha alyawma ʿalaykum miskeenun

    कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन6 हरगिज़ न आने पाए।

    टिप्पणियाँ
    [6] ताकि उन्हें कुछ दान न करना पड़े।
  25. وَغَدَوْا۟ عَلَىٰ حَرْدٍ قَـٰدِرِينَ۝٢٥

    Waghadaw ʿala hardin qadireena

    और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।

  26. فَلَمَّا رَأَوْهَا قَالُوٓا۟ إِنَّا لَضَآلُّونَ۝٢٦

    Falamma raawha qaloo inna ladalloona

    फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।

  27. بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ۝٢٧

    Bal nahnu mahroomoona

    बल्कि हम वंचित7 कर दिए गए हैं।

    टिप्पणियाँ
    [7] पहले तो सोचा कि राह भूल गए हैं। किंतु फिर देखा कि बाग़ तो उन्हीं का है तो कहा कि यह तो ऐसा उजाड़ हो गया है कि अब कुछ तोड़ने के लिए रह ही नहीं गया है। वास्तव में, यह हमारा दुर्भाग्य है।
  28. قَالَ أَوْسَطُهُمْ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ لَوْلَا تُسَبِّحُونَ۝٢٨

    Qala awsatuhum alam aqul lakum lawla tusabbihoona

    उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?

  29. قَالُوا۟ سُبْحَـٰنَ رَبِّنَآ إِنَّا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ۝٢٩

    Qaloo subhana rabbina inna kunna thalimeena

    उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।

  30. فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَلَـٰوَمُونَ۝٣٠

    Faaqbala baʿduhum ʿala baʿdin yatalawamoona

    फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।

  31. قَالُوا۟ يَـٰوَيْلَنَآ إِنَّا كُنَّا طَـٰغِينَ۝٣١

    Qaloo ya waylana inna kunna tagheena

    उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।

  32. عَسَىٰ رَبُّنَآ أَن يُبْدِلَنَا خَيْرًا مِّنْهَآ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا رَٰغِبُونَ۝٣٢

    ʿAsa rabbuna an yubdilana khayran minha inna ila rabbina raghiboona

    आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।

  33. كَذَٰلِكَ ٱلْعَذَابُ ۖ وَلَعَذَابُ ٱلْـَٔاخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا۟ يَعْلَمُونَ۝٣٣

    Kathalika alʿathabu walaʿathabu alakhirati akbaru law kanoo yaʿlamoona

    इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!

  34. إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ۝٣٤

    Inna lilmuttaqeena ʿinda rabbihim jannati alnnaʿeemi

    निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।

  35. أَفَنَجْعَلُ ٱلْمُسْلِمِينَ كَٱلْمُجْرِمِينَ۝٣٥

    Afanajʿalu almuslimeena kaalmujrimeena

    तो क्या हम आज्ञाकारियों8 को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?

    टिप्पणियाँ
    [8] मक्का के प्रमुख कहते थे कि यदि प्रलय हुई, तो वहाँ भी हमें यही सांसारिक सुख-सुविधा प्राप्त होगी। जिसका इस आयत में खंडन किया जा रहा है। अभिप्राय यह है कि अल्लाह के यहाँ देर है, परंतु अँधेर नहीं है।
  36. مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ۝٣٦

    Ma lakum kayfa tahkumoona

    तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?

  37. أَمْ لَكُمْ كِتَـٰبٌ فِيهِ تَدْرُسُونَ۝٣٧

    Am lakum kitabun feehi tadrusoona

    क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?

  38. إِنَّ لَكُمْ فِيهِ لَمَا تَخَيَّرُونَ۝٣٨

    Inna lakum feehi lama takhayyaroona

    (कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?

  39. أَمْ لَكُمْ أَيْمَـٰنٌ عَلَيْنَا بَـٰلِغَةٌ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۙ إِنَّ لَكُمْ لَمَا تَحْكُمُونَ۝٣٩

    Am lakum aymanun ʿalayna balighatun ila yawmi alqiyamati inna lakum lama tahkumoona

    या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?

  40. سَلْهُمْ أَيُّهُم بِذَٰلِكَ زَعِيمٌ۝٤٠

    Salhum ayyuhum bithalika zaʿeemun

    आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?

  41. أَمْ لَهُمْ شُرَكَآءُ فَلْيَأْتُوا۟ بِشُرَكَآئِهِمْ إِن كَانُوا۟ صَـٰدِقِينَ۝٤١

    Am lahum shurakao falyatoo bishurakaihim in kanoo sadiqeena

    क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ9, यदि वे सच्चे हैं।

    टिप्पणियाँ
    [9] ताकि वे उन्हें अच्छा स्थान दिला दें।
  42. يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍ وَيُدْعَوْنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ۝٤٢

    Yawma yukshafu ʿan saqin wayudʿawna ila alssujoodi fala yastateeʿoona

    जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।10

    टिप्पणियाँ
    [10] ह़दीस में है कि प्रलय के दिन अल्लाह अपनी पिंडली खोलेगा, तो प्रत्येक मोमिन पुरुष तथा स्त्री सजदे में गिर जाएँगे। हाँ, वे शेष रह जाएँगे जो दिखावे और नाम के लिये (संसार में) सजदे किया करते थे। वह सजदा करना चाहेंगे, परंतु उनकी रीढ़ की हड्डी तख्त के समान बन जाएगी। जिसके कारण उनके लिए सजदा करना असंभव हो जाएगा। (बुख़ारी : 4919)
  43. خَـٰشِعَةً أَبْصَـٰرُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ وَقَدْ كَانُوا۟ يُدْعَوْنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ وَهُمْ سَـٰلِمُونَ۝٤٣

