سورة المعارج

सूरह मआरिज हिंदी में

चढ़ने की सीढ़ियाँ

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह मआरिज (المعارج) क़ुरआन की 70वीं सूरह है और इसमें 44 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "चढ़ने की सीढ़ियाँ" है। यह मक्की सूरह है और पारा 29 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह मआरिज का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह मआरिज: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. سَأَلَ سَآئِلٌۢ بِعَذَابٍ وَاقِعٍ۝١

    Saala sailun biʿathabin waqiʿin

    एक माँगने वाले1 ने वह यातना माँगी, जो घटित होने वाली है।

    टिप्पणियाँ
    [1] कहा जाता है नज़्र पुत्र ह़ारिस अथवा अबू जह्ल ने यह माँग की थी कि "ऐ अल्लाह! यदि यह सत्य है तेरी ओर से तो तू हमपर आकाश से पत्थर बरसा दे।" (देखिए : सूरतुल-अन्फाल, आयतः 32)
  2. لِّلْكَـٰفِرِينَ لَيْسَ لَهُۥ دَافِعٌ۝٢

    Lilkafireena laysa lahu dafiʿun

    काफ़िरों पर। उसे कोई टालने वाला नहीं।

  3. مِّنَ ٱللَّهِ ذِى ٱلْمَعَارِجِ۝٣

    Mina Allahi thee almaʿariji

    ऊँचाइयों वाले अल्लाह की ओर से।

  4. تَعْرُجُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ إِلَيْهِ فِى يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُۥ خَمْسِينَ أَلْفَ سَنَةٍ۝٤

    Taʿruju almalaikatu waalrroohu ilayhi fee yawmin kana miqdaruhu khamseena alfa sanatin

    फ़रिश्ते और रूह2 उसकी ओर चढ़ेंगे, एक ऐसे दिन में जिसकी मात्रा पचास हज़ार वर्ष है।

    टिप्पणियाँ
    [2] रूह़ से अभिप्राय फ़रिश्ता जिबरील (अलैहिस्सलाम) हैं।
  5. فَٱصْبِرْ صَبْرًا جَمِيلًا۝٥

    Faisbir sabran jameelan

    अतः (ऐ नबी!) आप अच्छे धैर्य से काम लें।

  6. إِنَّهُمْ يَرَوْنَهُۥ بَعِيدًا۝٦

    Innahum yarawnahu baʿeedan

    निःसंदेह वे उसे दूर समझ रहे हैं।

  7. وَنَرَىٰهُ قَرِيبًا۝٧

    Wanarahu qareeban

    और हम उसे निकट देख रहे हैं।

  8. يَوْمَ تَكُونُ ٱلسَّمَآءُ كَٱلْمُهْلِ۝٨

    Yawma takoonu alssamao kaalmuhli

    जिस दिन आकाश पिघली हुई धातु के समान हो जाएगा।

  9. وَتَكُونُ ٱلْجِبَالُ كَٱلْعِهْنِ۝٩

    Watakoonu aljibalu kaalʿihni

    और पर्वत धुने हुए ऊन के समान हो जाएँगे।3

    टिप्पणियाँ
    [3] देखिए : सूरतुल-क़ारिआ।
  10. وَلَا يَسْـَٔلُ حَمِيمٌ حَمِيمًا۝١٠

    Wala yasalu hameemun hameeman

    और कोई मित्र किसी मित्र को नहीं पूछेगा।

  11. يُبَصَّرُونَهُمْ ۚ يَوَدُّ ٱلْمُجْرِمُ لَوْ يَفْتَدِى مِنْ عَذَابِ يَوْمِئِذٍۭ بِبَنِيهِ۝١١

    Yubassaroonahum yawaddu almujrimu law yaftadee min ʿathabi yawmiithin bibaneehi

    हालाँकि वे उन्हें दिखाए जा रहे होंगे। अपराधी चाहेगा कि काश उस दिन की यातना से बचने के लिए छुड़ौती में दे दे अपने बेटों को।

  12. وَصَـٰحِبَتِهِۦ وَأَخِيهِ۝١٢

    Wasahibatihi waakheehi

    तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।

  13. وَفَصِيلَتِهِ ٱلَّتِى تُـْٔوِيهِ۝١٣

    Wafaseelatihi allatee tuweehi

    तथा अपने परिवार (कुटुंब) को, जो उसे शरण देता था।

  14. وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنجِيهِ۝١٤

    Waman fee alardi jameeʿan thumma yunjeehi

    और उन सभी लोगों4 को जो धरती में हैं। फिर अपने आपको बचा ले।

    टिप्पणियाँ
    [4] ह़दीस में है कि जिस नारकी को सबसे सरल यातना दी जाएगी, उससे अल्लाह कहेगा : क्या धरती का सब कुछ तुम्हें मिल जाए तो उसे इसके दंड में दे दोगे? वह कहेगा : हाँ। अल्लाह कहेगा : तुम आदम की पीठ में थे, तो मैंने तुमसे इससे सरल की माँग की थी कि मेरा किसी को साझी न बनाना, पर तुमने इनकार किया और शिर्क किया। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6557, सह़ीह़ मुस्लिम : 2805)
  15. كَلَّآ ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ۝١٥

