سورة العلق

सूरह अलक़ हिंदी में

जमा हुआ ख़ून

मुसहफ़

मिशारी राशिद अल-अफ़ासीMP3 डाउनलोड करें

सूरह अलक़ (العلق) क़ुरआन की 96वीं सूरह है और इसमें 19 आयतें हैं। इसके नाम का मतलब "जमा हुआ ख़ून" है। यह मक्की सूरह है और पारा 30 में है।

इस पन्ने पर आप सूरह अलक़ का पूरा अरबी पाठ मौलाना अज़ीज़ुल हक़ उमरी के हिंदी तर्जुमे और रोमन उच्चारण के साथ आयत-दर-आयत पढ़ सकते हैं और तिलावत सुन सकते हैं।

मुकम्मल सूरह अलक़: अरबी, हिंदी तर्जुमा और रोमन उच्चारण

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ۝١

    Iqra biismi rabbika allathee khalaqa

    अपने पालनहार के नाम से पढ़, जिसने पैदा किया।

  2. خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِنْ عَلَقٍ۝٢

    Khalaqa alinsana min ʿalaqin

    जिसने मनुष्य को रक्त के लोथड़े से पैदा किया।

  3. ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ۝٣

    Iqra warabbuka alakramu

    पढ़ और तेरा पालनहार बड़े करम (उदारता) वाला है।

  4. ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ۝٤

    Allathee ʿallama bialqalami

    जिसने क़लम के द्वारा सिखाया।

  5. عَلَّمَ ٱلْإِنسَـٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ۝٥

    ʿAllama alinsana ma lam yaʿlam

    उसने इनसान को वह सिखाया, जो वह नहीं जानता था।1

    टिप्पणियाँ
    [1] (1-5) इन आयतों में प्रथम वह़्य (प्रकाशना) का वर्णन है। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का से कुछ दूर "जबल नूर" (ज्योति पर्वत) की एक गुफा में जिसका नाम "ह़िरा" है जाकर एकांत में अल्लाह को याद किया करते थे। और वहीं कई दिन तक रह जाते थे। एक दिन आप इसी गुफा में थे कि अकस्मात आपपर प्रथम वह़्य (प्रकाशना) लेकर फ़रिश्ता उतरा। और आपसे कहा : "पढ़ो"। आपने कहा : मैं पढ़ना नहीं जानता। इसपर फ़रिश्ते ने आपको अपने सीने से लगाकर दबाया। इसी प्रकार तीन बार किया और आपको पाँच आयतें सुनाईं। यह प्रथम प्रकाशना थी। अब आप मुह़म्मद पुत्र अब्दुल्लाह से मुह़म्मद रसूलुल्लाह होकर डरते-काँपते घर आए। इस समय आपकी आयु 40 वर्ष थी। घर आकर कहा कि मुझे चादर उढ़ा दो। जब कुछ शांत हुए तो अपनी पत्नी ख़दीजा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को पूरी बात सुनाई। उन्होंने आपको सांत्वना दी और अपने चाचा के पुत्र "वरक़ा बिन नौफ़ल" के पास ले गईं जो ईसाई विद्वान थे। उन्होंने आपकी बात सुनकर कहा : यह वही फ़रिश्ता है जो मूसा (अलैहिस्सलाम) पर उतारा गया था। काश मैं तुम्हारी नुबुव्वत (दूतत्व) के समय शक्तिशाली युवक होता और उस समय तक जीवित रहता जब तुम्हारी जाति तुम्हें मक्का से निकाल देगी! आपने कहा : क्या लोग मुझे निकाल देंगे? वरक़ा ने कहा : कभी ऐसा नहीं हुआ कि जो आप लाए हैं, उससे शत्रुता न की गई हो। यदि मैंने आपका वह समय पाया, तो आपकी भरपूर सहायता करूँगा। परंतु कुछ ही समय गुज़रा था कि वरक़ा का देहाँत हो गया। और वह समय आया जब आपको 13 वर्ष बाद मक्का से निकाल दिया गया। और आप मदीना की ओर हिजरत (प्रस्थान) कर गए। (देखिए : इब्ने कसीर) आयत संख्या 1 से 5 तक निर्देश दिया गया है कि अपने पालनहार के नाम से उसके आदेश क़ुरआन का अध्ययन करो जिसने इनसान को रक्त के लोथड़े से बनाया। तो जिसने अपनी शक्ति और दक्षता से जीता जागता इनसान बना दिया, वह उसे पुनः जीवित कर देने की भी शक्ति रखता है। फिर ज्ञान अर्थात क़ुरआन प्रदान किए जाने की शुभ सूचना दी गई है।
  6. كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَيَطْغَىٰٓ۝٦

