سورة القدر

सूरह क़द्र हिंदी में

शबे क़द्र

मुसहफ़

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सूरह क़द्र (القدر) क़ुरआन की 97वीं सूरह है और इसमें 5 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "शबे क़द्र" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह क़द्र का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह क़द्र: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِّسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ۝١

    Inna anzalnahu fee laylati alqadri

    निःसंदेह हमने इस (क़ुरआन) को क़द्र की रात (महिमा वाली रात) में उतारा।

  2. وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ۝٢

    Wama adraka ma laylatu alqadri

    और आपको क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है?

  3. لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ۝٣

    Laylatu alqadri khayrun min alfi shahrin

    क़द्र की रात हज़ार महीनों से उत्तम है।1

    टिप्पणियाँ
    [1] हज़ार मास से उत्तम होने का अर्थ यह कि इस शुभ रात्रि में इबादत की बहुत बड़ी प्रधानता है। अबू हुरैरह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि जो व्यक्ति इस रात में ईमान (सत्य विश्वास) के साथ तथा पुण्य की निय्यत से इबादत करे, तो उसके सभी पहले के पाप क्षमा कर दिए जाते हैं। (देखिए : सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्या : 35, तथा सह़ीह़ मुस्लिम, ह़दीस संख्या : 760)
  4. تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ۝٤

    Tanazzalu almalaikatu waalrroohu feeha biithni rabbihim min kulli amrin

    उसमें फ़रिश्ते तथा रूह (जिबरील) अपने पालनहार की अनुमति से हर आदेश के साथ उतरते हैं।2

    टिप्पणियाँ
    [2] 'रूह़' से अभिप्राय जिब्रील अलैहिस्सलाम हैं। उनकी प्रधानता के कारण सभी फ़रिश्तों से उनकी अलग चर्चा की गई है। और यह भी बताया गया है कि वे स्वयं नहीं बल्कि अपने पालनहार की आज्ञा से ही उतरते हैं।
  5. سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ۝٥

    Salamun hiya hatta matlaʿi alfajri

    वह रात फ़ज्र उदय होने तक सर्वथा सलामती (शांति) है।3

    टिप्पणियाँ
    [3] इसका अर्थ यह है कि संध्या से भोर तक यह रात्रि सर्वथा शुभ तथा शांतिमय होती है। सह़ीह़ ह़दीसों से स्पष्ट होता है कि यह शुभ रात्रि रमज़ान की अंतिम दस रातों में से कोई एक रात है। इसलिए हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन दस रातों को अल्लाह की उपासना में बिताते थे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह क़द्र के नाम का मतलब क्या है?

क़द्र का मतलब "शबे क़द्र" है।

सूरह क़द्र किस पारे में है?

सूरह क़द्र पारा 30 में है।

सूरह क़द्र में कितनी आयतें हैं?

सूरह क़द्र में 5 आयतें हैं।

सूरह क़द्र मक्की है या मदनी?

सूरह क़द्र मक्की सूरह है।

सूरह क़द्र क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 97वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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