    Khashiʿatan absaruhum tarhaquhum thillatun waqad kanoo yudʿawna ila alssujoodi wahum salimoona

    उनकी आँखें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। हालाँकि उन्हें (संसार में) सजदे की ओर बुलाया जाता था, जबकि वे भले-चंगे थे।

  44. فَذَرْنِى وَمَن يُكَذِّبُ بِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ۝٤٤

    Fatharnee waman yukaththibu bihatha alhadeethi sanastadrijuhum min haythu la yaʿlamoona

    अतः आप मुझे तथा उसको छोड़ दें, जो इस वाणी (क़ुरआन) को झुठलाता है। हम उन्हें धीरे-धीरे (यातना की ओर) इस प्रकार ले जाएँगे11 कि वे जान भी न सकेंगे।

    टिप्पणियाँ
    [11] अर्थात उनके बुरे परिणाम की ओर।
  45. وَأُمْلِى لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِى مَتِينٌ۝٤٥

    Waomlee lahum inna kaydee mateenun

    और मैं उन्हें मोहलत (अवकाश) दूँगा।12 निश्चय मेरा उपाय बड़ा मज़बूत है।

    टिप्पणियाँ
    [12] अर्थात् सांसारिक सुख-सुविधा प्रदान करूँगा ताकि वे और अधिक लापरवाह हो जाएँ। फिर अंततः वे यातना से ग्रस्त हो जाएँगे।
  46. أَمْ تَسْـَٔلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ۝٤٦

    Am tasaluhum ajran fahum min maghramin muthqaloona

    क्या आप उनसे कोई पारिश्रमिक13 माँगते हैं कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे हैं?

    टिप्पणियाँ
    [13] अर्थात धर्म के प्रचार पर।
  47. أَمْ عِندَهُمُ ٱلْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ۝٤٧

    Am ʿindahumu alghaybu fahum yaktuboona

    अथवा उनके पास परोक्ष (का ज्ञान) है, तो वे लिख14 रहे हैं?

    टिप्पणियाँ
    [14] या ''लौह़े मह़फ़ूज़'' (सुरक्षित पुस्तक) उनके अधिकार में है इस लिए आपका आज्ञा पालन नहीं करते और उसी से ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं?
  48. فَٱصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ ٱلْحُوتِ إِذْ نَادَىٰ وَهُوَ مَكْظُومٌ۝٤٨

    Faisbir lihukmi rabbika wala takun kasahibi alhooti ith nada wahuwa makthoomun

    अतः अपने पालनहार के निर्णय तक धैर्य रखें और मछली वाले के समान15 न हो जाएँ, जब उसने (अल्लाह को) पुकारा, इस हाल में कि वह शोक से भरा हुआ था।

    टिप्पणियाँ
    [15] इससे अभिप्राय यूनुस (अलैहिस्सलाम) हैं, जिनको मछली ने निगल लिया था। (देखिए : सूरतुस-साफ़्फ़ात, आयत : 139)
  49. لَّوْلَآ أَن تَدَٰرَكَهُۥ نِعْمَةٌ مِّن رَّبِّهِۦ لَنُبِذَ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ مَذْمُومٌ۝٤٩

    Lawla an tadarakahu niʿmatun min rabbihi lanubitha bialʿarai wahuwa mathmoomun

    और यदि उसके पालनहार की अनुकंपा ने उसे संभाल न लिया होता, तो निश्चय वह चटियल मैदान में इस दशा में फेंक दिया जाता कि वह निंदित होता।

  50. فَٱجْتَبَـٰهُ رَبُّهُۥ فَجَعَلَهُۥ مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ۝٥٠

    Faijtabahu rabbuhu fajaʿalahu mina alssaliheena

    फिर उसके पालनहार ने उसे चुन लिया और उसे सदाचारियों में से बना दिया।

  51. وَإِن يَكَادُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَيُزْلِقُونَكَ بِأَبْصَـٰرِهِمْ لَمَّا سَمِعُوا۟ ٱلذِّكْرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُۥ لَمَجْنُونٌ۝٥١

    Wain yakadu allatheena kafaroo layuzliqoonaka biabsarihim lamma samiʿoo alththikra wayaqooloona innahu lamajnoonun

    और वे लोग जिन्होंने इनकार किया, निश्चय क़रीब हैं कि वे अपनी निगाहों से (घूर घूरकर) आपको अवश्य ही फिसला देंगे, जब वे क़ुरआन को सुनते हैं और कहते हैं कि यह अवश्य ही दीवाना है।

  52. وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَـٰلَمِينَ۝٥٢

    Wama huwa illa thikrun lilʿalameena

    हालाँकि वह सर्व संसार के लिए मात्र एक उपदेश16 है।

    टिप्पणियाँ
    [16] इसमें यह बताया गया है कि क़ुरआन केवल अरबों के लिए नहीं, संसार के सभी देशों और जातियों की शिक्षा के लिए उतरा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह क़लम के नाम का मतलब क्या है?

क़लम का मतलब "क़लम" है।

सूरह क़लम किस पारे में है?

सूरह क़लम पारा 29 में है।

सूरह क़लम में कितनी आयतें हैं?

सूरह क़लम में 52 आयतें हैं।

सूरह क़लम मक्की है या मदनी?

सूरह क़लम मक्की सूरह है।

सूरह क़लम क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 68वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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