    Kalla inna alinsana layatgha

    कदापि नहीं, निःसंदेह मनुष्य सीमा पार कर जाता है।

  7. أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ۝٧

    An raahu istaghna

    इसलिए कि वह स्वयं को बेनियाज़ (धनवान्) देखता है।

  8. إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ۝٨

    Inna ila rabbika alrrujʿa

    निःसंदेह, तेरे पालनहार ही की ओर वापस लौटना है।2

    टिप्पणियाँ
    [2] (6-8) इन आयतों में उनको धिक्कारा है जो धन के अभिमान में अल्लाह की अवज्ञा करते हैं और इस बात से निश्चिन्त हैं कि एक दिन उन्हें अपने कर्मों का जवाब देने के लिए अल्लाह के पास जाना भी है।
  9. أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ۝٩

    Araayta allathee yanha

    क्या आपने उस व्यक्ति को देखा, जो रोकता है।

  10. عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ۝١٠

    ʿAbdan itha salla

    एक बंदे को, जब वह नमाज़ अदा करता है।

  11. أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ۝١١

    Araayta in kana ʿala alhuda

    क्या आपने देखा यदि वह सीधे मार्ग पर हो।

  12. أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ۝١٢

    Aw amara bialttaqwa

    या अल्लाह से डरने का आदेश देता हो?

  13. أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ۝١٣

    Araayta in kaththaba watawalla

    क्या आपने देखा यदि उसने झुठलाया तथा मुँह फेरा?3

    टिप्पणियाँ
    [3] (9-13) इन आयतों में उनपर धिक्कार है जो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के विरोध पर तुल गए। और इस्लाम और मुसलमानों की राह में रुकावट डालते और नमाज़ से रोकते हैं।
  14. أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ۝١٤

    Alam yaʿlam bianna Allaha yara

    क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?

  15. كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ۝١٥

    Kalla lain lam yantahi lanasfaʿan bialnnasiyati

    कदापि नहीं, निश्चय यदि वह नहीं माना, तो हम अवश्य उसे माथे की लट पकड़कर घसीटेंगे।

  16. نَاصِيَةٍ كَـٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍ۝١٦

    Nasiyatin kathibatin khatiatin

    ऐसे माथे की लट जो झूठा और पापी है।

  17. فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ۝١٧

    Falyadʿu nadiyahu

    तो वह अपनी सभा को बुला ले।

  18. سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ۝١٨

    Sanadʿu alzzabaniyata

    हम भी जहन्नम के फ़रिश्तों को बुला लेंगे।4

    टिप्पणियाँ
    [4] (14-18) इन आयतों में सत्य के विरोधी को दुष्परिणाम की चेतावनी है।
  19. كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩۝١٩

    Kalla la tutiʿhu waosjud waiqtarib

    कदापि नहीं, आप उसकी बात न मानें, (बल्कि) सजदा करें और (अल्लाह के) निकट हो जाएँ।5

    टिप्पणियाँ
    [5] (19) इस में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और आपके माध्यम से साधारण मुसलमानों को निर्देश दिया गया है कि सहनशीलता के साथ किसी धमकी पर ध्यान न देते हुए नमाज़ अदा करते रहो ताकि इसके द्वारा तुम अल्लाह के समीप हो जाओ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूरह अलक़ के नाम का मतलब क्या है?

अलक़ का मतलब "जमा हुआ ख़ून" है।

सूरह अलक़ किस पारे में है?

सूरह अलक़ पारा 30 में है।

सूरह अलक़ में कितनी आयतें हैं?

सूरह अलक़ में 19 आयतें हैं।

सूरह अलक़ मक्की है या मदनी?

सूरह अलक़ मक्की सूरह है।

सूरह अलक़ क़ुरआन की कौन-सी सूरह है?

यह क़ुरआन की 96वीं सूरह है।

स्रोत

  • Arabic text: Tanzil Quran Text (Uthmani) (Tanzil Project, CC BY 3.0), reproduced without changes.
  • Translation: Azizul Haq Al-Omari, from QuranEnc.com, version 1.1.5, reproduced without changes.
  • Transliteration: Tanzil.net English transliteration.
  • Recitation: Mishary Rashid Alafasy, via QuranicAudio.com and EveryAyah.com.
  • Word by word: recordings and meanings from Quran.com (Quran Foundation), played when you tap a word.
  • Madinah and IndoPak fonts (Settings): the text in those scripts and their fonts come from the Quran Foundation (Quran.com); the Madinah font is the King Fahd Glorious Quran Printing Complex's Uthmanic Hafs font.

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