    Kalla innaha latha

    कदापि नहीं! निःसंदेह वह (जहन्नम) भड़कने वाली आग है।

  16. نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ۝١٦

    Nazzaʿatan lilshshawa

    जो खाल उधेड़ देने वाली है।

  17. تَدْعُوا۟ مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ۝١٧

    Tadʿoo man adbara watawalla

    वह उसे पुकारेगी, जिसने पीठ फेरी5 और मुँह मोड़ा।

    टिप्पणियाँ
    [5] अर्थात सत्य से।
  18. وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰٓ۝١٨

    Wajamaʿa faawʿa

    तथा (धन) एकत्र किया और संभाल कर रखा।

  19. ۞ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ خُلِقَ هَلُوعًا۝١٩

    Inna alinsana khuliqa halooʿan

    निःसंदेह मनुष्य बहुत अधीर बनाया गया है।

  20. إِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ جَزُوعًا۝٢٠

    Itha massahu alshsharru jazooʿan

    जब उसे कष्ट पहुँचता है, तो बहुत घबरा जाने वाला है।

  21. وَإِذَا مَسَّهُ ٱلْخَيْرُ مَنُوعًا۝٢١

    Waitha massahu alkhayru manooʿan

    और जब उसे भलाई मिलती है, तो बहुत रोकने वाला है।

  22. إِلَّا ٱلْمُصَلِّينَ۝٢٢

    Illa almusalleena

    सिवाय नमाज़ियों के।

  23. ٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَآئِمُونَ۝٢٣

    Allatheena hum ʿala salatihim daimoona

    जो हमेशा अपनी नमाज़ों की पाबंदी करते हैं।

  24. وَٱلَّذِينَ فِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ۝٢٤

    Waallatheena fee amwalihim haqqun maʿloomun

    और जिनके धन में एक निश्चित भाग है।

  25. لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ۝٢٥

    Lilssaili waalmahroomi

    माँगने वाले तथा वंचित6 के लिए।

    टिप्पणियाँ
    [6] अर्थात जो न माँगने के कारण वंचित रह जाता है।
  26. وَٱلَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ۝٢٦

    Waallatheena yusaddiqoona biyawmi alddeeni

    और जो बदले के दिन को सत्य मानते हैं।

  27. وَٱلَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ۝٢٧

    Waallatheena hum min ʿathabi rabbihim mushfiqoona

    और जो अपने पालनहार की यातना से डरने वाले हैं।

  28. إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ۝٢٨

    Inna ʿathaba rabbihim ghayru mamoonin

    निश्चय उनके पालनहार की यातना ऐसी चीज़ है, जिससे निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता।

  29. وَٱلَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَـٰفِظُونَ۝٢٩

    Waallatheena hum lifuroojihim hafithoona

    और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते हैं।

  30. إِلَّا عَلَىٰٓ أَزْوَٰجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَـٰنُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ۝٣٠

    Illa ʿala azwajihim aw ma malakat aymanuhum fainnahum ghayru maloomeena

    सिवाय अपनी पत्नियों से या अपने स्वामित्व में आई दासियों7 से, तो निश्चय वे निंदनीय नहीं हैं।

    टिप्पणियाँ
    [7] इस्लाम में उसी दासी से संभोग उचित है जिसे सेनापति ने ग़नीमत के दूसरे धनों के समान किसी मुजाहिद के स्वामित्व में दे दिया हो। इससे पूर्व किसी बंदी स्त्री से संभोग पाप तथा व्यभिचार है। और उससे संभोग भी उस समय वैध है जब उसे एक बार मासिक धर्म आ जाए। अथवा गर्भवती हो, तो प्रसव के पश्चात् ही संभोग किया जा सकता है। इसी प्रकार जिसके स्वामित्व में आई हो, उसके सिवा और कोई उससे संभोग नहीं कर सकता।
  31. فَمَنِ ٱبْتَغَىٰ وَرَآءَ ذَٰلِكَ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْعَادُونَ۝٣١

    Famani ibtagha waraa thalika faolaika humu alʿadoona

    फिर जो इसके अलावा कुछ और चाहे, तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।

  32. وَٱلَّذِينَ هُمْ لِأَمَـٰنَـٰتِهِمْ وَعَهْدِهِمْ رَٰعُونَ۝٣٢

    Waallatheena hum liamanatihim waʿahdihim raʿoona

    और जो अपनी अमानतों तथा अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखने वाले हैं।

