سورة العاديات

सूरह आदियात हिंदी में

दौड़ने वाले घोड़े

मुसहफ़

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सूरह आदियात (العاديات) क़ुरआन की 100वीं सूरह है और इसमें 11 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "दौड़ने वाले घोड़े" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह आदियात का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह आदियात: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. وَٱلْعَـٰدِيَـٰتِ ضَبْحًا۝١

    Waalʿadiyati dabhan

    क़सम है उन घोड़ों की, जो पेट से साँस की आवाज़ निकालते हुए डौड़ने वाले हैं!

  2. فَٱلْمُورِيَـٰتِ قَدْحًا۝٢

    Faalmooriyati qadhan

    फिर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालने वाले घोड़ों की क़सम!

  3. فَٱلْمُغِيرَٰتِ صُبْحًا۝٣

    Faalmugheerati subhan

    फिर सुबह के समय हमला करने वाले (घोड़ों) की क़सम!

  4. فَأَثَرْنَ بِهِۦ نَقْعًا۝٤

    Faatharna bihi naqʿan

    फिर उससे धूल उड़ाते हैं।

  5. فَوَسَطْنَ بِهِۦ جَمْعًا۝٥

    Fawasatna bihi jamʿan

    फिर वे उसके साथ (दुश्मन की) सेना के बीच घुस जाते हैं।

  6. إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لِرَبِّهِۦ لَكَنُودٌ۝٦

    Inna alinsana lirabbihi lakanoodun

    निःसंदेह इनसान अपने पालनहार का बड़ा कृतघ्न (नाशुक्रा) है।

  7. وَإِنَّهُۥ عَلَىٰ ذَٰلِكَ لَشَهِيدٌ۝٧

    Wainnahu ʿala thalika lashaheedun

    और निःसंदेह वह इसपर स्वयं गवाह है।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-7) इन आरंभिक आयतों में मानवजाति (इनसान) की कृतघ्नता का वर्णन किया गया है। जिसकी भूमिका के रूप में एक पशु की कृतज्ञता को शपथ स्वरूप उदाहरण के लिए प्रस्तुत किया गया है। जिसे इनसान पोसता है, और वह अपने स्वामी का इतना भक्त होता है कि उसे अपने ऊपर सवार करके नीचे ऊँचे मार्गों पर रात-दिन की परवाह किए बिना दौड़ता और अपनी जान जोखिम में डाल देता है। परंतु इनसान जिसे अल्लाह ने पैदा किया, समझबूझ दी और उसके जीवन यापन के सभी साधन बनाए, वह उसका उपकार नहीं मानता और जानबूझ कर उसकी अवज्ञा करता है, उसे इस पशु से सीख लेनी चाहिए।
  8. وَإِنَّهُۥ لِحُبِّ ٱلْخَيْرِ لَشَدِيدٌ۝٨

    Wainnahu lihubbi alkhayri lashadeedun

    और निःसंदेह वह धन के मोह में बड़ा सख़्त है।2

    टिप्पणियाँ
    [2] इस आयत में उसकी कृतघ्नता का कारण बताया गया है कि जिस इनसान को सर्वाधिक प्रेम अल्लाह से होना चाहिए, वही अत्याधिक प्रेम धन से करता है।
  9. ۞ أَفَلَا يَعْلَمُ إِذَا بُعْثِرَ مَا فِى ٱلْقُبُورِ۝٩

    Afala yaʿlamu itha buʿthira ma fee alquboori

    तो क्या वह नहीं जानता, जब क़ब्रों में जो कुछ है, निकाल बाहर किया जाएगा?

  10. وَحُصِّلَ مَا فِى ٱلصُّدُورِ۝١٠

    Wahussila ma fee alssudoori

    और जो कुछ सीनों में है, वह प्रकट कर दिया जाएगा।3

    टिप्पणियाँ
    [3] (9-10) इन आयतों में सावधान किया गया है कि सांसारिक जीवन के पश्चात एक दूसरा जीवन भी है तथा उसमें अल्लाह के सामने अपने कर्मों का उत्तर देना है, जो प्रत्येक के कर्मों का ही नहीं, उनके सीनों के भेदों को भी प्रकाश में ला कर दिखा देगा कि किसने अपने धन तथा बल का कुप्रयोग कर कृतघ्नता की है, और किसने कृतज्ञता की है। और प्रत्येक को उसका प्रतिकार भी देगा। अतः इनसान को धन के मोह में अंधा तथा अल्लाह का कृतघ्न नहीं होना चाहिए, और उसके सत्धर्म का पालन करना चाहिए।
  11. إِنَّ رَبَّهُم بِهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّخَبِيرٌۢ۝١١

    Inna rabbahum bihim yawmaithin lakhabeerun

    निःसंदेह उनका पालनहार उस दिन उनके बारे में पूरी ख़बर रखने वाला है।4

    टिप्पणियाँ
    [4] अर्थात वह सूचित होगा कि कौन क्या है, और किस प्रतिकार का भागी है?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह आदियात के नाम का मतलब क्या है?

आदियात का मतलब "दौड़ने वाले घोड़े" है।

सूरह आदियात किस पारे में है?

सूरह आदियात पारा 30 में है।

सूरह आदियात में कितनी आयतें हैं?

सूरह आदियात में 11 आयतें हैं।

सूरह आदियात मक्की है या मदनी?

सूरह आदियात मक्की सूरह है।

सूरह आदियात क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 100वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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