  33. وَٱلَّذِينَ هُم بِشَهَـٰدَٰتِهِمْ قَآئِمُونَ۝٣٣

    Waallatheena hum bishahadatihim qaimoona

    और जो अपनी गवाहियों पर क़ायम रहने वाले हैं।

  34. وَٱلَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ يُحَافِظُونَ۝٣٤

    Waallatheena hum ʿala salatihim yuhafithoona

    तथा जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते हैं।

  35. أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى جَنَّـٰتٍ مُّكْرَمُونَ۝٣٥

    Olaika fee jannatin mukramoona

    वही लोग जन्नतों में सम्मानित होंगे।

  36. فَمَالِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ قِبَلَكَ مُهْطِعِينَ۝٣٦

    Famali allatheena kafaroo qibalaka muhtiʿeena

    फिर इन काफ़िरों को क्या हुआ है कि वे आपकी ओर दौड़े चले आ रहे है?

  37. عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ عِزِينَ۝٣٧

    ʿAni alyameeni waʿani alshshimali ʿizeena

    दाएँ से और बाएँ से समूह के समूह।8

    टिप्पणियाँ
    [8] अर्थात जब आप क़ुरआन सुनाते हैं, तो उसका उपहास करने के लिए समूहों में होकर आ जाते हैं। और इनका दावा यह है कि स्वर्ग में जाएँगे।
  38. أَيَطْمَعُ كُلُّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ أَن يُدْخَلَ جَنَّةَ نَعِيمٍ۝٣٨

    Ayatmaʿu kullu imriin minhum an yudkhala jannata naʿeemin

    क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति यह लालच रखता है कि उसे नेमत वाली जन्नत में दाखिल किया जाएगा?

  39. كَلَّآ ۖ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّمَّا يَعْلَمُونَ۝٣٩

    Kalla inna khalaqnahum mimma yaʿlamoona

    कदापि नहीं, निश्चय हमने उन्हें उस चीज़9 से पैदा किया है, जिसे वे जानते हैं।

    टिप्पणियाँ
    [9] अर्थात हीन जल (वीर्य) से। फिर भी घमंड करते हैं, तथा अल्लाह और उसके रसूल को नहीं मानते।
  40. فَلَآ أُقْسِمُ بِرَبِّ ٱلْمَشَـٰرِقِ وَٱلْمَغَـٰرِبِ إِنَّا لَقَـٰدِرُونَ۝٤٠

    Fala oqsimu birabbi almashariqi waalmagharibi inna laqadiroona

    तो मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) के रब की! निश्चय हम सक्षम हैं।

  41. عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ۝٤١

    ʿAla an nubaddila khayran minhum wama nahnu bimasbooqeena

    कि उनके स्थान पर उनसे उत्तम लोग ले आएँ तथा हम विवश नहीं हैं।

  42. فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا۟ وَيَلْعَبُوا۟ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ۝٤٢

    Fatharhum yakhoodoo wayalʿaboo hatta yulaqoo yawmahumu allathee yooʿadoona

    अतः आप उन्हें छोड़ दें कि वे व्यर्थ की बातों में लगे रहें तथा खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उनके उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता है।

  43. يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ ٱلْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ۝٤٣

    Yawma yakhrujoona mina alajdathi siraʿan kaannahum ila nusubin yoofidoona

    जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी से बाहर निकलेंगे, जैसे कि वे किसी निशान की ओर10 दौड़े जा रहे हैं।

    टिप्पणियाँ
    [10] या उनके थानों की ओर। क्योंकि संसार में वे सूर्योदय के समय बड़ी तीव्र गति से अपनी मूर्तियों की ओर दौड़ते थे।
  44. خَـٰشِعَةً أَبْصَـٰرُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلَّذِى كَانُوا۟ يُوعَدُونَ۝٤٤

    Khashiʿatan absaruhum tarhaquhum thillatun thalika alyawmu allathee kanoo yooʿadoona

    उनकी निगाहें झुकी होंगी, उनपर अपमान छाया होगा। यही वह दिन है जिसका उनसे वादा किया11 जाता था।

    टिप्पणियाँ
    [11] अर्थात रसूलों की ज़बानी तथा आकाशीय पुस्तकों के माध्यम से।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह मआरिज के नाम का मतलब क्या है?

मआरिज का मतलब "चढ़ने की सीढ़ियाँ" है।

सूरह मआरिज किस पारे में है?

सूरह मआरिज पारा 29 में है।

सूरह मआरिज में कितनी आयतें हैं?

सूरह मआरिज में 44 आयतें हैं।

सूरह मआरिज मक्की है या मदनी?

सूरह मआरिज मक्की सूरह है।

सूरह मआरिज क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 70वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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